केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र पर 'राजनीतिक भेदभाव' का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव वर्षों से धूल फांक रहा है, लेकिन केंद्र इसे मंजूरी नहीं दे रहा.
ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में कहा, "चूंकि वे 'बंगाल विरोधी' हैं, इसलिए हमारे प्रस्तावों को कभी स्वीकार नहीं करते. केरल में माकपा (CPIM) और भाजपा के बीच मिलीभगत है, इसलिए वहां का रास्ता साफ कर दिया गया."
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल इसलिए बंगाल की मांग को दबा रही है क्योंकि राज्य सरकार उनके सामने झुकने को तैयार नहीं है.
यह विवाद नया नहीं है. फरवरी 2025 में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने राज्यसभा में 'जीरो ऑवर' के दौरान यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने याद दिलाया था कि जुलाई 2018 में ही पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य का नाम 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव पारित किया था. टीएमसी का तर्क है कि यह नाम राज्य के इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है, फिर भी केंद्र ने इसे ठंडे बस्ते में डाल रखा है.
यह भी पढ़ें: केरल का नाम बदलने को भी मंजूरी, जानें और किन फैसलों पर लगी मोदी सरकार की मुहर
AITC का 'मगरमच्छ के आंसू' वाला तंज
तृणमूल कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय दोनों नेता बंगाल की संस्कृति के प्रति प्यार का नाटक करते हैं, लेकिन असल में वे 'बांग्ला-विरोधी' हैं. पार्टी ने कहा कि किसी राज्य की पहचान का सम्मान होना चाहिए, लेकिन बंगाल के साथ हो रहा यह भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.