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Kerala Exit Poll 2026: सीएम के लिए पिनाराई विजयन अब भी नंबर-1 पसंद, लेकिन पार्टी रेस में पीछे

9 अप्रैल को हुई रिकॉर्ड वोटिंग ने यह तो तय कर दिया था कि जनता के मन में कुछ बड़ा चल रहा है. अब 4 मई को यह देखना रोमांचक होगा कि क्या पिनाराई विजयन अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के दम पर एग्जिट पोल को गलत साबित करेंगे, या फिर केरल अपने उस पुराने रिवाज पर मुहर लगाएगा जहां हर पांच साल में राज बदल जाता है.

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सीएम के रूप में लोगों को पिनाराई विजयन सबसे ज्यादा पसंद (Photo-ITG)
सीएम के रूप में लोगों को पिनाराई विजयन सबसे ज्यादा पसंद (Photo-ITG)

केरल में भले ही सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन (LDF) पिछड़ती दिख रही है, लेकिन केरल में सीएम की पसंद पिनाराई विजयन ही बने हुए हुए हैं. राज्य के 33% लोग मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा पिनाराई को मानते हैं, वहीं उनके बाद UDF के वी.डी. सतीशन (21%) का नंबर आता है. 

कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को इस चुनाव में 78 से 90 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. यदि ये आंकड़े नतीजों में बदलते हैं, तो UDF बहुमत के जादुई आंकड़े (71) को आसानी से पार कर लेगा. दूसरी ओर, लगातार दूसरी बार सत्ता का सुख भोग रहे LDF (वामपंथी गठबंधन) के लिए ये रुझान काफी निराशाजनक हैं.  

एग्जिट पोल की मानें तो LDF इस बार 50 से 60 सीटों पर सिमट सकता है. यह उन वामपंथी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा झटका है जो इस बार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में जीत की 'हैट्रिक' का सपना देख रहे थे. चेहरा विजयन का, लेकिन मूड 'बदलाव' काइस एग्जिट पोल की सबसे दिलचस्प बात मुख्यमंत्री पद की पसंद को लेकर है. 

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पार्टी पिछड़ी, लेकिन सीएम लोगों को पसंद  

भले ही गठबंधन के तौर पर LDF पिछड़ता दिख रहा है, लेकिन व्यक्तिगत लोकप्रियता के मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन आज भी राज्य में सबसे बड़े नेता बने हुए हैं.  सर्वे में 33% लोगों ने विजयन को ही अपनी पहली पसंद बताया है. वहीं, विपक्ष के नेता और UDF के प्रमुख चेहरा वी.डी. सतीशन 21% के साथ दूसरे स्थान पर हैं.  यह विरोधाभास दर्शाता है कि जनता को विजयन के चेहरे से ज्यादा शायद सरकार की कार्यशैली या स्थानीय उम्मीदवारों से नाराजगी रही होगी.

सर्वे के अनुसार पार्टी के प्रति वफादारी 32% रही. केरल में आज भी एक बड़ा वर्ग अपनी विचारधारा और पार्टी के प्रति पूरी तरह वफादार है.  

परिवर्तन की इच्छा (26%): राज्य की एक चौथाई से ज्यादा जनता ने माना कि वे बदलाव चाहते हैं. यही वह 'स्विंग फैक्टर' है जो UDF को सत्ता की ओर ले जाता दिख रहा है.  

विकास (10%): विकास का मुद्दा भी मतदाताओं के दिमाग में रहा. सर्वे का गणित और सामाजिक आधार यह एग्जिट पोल कोई मामूली सर्वे नहीं है. यह केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर 24,419 लोगों के साथ किए गए आमने-सामने के साक्षात्कार पर आधारित है.

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सामाजिक आधार की बात करें तो UDF को ईसाई (60%) और मुस्लिम (63%) समुदायों का एकतरफा समर्थन मिलता दिख रहा है. वहीं, SC (57%) और एझवा (47%) समुदायों में LDF का दबदबा बरकरार है. बीजेपी की अगुवाई वाले NDA की बात करें तो उन्हें 0 से 3 सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे साफ है कि केरल में मुकाबला मुख्य रूप से दो ध्रुवीय ही रहा है.
 

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