पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने प्रचार अभियान में और ताकत झोंकनी शुरू कर दी है. आजतक को मिले बीजेपी के कैंपेन शेड्यूल के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसके रणनीति च्रचार अभियान के प्रमुख चेहरे हैं.
पीएम मोदी बीजेपी के कैम्पेन का फेस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल में 11 बड़ी रैलियों को संबोधित करने वाले हैं. बीजेपी ने पीएम मोदी की रैलियों को राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बहुत सोच समझकर तय किया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की ये रैलियां सिर्फ सामान्य चुनावी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनमत को प्रभावित करने वाली साबित होंगी.
पीएम मोदी की रैलियों का फोकस स्विंग सीटों पर रखा गया है. वह अपने भाषण में केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को प्रमुखता से उठा रहे हैं और बीजेपी के सुशासन के एजेंडे को जनता के सामने रख रहे हैं. उनकी हर रैली को बीजेपी ने बड़े जनसमूह को साधने और सत्तारूढ़ टीएमसी सरकार को चुनौती देने के नजरिए से डिजाइन किया है. पीएम मोदी अपनी रैलियों में बीजेपी को डेवलपमेंट और गुड गवर्नेंस के विकल्प के रूप में पेश करेंगे.
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अमित शाह हैं रणनीति के मास्टरमाइंड
अगर पीएम मोदी बीजेपी के प्रचार अभियान का चेहरा हैं, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जमीन पर इसे आगे बढ़ाने वाले मुख्य रणनीतिकार हैं. वह खुद पश्चिम बंगाल में 30 रैलियों करेंगे, जो बीजेपी के सबसे आक्रामक प्रचार अभियान को दर्शाती है. उनकी भूमिका सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बूथ स्तर पर प्रबंधन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, अहम जिलों में क्लस्टर-आधारित कैंपेनिंग, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेतृत्व से सीधा संवाद करने में भी काफी सक्रिय भूमिका में हैं. अमित शाह का व्यस्त कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि बीजेपी अपने संगठन को ताकतवर बनाने और हर वोट पर पूरा ध्यान दे रही है.
योगी आदित्यनाथ हैं स्टार मोबिलाइजर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बंगाल में बीजेपी के चुनाव प्रचार अभियान के अहम चेहरे हैं. वह भी प्रधानमंत्री मोदी के बराबर 11 रैलियां करेंगे. उनकी मौजूदगी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वह बीजेपी की विचारधारा और हिंदुत्व के एजेंडे के एक मजबूत प्रतिनिधि हैं. सीएम योगी अपने जोशीले भाषण से मतदाताओं में एक अपील पैदा करते हैं और भीड़ जुटाने की क्षमता रखते हैं. ध्रुवीकरण वाले क्षेत्रों में वह बीजेपी के लिए एक प्रभावी कैम्पेनर साबित हो सकते हैं. उनकी रैलियां कानून-व्यवस्था, सुशासन मॉडल और वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रहेंगी, जिससे बीजेपी के अभियान को और धार मिलेगी.
बीजेपी ने कई वरिष्ठ नेताओं को भी मैदान में उतारा है. इनमें स्मृति ईरानी की 13 रैलियां, नितिन गडकरी की 10 रैलियां और राजनाथ सिंह की 6 रैलियां शामिल हैं. इसके साथ ही हिमंता बिस्वा सरमा जैसे क्षेत्रीय नेताओं की तैनाती भी चुनाव प्रचार में की गई है. इस तरह बीजेपी ने पूरे देश से अपने प्रभावी नेताओं को बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए उतारा है. भगवा पार्टी की रणनीति स्पष्ट है, चुनाव के पहले चरण से पहले जनता के बीच अधिकतम पहुंच बनाना.
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बीजेपी की त्रिस्तरीय रणनीति
हाई-विजिबिलिटी कैंपेनिंग- पीएम मोदी और सीएम योगी की बड़ी रैलियों के जरिए माहौल बनाना.
ग्राउंड लेवल रणनीति- अमित शाह के जरिए बूथ स्तर तक पकड़ मजबूत करना.
लीडरशिप सैचुरेशन- ज्यादा से ज्यादा सीटों को कवर कर प्रचार में कोई कमी न छोड़ना.
पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में बीजेपी का यह आक्रामक अभियान साफ संकेत देता है कि पश्चिम बंगाल उसके लिए सबसे अहम चुनावी रणक्षेत्र बना हुआ है. पीएम मोदी की लोकप्रियता, अमित शाह की रणनीति और सीएम योगी की जनसमर्थन जुटाने की क्षमता- इन तीनों का संयुक्त प्रभाव बीजेपी के लिए चुनावी सफलता की कुंजी माना जा रहा है. 23 अप्रैल नजदीक आने के साथ ही बंगाल में हाल के वर्षों का सबसे तीखा चुनाव प्रचार देखने को मिल रहा है, जिसने राज्य में एक कड़े मुकाबले की जमीन तैयार कर दी है.