पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस बीच राज्य कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कांग्रेस आलाकमान से विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया है.
बंगाल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, सांसद ईशा खान चौधरी समेत राज्य के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में विस्तृत चर्चा हुई. इसमें बंगाल के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की भावना को ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया कि पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी.
कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से यह मांग रही है कि पार्टी राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ चुनावी मैदान में उतरे. बयान में एआईसीसी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा गया कि केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस की भावनाओं का सम्मान किया और अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को मंजूरी दी.
कांग्रेस के इस फैसले को राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है. इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं. ममता बनर्जी ने कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि टीएमसी की रणनीति स्पष्ट है और पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि अन्य विपक्षी दल अक्सर टीएमसी को हराने की रणनीति बनाते हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस और टीएमसी दोनों के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से पश्चिम बंगाल में बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है. इससे भारतीय जनता पार्टी, वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के लिए भी चुनावी समीकरण बदल सकते हैं.