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असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी को क्यों सौंपी गई है? समझें कांग्रेस की रणनीति

असम के सियासी रण में एक फिर से प्रियंका गांधी उतर रही हैं. कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को असम विधानसभा चुनाव स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया है. कांग्रेस ने सोची-समझी रणनीति के तहत प्रियंका को असम की कमान सौंपी है, जिसके जरिए हिमंत बिस्वा सरमा की राजनीति को काउंटर करने का दांव माना जा रहा है.

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कांग्रेस ने असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी को सौंपी (Photo-PTI)
कांग्रेस ने असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी को सौंपी (Photo-PTI)

असम में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. बीजेपी ने अपने मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी को सौंप दी है. प्रियंका को कांग्रेस ने असम चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अब स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष होने के नाते असम विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन की जिम्मेदारी उठाएंगी. प्रियंका गांधी की भूमिका असम के सियासी रण में सिर्फ कैंडिडेट के चयन तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति है.

स्क्रीनिंग कमेटी के तौर पर प्रियंका गांधी का रोल तकनीकी लग सकता है, लेकिन यह चुनावी राजनीति की निर्णायक प्रक्रियाओं में से एक है. ऐसे में प्रियंका गांधी असम में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की इबादत लिखने का काम करेंगी, क्योंकि पार्टी को इस राज्य से काफी उम्मीदें हैं.

असम से ही कांग्रेस को उम्मीद

देश के जिन पांच राज्यों- असम, तमिलनाडु, बंगाल, केरल और पुडुचेरी में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें से कांग्रेस को सबसे ज्यादा उम्मीदें असम से हैं. इसी संभावना को देखते हुए कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को कमान सौंपी है ताकि उम्मीदवारों के चयन से लेकर बीजेपी के साथ मुकाबले तक मजबूती से लड़ा जा सके.

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असम में कांग्रेस की स्थिति बहुत कमजोर नहीं है.2021 के विधानसभा चुनाव में 126 सीटों में से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को 75 और कांग्रेस गठबंधन को 50 सीटें मिली थीं। इस तरह दोनों के बीच सिर्फ 25 सीटों का अंतर रह गया थ.

वहीं, वोट प्रतिशत में केवल 1.6 फीसदी का फर्क था. एनडीए को 43.9 फीसदी और कांग्रेस गठबंधन को 42.3 फीसदी वोट मिले थे. कांग्रेस को लगता है कि यदि वह पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरती है, तो उसकी राह आसान हो सकती है.

बीजेपी-कांग्रेस में सीधा मुकाबला

चुनावी राज्यों में असम ही इकलौता ऐसा राज्य है जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. ऐसे में कांग्रेस बेहतर तालमेल के साथ उतर बीजेपी को कड़ी चुनौती दे सकती है. यहां प्रियंका गांधी की भूमिका निर्णायक हो जाती है., प्रियंका लंबे समय तक यूपी की प्रभारी रही हैं और अब पार्टी ने उन्हें असम की जिम्मेदारी दी है, पार्टी उनकी मौजूदगी के इर्द-गिर्द अपनी रणनीति को धार देने की तैयारी में है.,

कैंडिडेट सेलेक्शन की जिम्मेदारी

प्रिंयका गांधी को कांग्रेस ने स्क्रीनिंग कमेटी की कमान सौंपी है. स्क्रीनिंग कमेटी का मुख्य काम विधानसभा की हर सीट से आने वाले संभावित उम्मीदवारों में से मजबूत कैंडिडेट को तलाशना, उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता, सामाजिक स्वीकार्यता और जीत दर्ज करने की ताकत का आकलन करना है.

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कांग्रेस में भले ही कैंडिडेट की लिस्ट पर फाइनल मुहर पार्टी के केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) लगाती हो, लेकिन CEC तक कौन-से नाम पहुंचेंगे, यह जिम्मा स्क्रीनिंग कमेटी का होता है. प्रियंका गांधी के लिए असम नया नहीं है. 2021 विधानसभा चुनाव में औपचारिक रूप से भले ही आगे न दिखीं हों, लेकिन रणनीतिक स्तर पर उनकी भूमिका अहम थी.

2021 के चुनाव में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का सीनियर ऑब्जर्वर थे. इस बार भी भूपेश बघेल और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को असम के सीनियर ऑब्जर्वर बनाया गया है. कांग्रेस के दोनों ही नेता बहुत की मजबूत और रणनीतिकार के रूप में माने जाते हैं.

दलबदल को रोकने की प्लान

कांग्रेस को यह डर है कि पार्टी के कुछ नेता चुनाव से पहले पाला बदल सकते हैं. पूर्वोत्तर की राजनीति में दलबदल कोई नई बात नहीं है. पार्टी को इसका खामियाजा पहले भी भुगतना पड़ चुका है. इसलिए शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर नियंत्रण हो. ऐसे में प्रियंका गांधी को टिकट वितरण का जिम्मा सौंपा है तो साथ ही डीके शिवकुमार और भूपेश बघेल को लगाया है. शिवकुमार दलबदल करने वाले नेताओं को नियंत्रण करना बाखूबी तौर पर जानते हैं.

हिमंता को काउंटर करेंगी प्रियंका

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असम की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा गांधी परिवार के मुखर आलोचक रहे हैं. बीजेपी उन्हीं के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस ने उनके सामने गांधी परिवार से प्रियंका गांधी को उतारकर एक बड़ा दांव चला है. प्रियंका अपनी आक्रामक शैली के लिए जानी जाती हैं. अब देखना यह है कि क्या प्रियंका गांधी पूर्वोत्तर के इस 'बीजेपी किले' को भेद पाने में सफल होती हैं या नहीं.

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