यूपी के मुजफ्फरनगर जिले की मीरापुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में बुधवार को वोटिंग होनी है. इससे पहले सोमवार को चुनाव प्रचार के आखिरी दिन AIMIM प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने जनसभा को संबोधित किया और फिलिस्तीन का उदाहरण देकर मुसलमानों को लामबंद करने की कोशिश की है. ओवैसी ने यहां सड़क, बिजली, शुगर मिल की क्षमता बढ़ाने, अस्पताल और बच्चियों के लिए डिग्री कॉलेज ना होने का मुद्दा भी उठाया.
मीरापुर विधानसभा सीट से AIMIM ने अरशद राणा को उम्मीदवार बनाया है. यहां से आजाद समाज पार्टी से जाहिद हुसैन, बहुजन समाज पार्टी से शाहनजर, समाजवादी पार्टी से सुम्बुल राणा, AIMIM से अरशद राणा और एनडीए से लोक दल प्रत्याशी मिथलेश पाल चुनावी मैदान में हैं.
'हम नतीजे देखकर हिम्मत नहीं हारते'
चुनावी सभा में ओवैसी ने कहा, हम कई वर्ष से यूपी की सरजमी पर काम कर रहे हैं. हम चुनाव लड़ते हैं. हारते हैं और जीतते भी हैं. लेकिन हम चुनाव के नतीजे देखकर हिम्मत हारने वाले लोग नहीं हैं. हमारे हौसले कल भी बुलंद थे और आगे भी बुलंद रहेंगे. लेकिन फैसला आपको करना है.
'मिसाल दे रहा हूं, बुरा मत मानिए...'
उन्होंने कहा, जम्हूरियत में जब जंग करनी हो तो खूब डटकर मुकाबला करना चाहिए. लेकिन हम लोग जंग करने से पहले ही नतीजे पर पहुंच जाते हैं. जंग से पहले हार मत मानिए. डर के साथ वोट मत करिए. अगर जम्हूरियत में जंग करना है तो तगड़ा मुकाबला करिए. जंग से पहले नतीजे पर मत पहुंचिए. मिसाल दे रहा हूं, बुरा मत मानिए. 70 साल से फिलिस्तीनी, गाजा में लड़ाई लड़ रहे हैं. वो मर रहे हैं. 40 हजार अब तक मर गए. 12 लाख बेघर हो गए. लेकिन उनके हौंसले को देखो- वो डर नहीं रहे. वो मुकाबला कर रहे हैं. क्योंकि इजरायल जालिम मुल्क है और वो जालिम मुल्क गाजा में जुल्म ढा रहा है. लेकिन वो गाजा में लड़ रहे हैं.
ओवैसी ने उठाया वक्फ बिल का मुद्दा
ओवैसी का कहना था कि संसदीय चुनाव के नतीजे आए तो आबादी के हिसाब से उनके सांसद चुनकर आए. लेकिन, एक आबादी ऐसी है, जिनके सांसद आबादी के हिसाब से चुनकर नहीं आ पाए हैं. वो देश की अल्पसंख्यक समाज है. इसका जिम्मेदार कौन है? किसी हद तक हम भी जिम्मेदार हैं, जो डर जाते हैं कि मजलिस को वोट देंगे तो बीजेपी जीत जाएगी. मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि यकीनन हमको बीजेपी को रोकना है, लेकिन क्या हम इनको रोकने में ही अपना खात्मा करते रहेंगे. फिर हमारी आवाज कहां पर जाएगी. मिसाल के तौर पर कहना चाहता हूं कि संसद में आज वक्फ बिल कानून पेश किया गया है. अगर हमारी पार्टी के कम से कम तीन संसद सदस्य होते तो क्या मोदी इस तरह की हरकत करने के बारे में सोचते. आप जानते हैं कि वक्फ बिल क्या है. ये बिल कहता है कि कलेक्टर यह फैसला करेंगे कि यह मस्जिद, मदरसा, कबिस्तान वक्फ की संपत्ति है या नहीं.