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मिसाल: ओला कैब ड्राइवर बना भारतीय सेना में अधिकारी

ओम ने बताया कि उनके पिता ड्राइवर थे, लेकिन एक दिन सड़क दुघर्टना में उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए थे. जिसके बाद उन्होंने ओला कैब चलाना शुरू किया.

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Om Paithane
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जीवन में अगर आप कुछ हासिल करना चाहते हैं तो साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपनी मंजिल की ओर चलते रहना होगा. साहस और दृढ़ संकल्प का ऐसा ही एक उदारहण है पुणे के रहने वाले जीसी ओम पैठाने का, जिन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) की परीक्षा दी और आर्मी कैडेट बन गए.

उन्हें आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) चेन्नई पासिंग आउट परेड के बाद 10 मार्च 2018 को भारतीय सेना अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया. बता दें कि उन्हें 257 कैडेटों में से चुना गया. अभी तक ओम OTA (आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई) में ट्रेनिंग ले रहे थे.

परिवार का खर्चा उठाने के लिए चलाई ओला कैब

ओम ने बताया कि उनके पिता ड्राइवर थे, लेकिन एक दिन सड़क दुघर्टना में उन्होंने अपने दोनों पैर खो दिए थे. जिसके बाद वह वॉचमैन की नौकरी करने लगे. लेकिन घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था जिसके ओम ने बीएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के दौरान ओला कैब चलाना शुरू कर दिया.

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ऐसे चुना अफसर बनने का रास्ता

ओम ने बताया कि एक रिटायर्ड कर्नल ने उनकी कैब को काम पर रखा था. जब ओम ने रिटायर्ड कर्नल से बात की, तो बातों ही बातों में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) परीक्षा के बारे में पता चला. जिसके बाद ओम ने इस परीक्षा के बारे में सोचा.

रिटायर्ड कर्नल का मिला सपोर्ट

ओम ने बताया कि जब उन्होंने इस परीक्षा के बारे में अधिक बातें जानने के लिए रिटायर्ड कर्नल को कॉल किया तो उनका काफी सपोर्ट मिला. ओम कहते हैं कि जीवन में सफल होने के लिए मार्गदर्शन जरूरी है और उस मार्गदर्शन के लिए एक शिक्षक का होना जरूरी है. ओम ने बताया कि बचपन का दोस्त राहुल भालेराव ने की बड़ी मदद.

लोगों के लिए बनें मिसाल

ओम आज उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो जीवन में कुछ करना चाहते हैं. साथ ही ओम की कहानी उन लोगों को प्रेरित करती है जो अपनी मंजिल हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं. ओम का प्रयास यह बताता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ सब कुछ संभव हो सकता है.

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