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फ्लोरिडा यून‍िवर्सि‍टी शूट‍ि‍ंग में चैट जीपीटी ने की थी हेल्प? ओपन AI पर हुआ मुकदमा

फ्लोरिडा राज्य ने ओपनएआई के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने के आरोप में मुकदमा दायर किया है. जांच में आशंका जताई गई है कि 2025 में फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी की योजना चैटजीपीटी की मदद से बनाई गई थी. टेक कंपनियों की सुरक्षा नीतियों की कमी और बच्चों के डिजिटल उपयोग को लेकर ग्लोबली चिंता बढ़ रही है.

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टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए आए थे, लेकिन क्या अब ये बच्चों की सेफ्टी और उनके मेंटल हेल्थ के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं? क्या तकनीक की अंधी दौड़ में बड़ी कंपनियां हमारे बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा रही हैं?

ये सवाल इसलिए नहीं उठ रहे हैं क्योंकि कोई थ्योरी सामने आई है, बल्कि इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य ने टेक जगत में तहलका मचाने वाली कंपनी ओपन एआई (चैट जीपीटी की निर्माता) के खिलाफ एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कानूनी मोर्चा खोल दिया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की र‍िपोर्ट के अनुसार बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालने और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालने के आरोप में फ्लोरिडा, ओपन एआई पर मुकदमा दर्ज करने वाला अमेरिका का पहला राज्य बन गया है. आइए समझते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे की वो खौफनाक कहानी क्या है, जिसने पूरी दुनिया के शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया है.

क्या यूनिवर्सिटी शूटर का 'पार्टनर इन क्राइम' था चैट जीपीटी?
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और डरावना पहलू एक यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी से जुड़ा है. फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसेंटिस के चीफ ऑफ स्टाफ, जेम्स उथमियर ने इस साल अप्रैल में ओपन एआई के खिलाफ एक व्यापक जांच के आदेश दिए थे.

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जांच के बाद जो आशंका जताई जा रही है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है. अधिकारियों के मुताबिक इस बात के पुख्ता अंदेशे हैं कि साल 2025 में 'फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी' में हुई एक घातक और दर्दनाक गोलीबारी की घटना में शूटर ने पूरी वारदात को प्लान करने और उसे अंजाम देने के लिए चैट जीपीटी की मदद ली थी. यानी जिस एआई को छात्र पढ़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, उसका इस्तेमाल एक यूनिवर्सिटी में खूनखराबा करने के लिए किया गया!

इस मामले में फ्लोरिडा सरकार का रवैया बेहद सख्त है. जांच की घोषणा करते हुए चीफ ऑफ स्टाफ जेम्स उथमियर ने साफ शब्दों में टेक दिग्गजों को चेतावनी दी है. उनका कहना है कि जैसे-जैसे ये बड़ी टेक कंपनियां इन नई तकनीकों को बाजार में ला रही हैं, वे किसी भी कीमत पर हमारी सुरक्षा और सिक्योरिटी को खतरे में नहीं डाल सकतीं.

बहस स‍िर्फ अमेर‍िका तक नहीं...

फ्लोरिडा प्रशासन का मानना है कि ओपनएआई जैसी कंपनियां अपने मुनाफे और एआई की रेस में आगे निकलने के चक्कर में यह भूल गईं कि उनके सेफ्टी फिल्टर्स कितने कमजोर हैं. कोई भी गाइडलाइंस या सेफ्टी चक्र इतना मजबूत नहीं था जो एक संभावित शूटर को यूनिवर्सिटी पर हमला करने की प्लानिंग बताने से रोक सके.

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इस खबर के सामने आने के बाद अब बहस सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है. भारत समेत दुनिया भर के पैरेंट्स और शिक्षा विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं. हम अपने बच्चों को डिजिटल बनाने के नाम पर उनके हाथों में स्मार्टफोन और एआई टूल्स तो सौंप रहे हैं, लेकिन क्या हम वाकई जानते हैं कि पर्दे के पीछे वह एआई बच्चों के दिमाग में क्या परोस रहा है?

यह मुकदमा दुनिया भर की टेक कंपनियों के लिए एक बहुत बड़ा सबक और चेतावनी है. जब बात बच्चों के मेंटल हेल्थ और उनकी जान की हो, तो 'इनोवेशन' के नाम पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती. अब देखना यह होगा कि कोर्ट में फ्लोरिडा के इन आरोपों पर ओपन एआई का क्या जवाब आता है, लेकिन एक बात साफ है कि एआई की इस दुनिया में अब सब कुछ पहले जैसा नहीं रहने वाला.

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