यूपी बोर्ड के नतीजों ने इस बार बरेली का नाम पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया है. यहां एक पिता के अनूठे त्याग और बेटियों की कड़ी मेहनत की ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है. एक पिता ने अपनी बेटियों को टॉपर बनाने के लिए घर का इकलौता टीवी (TV) ही खराब कर दिया, ताकि बच्चों का ध्यान मनोरंजन में न भटके.
पिता की 'तपस्या' लाई रंग
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी रिजल्ट में बरेली की दो छात्राओं ने प्रदेश की टॉप-3 लिस्ट में जगह बनाई है. भमौरा के जनकल्याण सर्वोदय विद्यालय की नंदिनी गुप्ता ने यूपी में दूसरी रैंक और सुरभि यादव ने भी शानदार प्रदर्शन कर जिले का मान बढ़ाया है.
नंदिनी के पिता मोहनलाल गुप्ता ने कहा कि आज बहुत खुशी हो रही है. हमारे पांच बच्चे हैं और हम चाहते थे कि वे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें. करीब 8 महीने पहले मैंने जानबूझकर घर का टीवी खराब कर दिया था ताकि बच्चे मोबाइल और मनोरंजन के चक्कर में न पड़ें. आज मेरी बेटी ने प्रदेश में दूसरा स्थान पाकर मेरी उस तपस्या का फल दे दिया है.
एक ही स्कूल से निकले 10 टॉपर
बरेली का 'जनकल्याण सर्वोदय विद्यालय' इस बार सफलता का केंद्र बन गया है. इस अकेले स्कूल से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट मिलाकर कुल 10 छात्र-छात्राओं ने स्टेट टॉप-10 में जगह बनाई है. प्रदेश भर में यह संभवतः पहला स्कूल है जिसने एक साथ इतने टॉपर दिए हैं.
स्कूल के प्रबंधक हरिओम गुप्ता ने बताया कि हमारे स्कूल के बच्चों ने दूसरी, छठी, आठवीं और दसवीं रैंक हासिल की है. हम बच्चों को फ्री एक्स्ट्रा क्लास और कोचिंग देते हैं. शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत ने आज जिले को गौरवान्वित किया है.
टॉपर बेटियों की जुबानी, सफलता की कहानी
नंदिनी गुप्ता (यूपी सेकंड टॉपर) ने कहा कि मेरी सेकंड रैंक आई है, पापा बहुत खुश हैं. मैंने बहुत मेहनत की थी और इसमें शिक्षकों और परिवार का पूरा सपोर्ट रहा. सुरभि यादव (97% अंक) ने कहा कि मैं रोजाना 18-18 घंटे पढ़ाई करती थी. जब भी कोई दिक्कत आती, शिक्षक गुरु बनकर मार्गदर्शन करते थे. मेरी सफलता का श्रेय मम्मी-पापा और मेरे टीचर्स को जाता है.
अब हो रही आतिशबाजी और डांस
रिजल्ट आने के बाद स्कूल और छात्राओं के घर पर जश्न का माहौल है. मौके पर जमकर आतिशबाजी हुई और मिठाई बांटी गई. छात्राओं ने अपने शिक्षकों और परिजनों के साथ जमकर डांस किया. शिक्षा विभाग के अधिकारी भी पिता के इस अनोखे 'बलिदान' की कहानी सुनकर हैरान हैं कि कैसे सीमित संसाधनों में भी इन बेटियों ने आसमां छू लिया.