महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन ने 8 मई को 10वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस बार का पासिंग प्रतिशत भी काफी अच्छा रहा. राज्य का कुल पासिंग प्रतिशत 90.75 रहा लेकिन इस बीच एक ऐसी बात सामने आई जिसने न केवल हर किसी को हैरान कर दिया है बल्कि चिंता भी बढ़ा दी है. दरअसल, इस साल 80 हजार से अधिक छात्र अपनी मातृभाषा में ही फेल हो गए हैं. वह इस विषय में पासिंग नंबर भी न ला पाए हैं.
16 लाख से अधिक छात्रों ने दी थी परीक्षा
बता दें कि इस साल महाराष्ट्र बोर्ड परीक्षा में कुल 16,14,050 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इसमें से 160,00,164 छात्र परीक्षा में शामिल हुए. इनमें से 14,52,246 छात्र पास हो गए थे. वैसे तो रिजल्ट शानदार रहा लेकिन मराठी विषय के आंकड़ों ने पूरा दिशा बदल दिया.
80 हजार से ज्यादा छात्र फेल
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में छात्र राज्य की भाषा परीक्षा में फेल हो रहे हैं, तो इसे सिर्फ पढ़ाई की कमजोरी नहीं माना जा सकता. उनका मानना है कि यह इस बात का संकेत है कि बच्चों और परिवारों में भाषा इस्तेमाल करने की आदतें बदल रही हैं खासकर की लिखने की आदत. यह चर्चा ऐसे समय में बढ़ रही है जब केंद्र सरकार ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है. देशभर में अब क्षेत्रीय भाषाओं को बचाने, मातृभाषा को बढ़ावा देने और अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के बीच सही संतुलन बनाने पर बहस तेज हो गई है.
इंग्लिश की पकड़ मजबूत
इसके अलावा भी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंग्लिश मीडियम स्कूलों की तरफ झुकाव बढ़ता दिखाई दे रहा है जिसकी वजह से मातृभाषा की पढ़ाई कमजोर हो रही है. कई परिवार अपने बच्चों को शुरू से ही इंग्लिश सिखाने पर जोर देते हैं.