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CBSE 12वीं के छात्रों को बड़ी राहत, दोबारा कॉपी जांच में नंबर बढ़े तो री-चेकिंग की पूरी फीस होगी वापस! 

सीबीएसई कक्षा 12वीं के नतीजों में इस बार पास प्रतिशत 3% गिरकर 85% रह गया है, जिससे छात्रों में चिंता बढ़ी है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के कारण इस गिरावट को स्वीकार किया है. छात्रों के हित में री-चेकिंग की नई फीस संरचना लागू की गई है, जिसमें उत्तर पुस्तिका देखने, सत्यापन और प्रश्नों की पुनः जांच के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं.

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CBSE 12th Board Result (Photo : ITG)
CBSE 12th Board Result (Photo : ITG)

सीबीएसई (CBSE) कक्षा 12वीं के नतीजे घोषित होने के बाद से ही छात्रों के बीच कम नंबर आने और पास प्रतिशत गिरने को लेकर काफी चिंता देखी जा रही थी. इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों की इन आशंकाओं पर बड़ा बयान दिया है. सरकार ने साफ किया है कि बच्चों का हित उनके लिए सबसे ऊपर है और अगर री-चेकिंग में किसी छात्र के नंबर बढ़ते हैं, तो उसकी पूरी फीस वापस (रीफंड) कर दी जाएगी.

पास प्रतिशत में 3% की गिरावट, वजह डिजिटल चेकिंग?
दिल्ली में स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार द्वारा मीडिया को दिए गए आधिकारिक बयान में माना कि इस बार रिजल्ट में गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि सीबीएसई द्वारा हाल ही में घोषित कक्षा 12वीं के परिणामों में इस बार कॉपियों को जांचने के लिए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था. इसके बाद कुछ चिंताएं जताई गई हैं.

खासकर छात्रों को लग रहा है कि कुल पास प्रतिशत में गिरावट आई है. वास्तव में, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पास प्रतिशत में 3 फीसदी की गिरावट आई है, जो 88 प्रतिशत से घटकर 85 प्रतिशत पर आ गया है. कुछ छात्रों को यह भी लग रहा है कि उन्हें वास्तव में मिले अंकों से अधिक अंक मिलने चाहिए थे.

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डिजिटल चेकिंग के इस नए तरीके पर सफाई देते हुए उन्होंने आगे कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है और न ही इसे पहली बार लागू किया गया है. सीबीएसई ने सबसे पहले 2014 में ओएसएम (OSM) सिस्टम की शुरुआत की थी; हालांकि, उस समय तकनीकी बुनियादी ढांचे (टेक्न‍िकल इन्फ्रास्ट्रक्चर) की सीमाओं के कारण इस प्रक्रिया को तुरंत जारी रखना व्यावहारिक नहीं लगा था. लेकिन इस साल हमने इसे सफलतापूर्वक फिर से लागू किया है.

री-इवैल्यूएशन का नया नियम और फीस स्ट्रक्चर
सरकार ने साफ किया है कि किसी भी बच्चे के साथ नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी. शिक्षा सचिव ने छात्रों के लिए री-चेकिंग की नई व्यवस्था और फीस की घोषणा की है:

उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) देखने के लिए: 100 रुपये प्रति छात्र फीस लगेगी.
कॉपी के सत्यापन (Validation) के लिए: अलग से 100 रुपये की फीस लागू होगी.
किसी विशेष प्रश्न (Specific Question) की दोबारा जांच के लिए: 25 रुपये प्रति प्रश्न फीस तय की गई है.

सबसे बड़ी राहत (रिफंड पॉलिसी): शिक्षा सचिव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि हमने यह फैसला किया है कि यदि स्क्रूटनी (जांच) की इस प्रक्रिया के दौरान किसी छात्र के अंक बढ़ते हैं या उनमें सुधार होता है, तो हम पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए उनके द्वारा भुगतान की गई पूरी की पूरी राशि वापस कर देंगे.

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बच्चों का कल्याण हमारे लिए सर्वोपरि
मंत्रालय ने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि चाहे शिक्षा मंत्रालय हो या सीबीएसई, हमारे सभी बच्चों का कल्याण और उनकी चिंताएं हमारे लिए सर्वोपरि हैं. इसलिए, हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी बच्चे को, किसी भी कारण से ऐसा न लगे कि उन्हें उनकी योग्यता या परीक्षा के दौरान लिखे गए उत्तरों के वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर हक से कम अंक मिले हैं. पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान सीबीएसई के ढांचे में हमेशा से रहा है... हम यह सुनिश्चित करेंगे कि दिए गए अंक, जिसमें अंकों का कुल योग भी शामिल है, पूरी तरह से सटीक हों. सीबीएसई ने इस बार एक निर्णायक कदम उठाया है कि यदि आप अपने प्रश्न पत्र या उत्तर पुस्तिका को देखना चाहते हैं, उसका सत्यापन करना चाहते हैं, तो इसके लिए पहले ली जाने वाली फीस में यह बदलाव किया गया है...

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