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BSEB 12th Result: किराना दुकान चलाने वाले की बेटी ने किया कमाल, नवादा की सपना कुमारी बनीं बिहार की साइंस 2nd टॉपर!

साधारण परिवार से आने वाली सपना ने 95.80% अंक हासिल कर अपनी मेहनत और अनुशासन से यह मुकाम हासिल किया. उनके पिता सुधीर चौरसिया एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं, लेकिन उन्होंने कभी बेटी की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी. सपना का लक्ष्य डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना है. उनकी कहानी छोटे गांवों के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

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नवादा की सपना कुमारी ने साइंस में हासिल की दूसरी रैंक, संघर्ष की कहानी जीत लेगी दिल! (Photo: Screengrab)
नवादा की सपना कुमारी ने साइंस में हासिल की दूसरी रैंक, संघर्ष की कहानी जीत लेगी दिल! (Photo: Screengrab)

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के इंटरमीडिएट 2026 के नतीजों में नवादा जिले की एक और प्रतिभा ने राज्य स्तर पर अपनी चमक बिखेरी है. जिले के कौआकोल थाना क्षेत्र के छोटे से गांव नावाडीह की रहने वाली सपना कुमारी ने साइंस स्ट्रीम में पूरे बिहार में दूसरा स्थान (रैंक-2) प्राप्त किया है. साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली सपना की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि मेहनत के आगे संसाधन कभी बाधा नहीं बनते.

कौन हैं बिहार साइंस सेकेंड टॉपर 2026 सपना कुमारी 
सपना कुमारी नवादा के कौआकोल प्रखंड के नावाडीह गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता सुधीर चौरसिया गांव में ही एक छोटी सी किराना की दुकान चलाते हैं. एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सपना शुरू से ही पढ़ाई में काफी अनुशासित और होनहार रही हैं. उनकी सफलता की खबर मिलते ही पूरे नावाडीह गांव और नवादा जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है. परिवार और रिश्तेदारों का उनके घर बधाई देने के लिए तांता लगा हुआ है.

BSEB इंटर परीक्षा में सपना कुमारी ने कितने मार्क्स हासिल किए?
सपना कुमारी ने बिहार बोर्ड 12वीं साइंस की परीक्षा में 95.80% अंक हासिल किए हैं. इस शानदार स्कोर के साथ उन्होंने राज्य की मेरिट लिस्ट में दूसरा स्थान (रैंक-2) पक्का किया है. सपना ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है. उनका कहना है कि परिवार के अटूट सहयोग के बिना यह मुकाम हासिल करना मुमकिन नहीं था.

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सपना कुमारी के पिता क्या करते हैं और उनका लक्ष्य क्या है?
सपना के पिता सुधीर चौरसिया मेहनत-मजदूरी और अपनी छोटी सी दुकान के जरिए परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी बेटी की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी. पिता के संघर्ष को देखते हुए सपना ने तय किया है कि वह आगे चलकर डॉक्टर बनेंगी. उनका सपना है कि वे चिकित्सा के क्षेत्र में जाकर गरीब और जरूरतमंद समाज की सेवा करें.

सपना ने बताया कि उनकी सफलता का कोई 'शॉर्टकट' नहीं था. उन्होंने गांव में रहकर ही नियमित पढ़ाई, कड़े अनुशासन और शिक्षकों के नोट्स पर भरोसा किया. उनके अनुसार, सेल्फ-स्टडी और टॉपिक्स को गहराई से समझना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही. सपना की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो छोटे गांवों और सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं. एक किराना दुकानदार की बेटी का बिहार का 'सेकंड टॉपर' बनना यह दिखाता है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती है.

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Report: Sumit Bhagat
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