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एजुकेशन

WW-2 लड़े थे दादा, IAF में पिता-बेटी, भदौरिया बने एयरफोर्स चीफ

WW-2 लड़े थे दादा, IAF में पिता-बेटी, भदौरिया बने एयरफोर्स चीफ
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राकेश कुमार सिंह भदौरिया का जन्म आगरा के पास के गांव कोरथ में हुआ था. वह नेशनल डिफेंस अकेडमी, पुणे के पूर्व छात्र रह चुके हैं. उन्होंने कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से डिफेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की है.

फोटो- LCA Tejas (India) twitter

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भदौरिया की पत्नी का नाम आशा भदौरिया है. उनके एक बेटी और एक बेटा हैं. भदौरिया वायु सेना के अगले चीफ होंगे, ये खबर सुनकर उनके गांव वाले काफी खुश हुए. लोग एक दूसरे का मुंह मीठा करा रहे थे. भदौरिया की चाची ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि "जब वह छोटे थे तो अपने दादाजी को कहा करते थे कि वह एक दिन पायलट बनेंगे और आप मुझे जहाज उड़ाता देख पाएंगे. आज उनके दादाजी का उनपर गर्व होगा."
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एयर मार्शल भदौरिया के चचेरे भाई संदीप भदौरिया ने कहा कि "हमारे परिवार के खून में हमारे खून में बहादुरी और नेतृत्व है. हमारे दादाजी शोबरन सिंह ब्रिटिश सेना में थे और विश्व युद्ध 2 में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उनके पिता सूरज पाल सिंह भदौरिया वायु सेना में अपनी सेवाएं मास्टर वारंट ऑफिसर के पद पर दे चुके हैं. वह मेरे पिता अरविंद कुमार सिंह आर्मी में थे और चाचा वायु सेना में थे. इसी के साथ मेरे दो भाई अवनीश और विपिन भदौरिया इंडियन आर्मी में अपनी सेना दे रहे हैं.


फोटो- LCA Tejas (India) twitter

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आपको बता दें, राकेश कुमार सिंह की बेटी सोनाली भी वायु सेना में पायलट हैं. राकेश और उनके परिवार को कोरथ गांव का दौरा किए हुए एक दशक से अधिक समय हो गया है. बचपन में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान अपने छोटे भाई राजीव भदौरिया के साथ गांव आया करते थे." वर्तमान में ग्वालियर, वायुनगर में रहते हैं. वहीं कोरथ के ग्राम प्रधान पति प्रदीप सिंह ने कहा " हमेश राकेश भदौरिया पर गर्व है. उनकी वजह से इस गांव को पहचान मिली. अब लोग इस गांव को वायु सेना के चीफ के गांव से पहचानेंगे."
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39 साल पहले वायुसेना में किया था करियर शुरू


वायुसेना में भदौरिया ने अपने करियर की शुरुआत साल 1980 में की है. भदौरिया को 15 जून 1980 में वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन दिया गया था. उनको प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.
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उड़ा चुके हैं 26 तरह के विमान

भदौरिया वायुसेना में अभी तक अपने करियर में 26 तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ान चुके हैं. उन्हें 4250 घंटे तक फाइटर विमान और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ाने का अनुभव है. वह राफेल फाइटर जेट को उड़ाने वाले वायुसेना के पहले पायलट भी हैं.
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एयर मार्शल भदौरिया को परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM), वायु सेवा मेडल (VM) और एडीसी अवॉर्डस् से सम्मानित किया जा चुका है. वहीं वह जगुआर स्क्वाड्रन कमांड, प्रीमियर एयर फोर्स स्टेशन, कमांडिंग अफसर ऑफ फाइट टेस्ट स्क्वाड्रन समेत कई जिम्मेदारियों को संभाल चुके हैं.
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जनवरी 2016 से 28 फरवरी, 2017 के बीच नेशनल डिफेंस अकेडमी के कमांडेंट, सेंट्रल एयर कमांड के सीनियर स्टाफ ऑफिसर और ड्यूप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर अपनी सेवा दे चुके हैं. वह एक्सपेरिमेंट टेस्ट पायलट, कैटेगरी A क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं.
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भदौरिया 1 मार्च 2017 से साउदर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ (AOC-in-C) के पद पर रहे हैं. उन्होंने एयर मार्शल एसआरके नायर के रिटायर होने के बाद 1 अगस्त 2018 से एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) ट्रेडिंग कमांड के पद पर काम किया. इसी से साथ उन्हें वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में प्रमोशन मिला था.
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मिल चुके हैं ये अवॉर्ड

आरकेएस भदौरिया अपने 39 सालों के करियर में कई पुरस्कार और मेडल से सम्मानित हो चुके हैं. वह 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' (जनवरी 2013), 'वायु सेना मेडल' (जनवरी 2002), 'परम विशिष्ट सेवा मेडल' (जनवरी 2018) से सम्मानित हो चुके हैं. बता दें, इसी साल जनवरी महीने में उन्हें राष्ट्रपति के सहायक सैनिक अधिकारी की मानद उपाधि भी दी गई थी.



फोटो- @MajorPoonia (twitter)

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