चीलों को खाना खिलाने वाले लतीफ कुरैशी के अनुसार, 'मेरा परिवार पिछली कई पीढ़ियों से यही काम कर रहा है. यह परंपरा करीब 500 साल पहले, राव जोधाजी के समय से शुरू हुई. हमारे बाप-दादा भी यही काम करते रहे हैं. यहां दिन में एक बार मेहरानगढ़ किले के बुर्ज से चीलों को मांस खिलाया जाता है. (फोटो: facebook)