scorecardresearch
 
Advertisement
एजुकेशन

सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द

सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 1/8
असम के छोटे से गांव की रहने वाली बॉक्सर जमुना बोरो ने  इंडोनेशिया के लाबुआन बाजो में 23 वें राष्ट्रपति कप में प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक जीता है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी मां के साथ-साथ पूरे देश का सिर ऊंचा कर दिया है. असम राइफल की राइफलमैन/ जीडी जमुना ने रविवार को स्वर्ण पदक जीता था, इसके बाद असम के मुख्यमंत्री सहित देश की तमाम हस्तियों ने उन्हें बधाई  दी. असम राइफल की इस जवान की कहानी हम सभी को प्रेरित करने वाली है. जानें, पति की मौत के बाद बेटी का भविष्य बनाने के लिए मां ने कितना संघर्ष किया.
सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 2/8
जमुना बोरो का जन्म असम के सोनितपुर के बेलसिरी गांव में हुआ है. जब जमुना 10 साल की थीं, तब उनके पिता परशु बोरो की मौत हो गई थी. उस समय उनकी मां निर्मली बोरो ने सब्जी बेचकर बेटी को पढ़ाया-लिखाया. उसी बेटी ने जब इंटरनेशनल मंच पर भारत के लिए गोल्ड जीते तो मां भावुक हो गई. मां ने कहा कि उनकी बेटी ने उनके जीवन भर की मेहनत को सार्थक कर दिया है.
सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 3/8
असम राइफल्स की राइफल वुमन /जीडी जमुना बोरो ने इटली के अनुभवी मुक्केबाज, गुइलिया लामग्ना को 5-0 के स्कोर से ध्वस्त करके इंडोनेशिया के लाबुआन बाजो में 23 वें राष्ट्रपति कप में प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक जीता है. कम उम्र में अपने पिता को खो देने के बाद, जमुना और उसके दो बड़े भाई-बहनों का पालन-पोषण उनकी मां ने किया.
Advertisement
सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 4/8
मां की मेहनत और बेटी के जज्बे ने 19 साल की उम्र तक जमुना के लिए नया आयाम बना दिया. उन्हें असम राइफल्स में चुने जाने के बाद विश्व स्तरीय प्रशिक्षण असम राइफल्स की तरफ से दिए गए.  यहां उन्हें मिले अवसरों और जोखिम के कारण आज वो एक अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज बन पाई हैं. अब तक वो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर कई स्वर्ण जीत चुकी हैं.
सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 5/8
अब जमुना 2020 में होने जा रहे ओलंपिक में देश के लिए पदक लाना चाहती हैं, इसे क्वॉलिफाई करने के लिए वो अपने प्रशिक्षण पर कड़ी मेहनत कर रही हैं. बता दें कि बोरो ने एक वुशु खिलाड़ी के रूप में अपना करियर शुरू किया, उन्हें जॉन स्मिथ नारज़री ने प्रशिक्ष‍ित किया. फिर 2009 में, उदलगुरी में आयोजित स्टेट वुशू चैम्पियनशिप के दौरान, उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के पर्यवेक्षकों ने देखा.
सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 6/8
यहां से उनके मुक्केबाजी करियर की शुरुआत हुई, वो गुवाहाटी स्थित SAI रीजनल सब सेंटर के लिए चुनी गईं. आज वो एलीट महिला टीम में शामिल हैं. उन्होंने 56 वें बेलग्रेड वुमेन्स बॉक्सिंग टूर्नामेंट में रजत पदक जीता. इसके अलावा 21 वीं से 25 जनवरी 2019 तक कोलकाता के जतिन दास पार्क में आयोजित 2 'बंगाल क्लासिक' ऑल इंडिया इंविटेशनल एलीट (पुरुष / महिला) बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लिया.
सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 7/8
जमुना की जीत पर असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने उन्हें बधाई दी है. जमुना के परिवार में उनकी मां के अलावा बड़ी बहन है जिसकी शादी हो चुकी है. वहीं बड़ा भाई है जो पूजा पाठ का काम करके खर्च चलाने में मदद करता है. इसके अलावा मीडिया रिपोर्टस के अनुसार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने के बाद भी उनके पास पैसों की बड़ी परेशानी होती है, उन्हें देश में ट्रैवल करने के लिए घर से खर्च लेना पड़ता है.
सब्जी बेचकर बेटी को बनाया बॉक्सर, बेटी गोल्ड लाई तो मां ने कहे ये शब्द
  • 8/8
साल 2013 में वो सर्बिया में इंटरनेशनल सब जूनियर गर्ल्स बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भारत के लिए गोल्ड मेडल लाई थीं, फिर साल 2014 में रूस में बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता. 2015 में ताइपे में यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता.
Advertisement
Advertisement