गुजरात के भावनगर के रहने वाले गणेश पहले दिन अपने मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे. साल 2018 में नीट परीक्षा पास करने के बाद उन्हें MBBS में एडमिशन के लिए पूरे एक साल तक सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी थी. महज 17 साल की उम्र में डॉक्टरी की परीक्षा पास करने वाले गणेश विट्ठल भाई बारैया की कहानी सभी को प्रेरित करने वाली है. किसान परिवार के इस बच्चे ने कद काठी के कारण जन्मी तमाम कुंठाओं को हराकर ये जीत हासिल की है. इनकी कहानी सभी को प्रेरित करने वाली है.
एक अगस्त को पहली बार जब गणेश अपने कैंपस पहुंचे तो तमाम स्टूडेंट्स ने उनका स्वागत किया. इसके पीछे वजह थी उनका संघर्ष जो उन्होंने डॉक्टरी की परीक्षा पास करने के बाद किया. इस परीक्षा में पास होने के बावजूद उन्हें एडमिशन नहीं दिया गया था. उन्होंने अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी है. इसी कारण आज वो देश के शायद पहले इतनी कम हाइट और कम वजन के डॉक्टर बनने जा रहे हैं.
पहले दिन वो एमबीबीएस में एडमिशन लेने वाले नये बैच के साथ बैठे थे. यहां वो सबसे पहली कतार में बैठे थे. कहा जा रहा है कि सबसे छोटी हाइट के कारण अब उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में लिखा जाएगा. मीडिया रिपोर्टस के अनुसार पहले दिन गणेश में गजब का उत्साह था. उन्हें इस बात की खुशी थी कि वो अपने सपने को पूरा करने के लिए इतनी लंबी जंग लड़कर आए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गणेश के मामले में कहा कि महज लंबाई कम होने से किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है. किसी भी व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता को भी आधार नहीं बनाया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जुलाई 2019 में ही एडमिशन देने के लिए आदेश दे दिया था. आदेश के बाद गणेश ने भावनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया.
नीट में थे 223 नंबर
गणेश बचपन से ही पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं. बता दें कि उन्होंने विज्ञान वर्ग से 12वीं की परीक्षा करीब 87 प्रतिशत से पास की. इसके बाद उन्होंने NEET परीक्षा में 223 नंबर हासिल किए. लेकिन, फिर भी कॉलेज ने उन्हें एडमिशन नहीं दिया था. तब वो मामले को लेकर हाईकोर्ट गए.
छह बहनों के लाड़ले हैं गणेश
गुजरात में भावनर जिले के पास एक गोरखी गांव है. इसी गांव के एक किसान परिवार में गणेश का जन्म हुआ. जब उम्र बढ़ने के साथ उनकी लंबाई नहीं बढ़ी तो उन लोगों ने डॉक्टर से संपर्क किया. यहां पता चला कि गणेश पैदाइशी ऐसे हैं. घर में छह बहनों के बाद पैदा हुए गणेश सभी के लाड़ले रहे हैं. बहनें उन्हें बहुत प्यार करती हैं,
वहीं गणेश बचपन से डॉक्टर बनकर अपने परिवार का नाम ऊंचा करना चाहते थे. लेकिन मेडिकल कॉलेज ने उन्हें इन शारीरिक अक्षमताओं के अलावा 72 प्रतिशत दिव्यांग होने के कारण एडमिशन नहीं दिया था. उनका तर्क था कि इतनी कम हाइट के चलते वो मरीजों से कैसे रूबरू होंगे. ऑपरेशन करने से लेकर एमरजेंसी में वो कैसे काम करेंगे.