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कितने पढ़े-लिखे हैं पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल, संभाल चुके हैं बड़ी जिम्मेदारियां  

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ अब वहां की राजनीति में और पदों पर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. राज्य को अपना मुख्य सचिव मिल गया है. मनोज अग्रवाल को बंगाल सरकार का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है. बंगाल के चुनाव में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है. लेकिन इस बीच एक चर्चा तेज हो गई है कि आखिर वह कितने पढ़े-लिखें हैं. 

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कितने पढ़े-लिखे हैं पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव. (Photo- ITGD)
कितने पढ़े-लिखे हैं पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव. (Photo- ITGD)

पश्चिम बंगाल में नी सरकार के आते ही राज्य में अहम नियुक्तियां हो गई हैं. सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य सचिव की नियुक्ति करते हुए मनोज अग्रवाल के नाम पर मुहर लगा दी है. ये जिम्मेदारी बेहद अहम है. नियुक्ति के साथ ही उनपर अहम प्रशासनिक जिम्मेदारी आ गई है. लेकिन इस बीच एक सवाल और ज्यादा चर्चा में आ गया है और वह ये है कि बंगाल के नए सचिव आखिर कितने पढ़े-लिखें हैं. इस पद पर नियुक्त होने से पहले मनोज अग्रवाल पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं. उन्हें मार्च 2025 में राज्य का मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था. इस पद पर रहते हुए उन्होंने बंगाल विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई है. 

कौन हैं मनोज अग्रवाल? 

बता दें कि मनोज अग्रवाल का जन्म 8 जुलाई 1966 को हुआ था. वह 1990 बैच के IAS अधिकारी हैं. उन्होंने IIT कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की है. वो खाद्य, वन, अग्नि और आपातकालीन सेवाओं जैसे विभागों में भी काम कर चुके हैं. 

संभाली बड़ी जिम्मेदारी 

अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में मनोज अग्रवाल ने पश्चिम बंगाल सरकार के कई अहम विभागों में जिम्मेदारियां निभाई हैं. वे कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, वन विभाग, अग्निशमन के साथ आपातकालीन सेवा विभाग और गृह विभाग के बड़े पदों पर काम कर चुके हैं. साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार में भी प्रतिनियुक्ति पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. मनोज अग्रवाल की नियुक्ति शुभेंदु अधिकारी के प्रशासनिक सर्कल में सबसे अहम है. महज 48 घंटे पहले ही चुनाव आयोग के विशेष रोल ऑब्जर्वर रहे सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था.इतना ही नहीं उन्होंने स्टेट हाईवे अथॉरिटी के चैयरमैन के रूप में भी अहम काम किया है. 

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विवादों से भी रहा है नाता 

केवल पढ़ाई से ही नहीं उनका विवादों से भी पुराना नाता रहा है. जब वो फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव के रूप में काम कर रहे थे, तो उन्होंने कोरोना काल में राशन कूपन बांटने का काम राजनीतिक प्रतिनिधियों के बजाय सरकारी अधिकारियों को दे दिया था. 

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