उत्तर प्रदेश में संविदा शिक्षकों की सैलरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद से ना सिर्फ संविदा शिक्षकों की सैलरी में इजाफा होगा, बल्कि उन्हें 9 साल की बकाया सैलरी भी मिलेगी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संविदा शिक्षकों का वेतन सात हजार से 17 हज़ार रुपए करने का फैसला किया है. इसके साथ ही संविदा कर्मचारियों को 2017 से अब तक के वेतन का अंतर का भुगतान भी राज्य सरकार को करना होगा.
2017 से अभी तक की सैलरी का अंतर मिलता है तो कर्मचारियों को करीब 100 महीने की सैलरी एक साथ मिलेगी. कोर्ट ने आदेश दिया है कि बकाया सैलरी का भुगतान भी 6 महीने में किया जाए. इस हिसाब से सैलरी में जो 10 हजार रुपये का फायदा हुआ है, उसका 100 महीनों का भुगतान भी अब करना होगा. अगर कोई कर्मचारी 2017 से संविदा शिक्षक के रुप में काम कर रहा है तो उसे 100 महीनों के करीब 10 लाख रुपये एक्स्ट्रा भी मिलेंगे.
कोर्ट ने 7 हजार सैलरी को बताया अनुचित
कोर्ट ने 7 हजार रुपये पर लंबे समय तक काम कराने को बेगार यानी बंधुआ मजदूरी जैसा बताते हुए शिक्षकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया. जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि एक दशक से भी अधिक समय से इन अनुबंधित शिक्षकों को मात्र सात हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है. यह सर्वथा अनुचित और बंधुआ मजदूरी या बेगार जैसा है.
साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है. कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि संविदा शिक्षकों को वर्ष 2017-18 से 17 हजार रुपये मासिक मानदेय का अधिकार है. अदालत ने कहा कि 11 महीने के अनुबंध के नाम पर साल दर साल काम लेते रहना और वेतन न बढ़ाना गलत है. पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकार 1 अप्रैल 2026 से 17 हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान शुरू करें. साथ ही बकाया राशि छह महीने के भीतर चुकाई जाए.
अदालत ने कहा कि जो शिक्षक लगातार 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं, उन्हें व्यवहार में स्थायी माना जाएगा. कोर्ट के इस आदेश को संविधा शिक्षकों के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है.