ऐसा कम ही सुनने में आता है कि किसी भर्ती में लाखों लोग हिस्सा लें और जितने उम्मीदवारों के लिए भर्ती निकले, उतने काबिल उम्मीदवार ही ना मिल पाए. राजस्थान में कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला. दरअसल, यहां 320 पदों के लिए एक भर्ती निकली थी और उसमें सिर्फ 296 उम्मीदवार ही पास हो पाए. जितने पदों के लिए भर्ती निकली थी, उतने उम्मीदवार भी नहीं मिल पाए. ऐसा नहीं है कि इन पदों के लिए कम लोगों ने अप्लाई किया था जबकि डेढ़ लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने पोस्ट के लिए अप्लाई किया था.
ये बात है राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सीनियर टीचर प्रतियोगी परीक्षा 2024 के विज्ञान विषय के नतीजों की. यहां 350 पदों के लिए सिर्फ 296 अभ्यर्थी ही चयनित हो सके हैं. लाखों आवेदन और बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की मौजूदगी के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों की कमी इतनी गहरी रही कि विज्ञान जैसे अहम विषय में भी कई पद खाली रहने की आशंका बन गई है. विज्ञान विषय के लिए कुल 1 लाख 68 हजार 206 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था.
दरअसल, 9 सितंबर 2025 को प्रदेश के 25 जिला मुख्यालयों पर परीक्षा आयोजित हुई थी, जिसमें 1 लाख 17 हजार 364 अभ्यर्थी शामिल हुए. लेकिन परिणाम सामने आते ही तस्वीर साफ हो गई, पात्रता जांच तक पहुंचने वालों की संख्या उम्मीद से कहीं कम रही. वैसे इस भर्ती परीक्षा में दो पेपर शामिल थे. प्रथम पेपर 200 अंकों का था, जिसमें न्यूनतम 80 अंक (40%) अनिवार्य थे. वहीं द्वितीय पेपर 300 अंकों का था, जिसमें कम से कम 120 अंक (40%) लाना जरूरी था.
मिनिमम नंबर भी नहीं ला पाए
आरपीएससी ने विज्ञापन में पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि दोनों पेपरों में अलग-अलग 40-40% अंक हासिल करना अनिवार्य होगा. लेकिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थी यह न्यूनतम अंक भी नहीं जुटा पाए और इसी कारण आगे की प्रक्रिया से बाहर हो गए. चौंकाने वाली बात यह भी रही कि 359 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में 10% से अधिक प्रश्नों में किसी भी विकल्प का चयन ही नहीं किया. नियमों के अनुसार, ऐसे अभ्यर्थियों को सीधे अयोग्य घोषित कर दिया गया.
कुछ वर्ग में एक भी सेलेक्ट नहीं हुआ
आरक्षित वर्गों की स्थिति भी निराशाजनक रही. अनुसूचित जनजाति के सामान्य, महिला और विधवा वर्ग से एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हुआ. वहीं, अनुसूचित जाति की महिला और विधवा श्रेणी से भी कोई नाम सूची में नहीं आया. दिव्यांगजन और पूर्व सैनिक कोटे से भी कोई अभ्यर्थी पात्रता जांच के लिए चयनित नहीं हो सका. इन सभी श्रेणियों की सीटें रिक्त रहने की प्रबल संभावना है.
बता दें कि आरपीएससी ने कुल 8 विषयों में 2129 पदों पर भर्ती निकाली थी, जिनमें विज्ञान के 350 पद शामिल थे. विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में योग्य अभ्यर्थियों की यह कमी अब चिंता का विषय बन गई है. रिक्त पदों को लेकर अब अभ्यर्थियों के लिए कोर्ट का रास्ता भी लगभग बंद माना जा रहा है. हाल ही में राजस्थान हाई कोर्ट ने आरपीएससी की सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती–2024 से जुड़े मामलों में अहम फैसला सुनाया है.
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने सैकड़ों याचिकाएं खारिज करते हुए चयन प्रक्रिया को पूरी तरह वैध, निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप बताया. कोर्ट ने साफ कहा कि अभ्यर्थी परीक्षा नियमों को जानकर ही परीक्षा में शामिल होते हैं, इसलिए असफल होने के बाद प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी जा सकती. यह एस्टॉपल और एक्वायसेंस के सिद्धांत के खिलाफ है.