scorecardresearch
 

चीन में क्यों नहीं होता NEET जैसा पेपर लीक... जेल में होती है पेपर की छपाई, आर्मी कैंप में होता है क्वेश्चन सेट

चीन में प्रतियोगी परीक्षाओं को टॉप सीक्रेट मिशन की तरह अंजाम दिया जाता है. यहां पेपर सेट करने वाले शिक्षकों को 3 महीने पहले चुना जाता है और इसके बाद उन्हें सुनसान जगह पर ले जाया जाता है. इस दौरान उन्हें इंटरनेट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है. चीन में प्रश्न पत्र जेल में प्रिंट किए जाते हैं.

Advertisement
X
चीन में Gaokao की परीक्षा टॉप सीक्रेट ऑपरेशन की तरह कंडक्ट की जाती है. (Photo: ITG)
चीन में Gaokao की परीक्षा टॉप सीक्रेट ऑपरेशन की तरह कंडक्ट की जाती है. (Photo: ITG)

भारत में डॉक्टर बनने का दरवाजा खोलने वाली NEET परीक्षा के पेपर एक बार फिर से लीक हो चुके हैं. 3 मई 2026 को हुई इस परीक्षा में लगभग 22 लाख बच्चे शामिल हुए थे. अब इन बच्चों में गुस्सा और बेबसी है. पेपर लीक की शिकायत के बाद इस परीक्षा को लेने वाली एजेंसी (National testing agency- NTA) ने इस परीक्षा को कैंसिल कर दिया है. NEET ने घोषणा की है कि अब इस परीक्षा को फिर से लिया जाएगा. 

इस पेपर लीक ने NTA की कार्यक्षमता को सवालों के घेरे में डाल दिया है. 

जब प्रतियोगी परीक्षाओं की बात होती है तो चीन का जिक्र लाजिमी है. चीन को विश्व में प्रतियोगी परीक्षाओं की जन्मभूमि मानी जाती है. चीन की प्राचीन "के-जू" सिस्टम दुनिया का सबसे पुराना मेरिट-बेस्ड सिविल सर्विस सिलेक्शन सिस्टम था.  इसमें कन्फ्यूशियस का शिक्षाओं पर आधारित परीक्षाओं के जरिए आम लोगों को सरकारी नौकरियों में चुना जाता था. 

आधुनिक समय में चीन की प्रतियोगी परीक्षाएं दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं मानी जाती है. ये परीक्षाएं हैं Gaokao (राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा) और Guokao (सिविल सर्विस परीक्षा). Gaokao विशेष रूप से बहुत प्रतिष्ठित और दबाव वाली है, जिसमें लाखों छात्र भाग लेते हैं. 

लीक प्रूफ परीक्षा कैसे सुनिश्चित करता है चीन

चीन इन परीक्षाओं की निष्पक्षता को बहुत गंभीरता से लेता है क्योंकि यह चीन की सामाजिक साख और सरकारी विश्वसनीयता का प्रतीक है. पेपरलीक मुक्त परीक्षा के लिए चीन की एजेंसियां प्रश्न पत्र बनाने से लेकर परीक्षा संपन्न कराने तक अभूतपूर्व चौकसी का इंतजाम करती हैं. 

Advertisement

यूनिवर्सिटी एंट्रेंस परीक्षा Gaokao को देश में सबसे ज़्यादा अहमियत मिली हुई है ताकि टेस्ट देने वाले हर व्यक्ति के लिए निष्पक्षता और न्याय पक्का हो सके. इस परीक्षा के प्रश्न पत्र जेल में बने प्रिंटिंग प्रेस में छापे जाते हैं. ताकि इसके इन प्रश्न पत्रों के बाहर निकलने की आशंका न्यूनतम हो. 

टेस्ट में सफलता या असफलता को आम तौर पर एक युवा व्यक्ति का भविष्य तय करने में एक अहम फ़ैक्टर माना जाता है. 

टॉप सीक्रेट ऑपरेशन

चीन की सरकारी टीवी सीसीटीवी ने बताया कि परीक्षा से 3 महीने पहले सेकेंडरी स्कूलों और विश्वविद्यालयों से कुछ सीनियर टीचर्स को टेस्ट पेपर्स डिजाइन करने के लिए चुना जाता है. 

इन बाद इन शिक्षकों को बीजिंग के दूर-दराज और सुनसान इलाकों जैसे मिलिट्री कैंपों या जेलों में भेजा जाता है, ताकि एग्जाम के सवाल बनाने से पहले उन्हें गोपनीयता बनाए रखने की ट्रेनिंग दी जा सके. 

इस दौरान ये शिक्षक कड़ी निगरानी में सिर्फ लैंडलाइन टेलीफ़ोन से अपने परिवार से संपर्क कर सकते हैं. इस पूरे पीरियड में इन शिक्षों को इंटरनेट इस्तेमाल करने की मनाही होती है. 

 टेस्ट पेपर तैयार करने वाले शिक्षक परीक्षा हो जाने के बाद ही सुनसान जगहों से बाहर निकल सकते हैं. 

जेल में प्रिंट होता है पेपर 

Advertisement

ये तो हुई क्वेश्चन पेपर सेट करने की बात. इसके बाद बारी आती है इन प्रश्न पत्रों को प्रिंट करने की. चूंकि इस प्रश्न पत्र की लाखों प्रतियां प्रिंट की जाती है. इसलिए इसकी निगरानी अहम है. वर्ष 2024 में 1 करोड़ 30 लाख छात्रों ने Gaokao की परीक्षा दी थी. 

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार टेस्ट पेपर शिक्षा मंत्रालय और नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन दोनों के अधिकार में जेलों में प्रिंट किए जाते हैं. हर प्रिंट वर्कशॉप में कैमरे और गार्ड जैसे 24 घंटे सुरक्षा के कई तरीके होते हैं. इस दौरान सुरक्षा के उच्चतम मानदंडों का पालन किया जाता है. 

पेपर प्रिंट करने वाले वर्करों को अलग जगह पर रहना होता है और उनकी सख्त निगरानी होती है. 

करेंसी से ज्यादा सुरक्षा

टेस्ट पेपर की प्रिंटिंग के बाद इसे हथियारबंद गार्ड पूरे देश में ले जाते हैं. इनकी सुरक्षा बैकों और कैश ले जाने वाली आर्मर्ड गाड़ियों से भी ज़्यादा होती है. पेपर्स को खास तौर पर कमीशन की गई गाड़ियों में ले जाया जाता है, जिनमें सैटेलाइट नेविगेशन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम होते हैं और ड्राइवरों में एग्जाम अथॉरिटी के अधिकारी और पुलिस और मिलिट्री के लोग होते हैं. 

टेस्ट सेंटर तक जाने वाले रास्ते में गाड़ियों और उनके आस-पास की जगहों पर भी कड़ी नजर रखी जाती है. टेस्ट देने वाले लोगों को दिखाने से पहले, गाओकाओ पेपर्स को खास सुरक्षित स्टोरहाउस में रखा जाता है और सिक्योरिटी स्टाफ चौबीसों घंटे उनकी रखवाली करता है. 

Advertisement

एग्जाम सेंटर में पहुंचने पर पेपर कस्टमाइज़्ड स्टील-रीइन्फोर्स्ड कमरों में रखे जाते हैं, जो लेटेस्ट सिक्योरिटी उपायों से लैस होते हैं. अटेंडेंट की एक टीम, जो पेपर के साथ खाती और सोती है, एग्जाम खत्म होने तक उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार होती है. कमरों में अलार्म और मोशन सेंसर लगे होते हैं जो पुलिस सिस्टम से जुड़े होते हैं, ये सेंसर कुछ ही पलों में रिस्पॉन्स देते हैं.

एप के कई फीचर्स हो जाते हैं डाउन

परीक्षा केंद्रों तक पेपर्स पहुंच जाने के बाद भी चीन की सरकार पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा कराने के लिए चुप नहीं बैठती है.  

द गार्जियन की रिपोर्ट के चीन की बड़ी टेक कंपनियां सरकार के आदेश पर कॉम्पिटिटिव यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम के दौरान चीटिंग रोकने के लिए कई एप के AI फंक्शन बंद कर दिए हैं. 

टिकटॉक की सब्सिडरी ByteDance से परीक्षा के दौरान एक व्यक्ति ने जब एक प्रश्न का जवाब मांगा तो मैसेज आया, "कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम के दौरान जरूरतों के हिसाब से क्वेश्चन आंसरिंग सर्विस सस्पेंड कर दी गई है.”

एक और स्क्रीनशॉट से यह भी पता चला कि डीपसीक जो 2025 में चीनी मार्केट में नया आया एक लीडिंग जेनरेटिव AI टूल है, यूजर्स को बता रहा था कि उनकी सर्विस कुछ खास घंटों के दौरान उपलब्ध नहीं थी ताकि कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम में फेयरनेस बनी रहे. 

Advertisement

टेक कंपनी टेनसेंट की मालिकाना हक वाली युआनबाओ, अलीबाबा की क्वेन और मूनशॉट की किमी ने भी एग्जाम के समय अपने पिक्चर रिकग्निशन फंक्शन बंद कर दिए थे. 

परीक्षा के बाद एग्जाम हॉल के फुटेज की रिव्यू

गाओकाओ एग्जाम वीक में चीटिंग रोकने के लिए AI सस्पेंशन ही अकेला टूल नहीं है. कई इलाकों में पहले ही अनाउंस कर दिया जाता है कि वे एग्जाम के दौरान स्टूडेंट्स के बीच "असामान्य व्यवहार", जैसे फुसफुसाना या बार-बार नज़रें मिलाना, पर नजर रखने के लिए AI मॉनिटरिंग टूल का इस्तेमाल करेंगे. 

जियांग्शी प्रांत में एग्जाम के बाद फुटेज को रिव्यू किया गया और किसी भी वायलेशन या मिसकंडक्ट को "संबंधित नियमों के अनुसार सख्ती से निपटा जाता है. 

इसके अलावा चीनी अधिकारी एग्जाम पॉइंट्स पर सख्त एंट्री चेक, बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन, डिजिटल डिवाइस के लिए बेहतर स्क्रीनिंग और रेडियो सिग्नल ब्लॉकेज भी करते हैं. 

चीनी समाज गाओकाओ को कितनी गंभीरता से देखता है यह इस बात से पता चलता है कि कुछ शहरों ने पब्लिक परफॉर्मेंस टाल दिए हैं. स्टूडेंट्स को टेस्ट सेंटर तक समय पर पहुंचाने के लिए खास प्रायोरिटी ट्रैफिक लेन बनाई जाती है.

---- समाप्त ----
Live TV

TOPICS:
Advertisement
Advertisement