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हिंदी भाषा से हुआ प्यार, अब विदेश‍ियों को स‍िखा रहे नोएडा के किशोर

हिंदी दिवस पर विशेष: क‍िशोर श्रीवास्तव ने हिंदी प्रचार के लिए नया तरीका भी निकाला है. जब भी वो कहीं जाते हैं, लोगों से अंग्रेजी के आसान शब्दों का हिंदी में अर्थ पूछते हैं.

किशोर श्रीवास्तव हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए सीख चुके हैं कई भाषा किशोर श्रीवास्तव हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए सीख चुके हैं कई भाषा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 40 साल से हिंदी का प्रचार कर रहे हैं किशोर
  • देश और विदेश के लोगों को हिंदी के प्रति कर रहे जागरूक
  • किशोर श्रीवास्तव हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सीख चुके हैं कई भाषाएं

बहुत कम लोग ऐसे हैं जो जीवन भर बस इसी उद्देश्य के साथ चलते हैं कि हिंदी भाषा के लिए आम जन उसकी महत्ता समझे. दिल्ली में राजभाषा में करीब 33 साल तक सेवा देने वाले किशोर श्रीवास्तव रोजाना विदेशों में हिन्दी सिखाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने न जाने कितने देशों की भाषा सीखी और उसके बदले वहां के लोगों को उन्होंने हिंदी सिखाई. 

भारत सरकार हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास करती है. लेकिन कुछ लोग हैं जिन्होंने निजी तौर पर बिना किसी सरकारी सहायता के भाषा के प्रचार प्रसार को ही जीवन का मकसद बना लिया है. उन्हीं में से एक हैं नोएडा में रहने वाले किशोर श्रीवास्तव जिन्होंने हिन्दी के प्रचार और प्रसार के लिए जीवन के 40 साल से ज्यादा का समय दे दिया.

किशोर श्रीवास्तव खुद के बल पर देश विदेश में घूमते हैं और हिंदी के गायन, कविता के कार्यक्रम आयोजित करते हैं. जिस भी देश में वो जाते हैं पहले वो वहां की भाषा सीखते हैं, उसके बाद दूसरे देश के लोगों को अपनी मातृभाषा हिंदी सिखाते हैं.  

किशोर श्रीवास्तव कहते हैं, मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि लोगों को हिंदी के बारे में जानकारी दूं. उनको हिंदी बोलना सिखाऊं, मैं जब भी किसी दूसरे देश के नागरिक से बात करता हूं तो मैं उनसे हिंदी में बात करके उनकी भाषा में उस शब्द के क्या मायने हैं, ये समझाने का प्रयास करता हूं, इससे उन्हें हिंदी में रुचि हो जाती है. 

हिंदी का एक प्रयास
हिंदी का एक प्रयास

केंद्र सरकार में राजभाषा से रिटायर्ड अधिकारी किशोर श्रीवास्तव का मकसद अपनी भाषा को सम्मान दिलाना है. वो कहते भी हैं कि पहले दूसरे की भाषा को सम्मान करना होगा. मैं जब भी किसी देश में जाता हूं, वहां की भाषा सीखता हूं, उसके बाद उनको कहता हूं भईया अब हमारी हिंदी भी सीख लो, वो बड़े मजे में हिंदी सीखते भी हैं. किशोर श्रीवास्तव एक अच्छे कार्टूनिस्ट भी हैं, उन्होंने देश विदेश के बड़े अखबारों के लिए कार्टून बनाया है. 

वो कहते हैं कि जब मैं कार्टून बनाता था तो उस वक्त भी मैंने हिंदी के लिए काम किया, उन्होंने 1985 में 100 से ज्यादा हिंदी के लिए पोस्टर बनाए और उनकी अब तक 1000 से ज्यादा प्रदर्शनी भी लगवा चुके हैं. इसमें केवल हिंदी भाषा और उससे जुड़ी जानकारी को ही समायोजित करने की इन्होंने हमेशा कोशिश की है. 

हिंदी को लेकर अब कई लोग आगे आने का प्रयास कर रहे हैं.  किशोर श्रीवास्तव ने हिंदी प्रचार के लिए नया तरीका भी निकाला है. जब भी वो कहीं जाते हैं, लोगों से अंग्रेजी के आसान शब्दों का हिंदी में अर्थ पूछते हैं. जैसे ट्रेन को हिंदी में क्या कहते हैं? कंप्यूटर को हिंदी में क्या कहते हैं? और इससे लोगों मे हिंदी के प्रति ज्ञान और जिज्ञासा दोनों बढ़ती है.

 

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