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क्या आपके बॉस भी करते हैं आपके साथ मशीन जैसा व्यवहार, वायरल हो रहा ये पोस्ट दे रहा है जवाब 

वर्कप्लेस से वायरल हो रही एक घटना लोगों को काम के समय और ऑफिस के बाद भी फोन और मेल का रिप्लाई करने को मजबूर करते बॉस से एक बातचीत सामने आई है. ये बातचीत उस परेशानी को उजागर करती है जिससे कई कर्मचारी रोजाना प्रभावित होते हैं.

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is your boss treating you like a machine (Photo :Pexels)
is your boss treating you like a machine (Photo :Pexels)

आज के दौर में ऑफिस से टाइम पर निकलना मानों गुनाह हो गया है. 9 से 6 की नौकरी कब तो अक्सर ही 9 से 9 हो जाती है और पता भी नहीं चलता है. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वर्कप्लेस की एक घटना इस गंभीर मुद्दे को बड़े ही मजाकिया और दिलचस्प अंदाज में सबके सामने रखा है. यह घटना हमें याद दिलाती है कि कर्मचारी कोई मशीन नहीं बल्कि इंसान हैं. आजकल कंपनियों में देर तक काम करना आम बात हो गया है. टाइम पर निकलने पर अक्सर कर्मचारी की आलोचना होती है. ये रूटीन न केवल आपकी हेल्थ, मेंटल हेल्थ पर असर डालता है बल्कि परिवार से भी दूरी बना देता है. 

क्यों देर तक काम करना हो रहा है आम? 

कई कंपनियां एक ऐसे नियम को फॉलो करती हैं जो किसी ने बनाया भी नहीं होता है और वह नियम है हमेशा अवेलेबल रहने का. कर्मचारियों से यह उम्मीद की जाती है कि काम जब भी बुलाए, वे बिना सोचे अपने काम के घंटों तो बढ़ा दें, चाहे इसका मतलब देर रात तक ऑफिस में रुकना ही क्यों न हो. शुरुआत में यह बस थोड़ा सा extra effort लगता है लेकिन धीरे-धीरे यही आदत बन जाती है. नतीजा यह होता है कि इंसान का अपना समय कहीं खोने लगता है. परिवार के साथ बैठकर सुकून से बात करना, दोस्तों के साथ हंसना या बस खुद के लिए कुछ पल निकालना सब पीछे छूटने लगता है. 

क्या है रोबोट वाली बात?

करियर कोच साइमन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक किस्सा साझा किया है. इसमें एक कर्मचारी ने अपने बॉस से परेशान हो चुका है. आए दिन छुट्टी या देर रात काम करने की उम्मीद जताई जाती है. परेशान होकर उसने एक तरीका अपनाया. इसके लिए उसने अपने बॉस को रोबोट की फोटो दिखाई और पूछा कि सर ये क्या है? बॉस ने जवाब दिया कि ये तो रोबोट है.

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इसके बाद कर्मचारी ने बॉस से कुछ सवाल किए- क्या इसका कोई परिवार है, क्या इसे नींद की जरूरत है, क्या इसकी कोई जिम्मेदारियां हैं? बॉस ने सभी सवालों का जवाब ना में दिया. तभी कर्मचारी ने अपनी बात रखी. उसने कहा कि यही फर्क है सर, मैं रोबोट नहीं हूं. मुझे नींद,आराम और अपने परिवार के लिए समय चाहिए. उसने अपने बॉस को यह भी याद दिलाया कि उसे अक्सर देर रात तक, कभी-कभी तो आधी रात के करीब तक काम दिया जाता था.

जल्दी लॉग-ऑउट का होता है ये मतलब 

आजकल कई कंपनियों में यह मान लिया गया है कि अगर आप देर तक नहीं रुक रहे, तो आप काम के प्रति गंभीर नहीं हैं. लॉग-आउट करने के ठीक 5 मिनट पहले नया काम थमा देना एक आम बात बन गई है. इस वजह से कर्मचारियों का निजी जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है. 

क्यों लोग पसंद कर रहे हैं ये किस्सा? 

इस बातचीत का अंत बहुत ही सकारात्मक रहा. कर्मचारी ने मजाक में यहाX तक कह दिया कि अगर कंपनी को हर समय काम करने वाला कोई चाहिए, तो मैं कुछ रोबोट्स के रिज्यूमे भेज सकता हूं. ऑनलाइन दुनिया में लोग इस बात से काफी जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यह काम से जी चुराने की बात नहीं है, बल्कि अपनी सीमाएं तय करने की बात है. काम ज़रूरी है, लेकिन काम के बाहर भी एक जिंदगी है जिसे जीना हर इंसान का हक है. 

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