Indian Army और Indian Railways ने मिलकर एक नया समझौता (Framework of Cooperation) शुरू किया है इसका मकसद अग्निवीरों और रिटायर होने वाले सेना के जवानों को नौकरी पाने में मदद करना है. इस पहल के तहत सेना से रिटायर होने के बाद जवानों को रेलवे में मिलने वाली नौकरियों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, उन्हें सिविल नौकरी में जाने के लिए जरूरी सहायता भी दी जाएगी, ताकि उनका बदलाव आसान हो सके. रेल मंत्रालय और सेना के अनुसार, यह कदम अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है. पहले बैच के अग्निवीरों की रिटायरमेंट प्रक्रिया अगले कुछ महीनों में शुरू होने वाली है.
सेना और रेलवे के बीच नया समझौता
भारतीय सेना ने भारतीय रेलवे के साथ मिलकर अग्निवीरों और अन्य रिटायर होने वाले सैनिकों के लिए एक नया समझौता (Framework of Cooperation) शुरू किया है. इसका उद्देश्य सेना से सेवा समाप्ति के बाद उन्हें बेहतर नौकरी के अवसर दिलाना है. यह पहल दोनों मंत्रालयों के आपसी सहयोग का एक बड़ा कदम है. इसके तहत रिटायर होने वाले सैनिकों को रेलवे में नौकरियों में आसानी से काम शुरू करने में मदद की जाएगी.

रिटायर जवानों को रेलवे में नौकरी में मदद
इस योजना में रेलवे की नौकरियों के बारे में जानकारी देना, योग्य पूर्व सैनिकों के लिए भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाना और सेवा समाप्ति के करीब पहुंच चुके जवानों के लिए विशेष सहायता व्यवस्था करना शामिल है. यह कदम इस बात को दर्शाता है कि सरकार चाहती है कि अग्निवीर और पूर्व सैनिक अपनी ट्रेनिंग, अनुशासन और कौशल का उपयोग करते हुए देश की सेवा करते रहें और उन्हें एक अच्छा दूसरा करियर मिले.
भर्ती प्रक्रिया होगी आसान
अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर केवल 4 साल के लिए भर्ती होते हैं. इनमें से कम ही लोग आगे सेना में बने रहते हैं. ऐसे में सेवा खत्म होने के बाद स्थिर नौकरी पाना उनके लिए चुनौती बन जाता है. इस समस्या को कम करने के लिए रेलवे, जो देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है, में उन्हें प्राथमिकता देने की योजना है. रेलवे में सुरक्षा (रेलवे सुरक्षा बल), संचालन, रखरखाव, लॉजिस्टिक्स और प्रशासन जैसे कई क्षेत्र हैं, जहां सैनिकों के कौशल का सही उपयोग हो सकता है.

रेलवे में मिलेंगे कई अवसर
इस सहयोग के तहत पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को केंद्रीय सरकारी नौकरियों में पहले से मिल रहे आरक्षण और आयु में छूट का लाभ भी मिलेगा. साथ ही उन्हें नौकरी के अवसरों की विशेष जानकारी और कौशल के अनुसार पद दिए जाने की उम्मीद है. इस पहल की जानकारी सेना के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से दी गई है. यह सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य सेवा समाप्ति के बाद जवानों को कौशल विकास, आर्थिक मार्गदर्शन और रोजगार सहायता देना है.
हजारों सैनिकों को होगा फायदा
उम्मीद है कि इस योजना से हर साल हजारों रिटायर सैनिकों को फायदा होगा. इससे जवानों का मनोबल भी बढ़ेगा और देश सेवा के महत्व को और मजबूती मिलेगी. कोटा, ट्रेनिंग और अन्य नियमों से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश दोनों मंत्रालय मिलकर तय करेंगे.