ग्रेच्युटी किसी भी कर्मचारी के लिए उसकी लंबी सेवा का एक रिटायरमेंट रिवॉर्ड जैसे है. अगर आप किसी संस्थान में लगातार 1 साल तक काम करते हैं, तो कंपनी आपको विदाई के वक्त या रिटायरमेंट पर एक मुश्त राशि देती है. लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या तय सैलरी पर ही ग्रेच्युटी मिलती है या हर किसी को इसका फायदा मिलता है. लेकिन बता दें कि ग्रेच्युटी का सीधा फॉर्मूला है कि इसकी कैल्कुलेशन अंतिम सैलरी के आधार पर की जाती है. इसके साथ ही आप नौकरी में जब तक शामिल किया जाता है.
बता दें कि ग्रेच्युटी की राशि हर साल 15 दिन के सैलरी के बराबर एड होती है दो 1 साल या उससे ज्यादा समय तक नौकरी करने वालों को दी जाती है. पहले 5 साल नौकरी करने के बाद दी जाती थी.
सैलरी स्ट्रक्चर बदला, तो बढ़ गई ग्रेच्युटी
नए नियमों के मुताबिक सरकार ने कंपनियों को आदेश दिया है कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए.
क्या हुआ असर: चूंकि ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए अब रिटायरमेंट या इस्तीफा देने पर मिलने वाली रकम पहले के मुकाबले 20% से 30% तक बढ़ गई है.
50 हजार सैलरी वालों को कितनी मिलेगी ग्रेच्युटी?
इसे आसानी से समझने के लिए मान लेते हैं कि आपकी सैलरी 50 हजार रुपये हैं. तो आपको ग्रेच्युटी कितनी मिलेगी? नए नियमों के बाद आपकी बेसिक सैलरी कम से कम 25,000 होगी. अगर आप 1 साल बाद नौकरी छोड़ते हैं, तो पुराने स्ट्रक्चर के मुकाबले अब आपकी ग्रेच्युटी की राशि काफी मोटी बनेगी.
Gratuity = (अंतिम सैलरी × 15 × काम के साल ÷ 26
इसके साथ कर्मचारियों को एक और फायदा मिला है. 2026 के नियमों में सबसे सख्त प्रावधान भुगतान के समय को लेकर है. अब कंपनी को कर्मचारी के छोड़ने या हटाए जाने के 2 वर्किंग डेज (48 घंटे) के भीतर उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा. हालांकि, ग्रेच्युटी के लिए 30 दिन का समय है.
नौकरी करने वालों को फायदे