गुजरात से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस भर्ती प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक कांस्टेबल, जिसकी हाइट साल 2019 में 165 सेमी दर्ज की गई थी और उसी आधार पर उसका चयन भी हुआ था, बाद में सब-इंस्पेक्टर (SI) प्रमोशन के दौरान उसी हाइट टेस्ट में फेल हो गया. यह मामला जितना अजीब लगता है, उतना ही गंभीर भी है, क्योंकि एक ही व्यक्ति की शारीरिक माप में इतना बड़ा फर्क सामने आना भर्ती प्रणाली की जांच और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है.
क्या है पूरा मामला?
बोनीकुमार कपाड़िया नाम के युवक की साल 2019 में गुजरात पुलिस में कांस्टेबल के पोस्ट पर भर्ती हुई थी. उस दौरान फिजिकल टेस्ट 165 सेमी की हाइट मानी गई थी. इसके साथ ही उन्होंने 25 मिनट में 5 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लिया था. लेकिन 6 साल बाद जब उसी व्यक्ति ने सब-इंस्पेक्टर (SI) बनने के लिए आवेदन किया तो उसकी हाइट 165 सेमी से कम पाई गई जिसके कारण वह परीक्षा में फेल हो गया.
दो बार नापी गई हाइट फिर भी हो गया फेल
अब इस फैसले को चुनौती देते हुए कपाड़िया ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जिसके बाद से कोर्ट ने हाइट मापने की अनुमति दी लेकिन उनपर शर्त थी कि यह प्रक्रिया वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ हॉस्पिटल में होगी और उम्मीदवार को 10 हजार रुपये देने होंगे. लेकिन दोबारा हाइट मापने के बाद भी कपाड़िया की हाइट 165 सेमी से कम निकली.
कोर्ट ने पूछा क्या कम हो सकती है हाइट?
सुनवाई के दौरान कपाड़िया के वकील से जस्टिस निरजर देसाई ने सवाल किया कि क्या समय के साथ व्यक्ति की हाइट कम हो सकती है? लेकिन जब वकील ने माप में गलती की बात कही, तो कोर्ट ने बताया कि ये सारी प्रोसेस वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ हुई है, इसमें गलती की कोई संभावना नहीं हो सकती. वहीं, कोर्ट ने इस दौरान चेतावनी भी दी कि कोर्ट तीसरी बार हाइट मापने का आदेश दे सकता है लेकिन अगर वह फेल होते हैं, तो कांस्टेबल की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ऐसा अगर होता है तो उनकी नियुक्ति गलत मानी जा सकती है. इसके बाद से कपाड़िया ने अपना आवेदन वापस ले लिया.