आज दुनिया भर में प्रेम के प्रतीक के तौर पर 'वैलेंटाइन डे' मनाया जाता है. वैलेंटाइन डे की शुरुआत कैसे हुई, इससे जुड़े कई किस्से हैं. इनमें से सबसे प्रमुख संत वैलेंटाइन को दी गई फांसी से जुड़ा है. क्योंकि माना जाता है कि प्रेमियों को संरक्षण देने वाले संत वैलेंटाइन को इसी दिन फांसी दी गई थी. ऐसे में उस किस्से पर नजर डालते हैं, जो वैलेंटाइन डे की उत्पत्ति से जुड़ा है.
14 फरवरी 270 ईस्वी में रोमन सम्राट क्लॉडियस द्वितीय के शासनकाल में रोम के एक पवित्र पुजारी, वैलेंटाइन को मौत की सजा दे दी गई थी. क्लॉडियस ने अपने शासनकाल में कई अलोकप्रिय और रक्तपातपूर्ण फैसले लिए. सम्राट को एक मजबूत सेना बनाए रखनी थी, लेकिन उसे अपनी सैन्य टुकड़ियों में सैनिकों को भर्ती करने में कठिनाई हो रही थी. क्लॉडियस का मानना था कि रोमन पुरुष अपनी पत्नियों और परिवारों के प्रति अपने प्रबल लगाव के कारण सेना में भर्ती होने के इच्छुक नहीं थे.
इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए क्लॉडियस ने रोम में सभी विवाहों और सगाईयों पर प्रतिबंध लगा दिया. वैलेंटाइन ने इस फरमान की नाइंसाफी को भांपते हुए क्लॉडियस की अवहेलना की और गुप्त रूप से युवा प्रेमियों के विवाह संपन्न कराना जारी रखा. जब सम्राट को वैलेंटाइन के कारनामों का पता चला, तो क्लॉडियस ने पुजारी को मौत की सजा देने का आदेश दिया. वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर रोम के प्रीफेक्ट के सामने पेश किया गया, जिसने उसे लाठियों से पीट-पीटकर मार डालने और उसका सिर कलम करने की सजा सुनाई. यह सजा 14 फरवरी, लगभग 270 ईस्वी को दी गई थी.
वैलेंटाइन डे की उत्पत्ति से जुड़ी किंवदंतियां
एक किंवदंती यह भी है कि जेल में रहते हुए, सेंट वैलेंटाइन ने जेलर की बेटी के लिए एक विदाई पत्र छोड़ा, जो उनकी दोस्त बन गई थी. उन्होंने उस पर 'आपके वैलेंटाइन की ओर से' लिखकर हस्ताक्षर किए. उनकी महान सेवाओं के लिए, वैलेंटाइन को उनकी मृत्यु के बाद संत घोषित किया गया था.
वास्तव में, संत वैलेंटाइन की सटीक उत्पत्ति और पहचान स्पष्ट नहीं है. कैथोलिक विश्वकोश के अनुसार , 14 फरवरी की तिथि के अंतर्गत कम से कम तीन अलग-अलग संत वैलेंटाइन का उल्लेख मिलता है. ये सभी शहीद थे. एक रोम में पुजारी थे, दूसरे इंटरमना (वर्तमान में टेर्नी, इटली) के बिशप थे, और तीसरे संत वैलेंटाइन रोम के अफ्रीका प्रांत में शहीद हुए थे. उस वक्त वैलेंटाइन एक आम नाम था.
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इस बात को लेकर किंवदंतियां अलग-अलग हैं कि शहीद का नाम प्रेम प्रसंग से कैसे जुड़ा. उनकी मृत्यु की तिथि संभवतः ल्यूपरकेलिया पर्व से जुड़ गई , जो रोम के उर्वरता के देवता ल्यूपरकस को समर्पित एक मूर्तिपूजक उत्सव था. इसमें रेंडम विवाह होते थे. इस उत्सव के दौरान, पुरुष एक डिब्बे से एक युवती का नाम निकालते थे और वे दोनों एक जोड़े बन जाते थे. 496 ईस्वी में, पोप गेलैसियस ने ल्यूपरकेलिया को समाप्त करने का निर्णय लिया और उन्होंने घोषणा की कि 14 फरवरी को सेंट वैलेंटाइन डे के रूप में मनाया जाएगा .
धीरे-धीरे, 14 फरवरी प्रेम संदेशों , कविताओं और फूलों जैसे साधारण उपहारों के आदान-प्रदान की तारीख बन गई. आज पूरी दुनिया में व्यापक तौर पर 14 फरवरी को प्यार के लिए समर्पित दिन यानी की वैलेंटाइन डे के तौर पर बनाया जाता है.