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कौन देता है ओलंपिक एथलीट्स को बंदूक? अपने लाइसेंस से खरीद सकते हैं इतनी गोलियां

Olympics Games 2024: ओलंपिक गेम्स 2024 में मनु भाकर ने भारत को पहला पदक दिला दिया है. मनु भाकर के मेडल जीतने के बाद शूटर्स की गन की भी चर्चा हो रही है, तो जानते हैं इन बंदूकों से जुड़ी कुछ खास बातें...

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ओलंपिक गेम्स में मनु भाकर ने जीता कांस्य पदक
ओलंपिक गेम्स में मनु भाकर ने जीता कांस्य पदक

पेरिस ओलंपिक गेम्स में मनु भाकर ने भारत को पहला पदक दिला दिया है. मनु भाकर के कांस्य पदक जीतने के बाद उनकी बंदूक की काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि रियो ओलंपिक में उनकी बंदूक  में आई खराबी से उन्हें मुश्किलों को सामना करना पड़ा था. लेकिन, इस बार मनु भाकर ने अपने निशाने से इतिहास रच दिया है और भारत की झोली में पहला पदक डाल दिया है. जब बंदूक की बात हो रही है तो इससे जुड़े लोगों के मन में आते हैं कि आखिर ये बंदूक एथलीट को कौन देता है और क्या इसके लिए अलग लाइसेंस की जरूरत होती है? तो जानते हैं इन सवालों के जवाब और जानते हैं कि ये बंदूक आम बंदूकों से किस तरह अलग होती है...

किसकी होती है ये बंदूक?

ओलंपिक में जाने वाले शूटर्स को अलग अलग तरीके से बंदूक मिलती है. अधिकतर केसों में हर देश की नेशनल फेडरेशन या नेशनल ओलंपिक कमेटी शूटर्स को बंदूक उपलब्ध करवाती है. जैसे भारत में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया कुछ एथलीट को गन उपलब्ध करवाती है. लेकिन, कई बार एथलीट अपनी बंदूक इस्तेमाल करना पसंद करते हैं यानी वे खुद की पर्सनल बंदूक से शूटिंग करते हैं. वहीं, कुछ लोगों को स्पोंसर्स की ओर से बंदूक दी जाती है और ये कंपनियां गन मैन्युफैक्चर्स भी हो सकती हैं.

किस कंपनी की होती है बंदूक?

आमतौर पर शूटर्स इटली और जर्मनी की कुछ कंपनियों पर विश्वास करते हैं और उनकी बंदूकों से टूर्नामेंट खेलते है. जैसे प्रमुख गन मैन्युफैक्चर्स में Walther (जर्मनी), Pardini (इटली), Morini (इटली), Feinwerkbau (जर्मनी), Anschutz (जर्मनी) आदि शामिल हैं. पिछले ओलंपिक में मनु भाकर की जिस बंदूक को लेकर विवाद हुआ था, वो बंदूक मोरिनी कंपनी की ओर से बनाई गई थी. इसके बाद मोरिनी कंपनी की ओर से बयान जारी किए गए थे और काफी विवाद खड़ा हो गया था. 

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क्या लेना होता है गन लाइसेंस?

ओलंपिक या अन्य गेम्स में हिस्सा लेने वाले शूटर्स को भी गन लाइसेंस की जरुरत होती है. उन्हें लाइसेंस बनवाने में काफी छूट मिलती है, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत लाइसेंस लेना होता है. उन्हें आर्म्स एक्ट में सेक्शन 3 और 4 में छूट मिलती है और एक खास परमिशन के जरिए लाइसेंस दिया जाता है. इन्हें भी अपने लाइसेंस को कुछ समय के बाद अपडेट करवाना होता है. हाल ही में सरकार ने एथलीट्स से जुड़े गन नियमों में बदलाव किया था.

मिलती है गिनती की गोलियां

नए नियमों के हिसाब से इंटरनेशनल मेडल विनर या फेमस शूटर को 12 बंदूक रखने की इजाजत है, जो पहले सात ही हुआ करती थी. वहीं, कुछ शूटर्स को 8, 10, 2 बंदूक रखने की इजाजत थी. साथ ही कुछ वक्त पहले गोलियों की संख्या में भी इजाफा किया गया है.  अब अब .22 LR राइफल / पिस्तौल के लिए 1000 के स्थान पर 5000, दूसरी तरह की पिस्तौल /रिवाल्वर के लिए 600 के स्थान पर 2000 और शॉटगन कैलिबर के लिए 500 के स्थान पर 5000 गोला बारूद खरीद सकते हैं. 

कितने की आती है एक बंदूक?

वैसे तो हर एक बंदूक की अलग रेट होती है. मगर 10 मीटर एयर पिस्टल की बात करें तो इसके लिए मोरिनी कंपनी की CM 162EI ज्यादा इस्तेमाल की जाती है. मनु भाकर ने भी रियो ओलंपिक में मोरिनी की ही गन का इस्तेमाल किया था. ये MORINI CM 162EI की बात करें तो ये 166,900 रुपये की आती है  और इसे खरीदने के लिए कई कागजों की आवश्यकता होती है और राइट, लेफ्ट हैंड के लिए अलग अलग गन आती है. 
 

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