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स्टूडेंट लाइफ में इतने घंटे की नींद बेहद जरूरी, डॉक्टर बोले- वरना घट सकती है याददाश्त

आजकल की तेज और बदलती लाइफस्टाइल और पढ़ाई के दबाव के बीच छात्रों की नींद अक्सर कम हो जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उम्र के अनुसार सही नींद कितनी होनी चाहिए? डॉक्टर मेघना फडके सुल्तानिया बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) बताती हैं कि पर्याप्त नींद न मिलने से याददाश्त कमजोर होती है, तनाव बढ़ता है और पढ़ाई पर भी असर पड़ता है. 

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बदलते लाइफस्टाइल की वजह से छात्रों की नींद हो रही है कम, याददाश्त पर भी पड़ रहा असर. (Photo : Pexels)
बदलते लाइफस्टाइल की वजह से छात्रों की नींद हो रही है कम, याददाश्त पर भी पड़ रहा असर. (Photo : Pexels)

हमने अपने परिवार से कभी न कभी यह बात जरूर सुनी होगी कि अभी जाग जाओ और अच्छे नंबरों के लिए पढ़ो... सोने के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है. लेकिन क्या यह कहावत सही है? आज यानी 13 मार्च को देशभर में वर्ल्ड स्लीप डे सेलिब्रेट किया जा रहा है. इस बीच एक सवाल कई लोगों के मन में है कि स्टूडेंट लाइफ में नींद की कितनी जरूरी है? यह जानना बहुत जरूरी है. आजकल के प्रतिस्पर्धी समय में पढ़ाई, कोचिंग, मोबाइल और सोशल मीडिया की वजह से छात्रों की नींद पर गहरा असर पड़ रहा है जिसकी वजह से यह दिन पर दिन कम होती जा रही है. कई छात्र देर रात तक पढ़ाई करते हैं या मोबाइल का इस्तेमाल करते रहते हैं जिसका बुरा असर उनकी सेहत, एकाग्रता और मानसिक विकास पर पड़ रहा है. डॉक्टर मेघना फडके सुल्तानिया बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जो वर्तमान में एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में वरिष्ठ सलाहकार हैं बताती हैं कि छात्र जीवन में पर्याप्त नींद उतनी ही जरूरी है जितनी पढ़ाई और पोषण. 

मेघना के मुताबिक, अलग-अलग उम्र के बच्चों और छात्रों के लिए नींद की जरूरत अलग होती है. अगर बच्चे या छात्र अपनी उम्र के हिसाब से पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो इसका असर उनकी याददाश्त, सीखने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है. नींद पर काम करने वाली संस्था अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अनुसार बच्चों और किशोरों के लिए रोजाना पर्याप्त नींद बहुत जरूरी है क्योंकि इसी दौरान मस्तिष्क दिनभर सीखी हुई चीजों को व्यवस्थित करता है और बॉडी की ग्रोथ भी होती है. 

उम्र के मुताबिक कितनी होनी चाहिए नींद?

1. नर्सरी (3–5 वर्ष)- इस उम्र के बच्चों को रोजाना करीब 10 से 13 घंटे की नींद लेना जरूरी है. इसमें रात की नींद के साथ दिन की छोटी झपकी भी शामिल हो सकती है. यह उम्र दिमागी ग्रोथ और सीखने की शुरुआत की होती है. ऐसे में अच्छी नींद उनके दिमागी विकास में और भी ज्यादा कारगर साबित हो सकती है. 

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2. प्राइमरी स्टूडेंट (6–10 वर्ष) - इस उम्र के बच्चों को 9 से 12 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है. पर्याप्त नींद लेने वाले बच्चे स्कूल में ज्यादा एक्टिव रहते हैं और उनकी सीखने की क्षमता बेहतर होती है. 

3. मिडिल स्कूल स्टूडेंट (11–13 वर्ष)- मिडिल स्कूल के छात्रों को 9 से 11 घंटे की नींद लेनी चाहिए. इस उम्र में हार्मोनल बदलाव शुरू होते हैं, इसलिए नींद की कमी उन्हें चिड़चिड़ा बना सकती है. इसके साथ ही कम नींद के कारण उन्हें किसी भी काम में ध्यान लगाने की परेशानी हो सकती है. 

4. बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र (14–18 वर्ष)- बोर्ड क्लास के छात्रों को रोजाना 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए. कई छात्र देर रात तक पढ़ते हैं, लेकिन डॉ. मेघना के अनुसार कम नींद लेने से याददाश्त कमजोर हो सकती है. 

5. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र - कॉलेज या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को भी कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद लेनी चाहिए. इससे वह दिनभर एक्टिव रहने के साथ फोकस, निर्णय क्षमता और मानसिक संतुलन बेहतर रहता है. 

बदलते दौर में नींद सबसे बड़ी समस्या 

डॉ. मेघना सुल्तानिया बताती हैं कि स्टूडेंट लाइफ में नींद की कमी सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है. कई छात्र सोचते हैं कि कम सोकर ज्यादा पढ़ाई की जा सकती है, लेकिन सच यह है कि पर्याप्त नींद न लेने से दिमाग ठीक से काम नहीं करता. इससे एकाग्रता घटती है, याददाश्त कमजोर होती है और तनाव बढ़ सकता है. डॉक्टर आगे बताते हैं कि नींद के दौरान ही दिमाग दिनभर पढ़ी हुई जानकारी को व्यवस्थित करता है. इसलिए जो छात्र पर्याप्त नींद लेते हैं, उनकी पढ़ाई ज्यादा प्रभावी होती है. 

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कम नींद दे सकती है कई परेशानी- 

  • पढ़ाई में ध्यान न लगना
  • याददाश्त कमजोर होना
  • चिड़चिड़ापन और तनाव
  • सिरदर्द और थकान
  • इम्युनिटी कमजोर होना

डॉ. ने बताया नींद को बेहतर करने की टिप्स- 

इस समस्या से जूझ रहे बच्चों को डॉ. मेघना ने बेहतर नींद के लिए कुछ टिप्स भी दिए हैं. 

  • रोजाना एक तय समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं
  • सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल या लैपटॉप बंद करें
  • देर रात भारी खाना और कैफीन कंज्यूम करने से बचें
  • पढ़ाई और आराम के बीच संतुलन बनाए रखें
  • सोने से पहले कमरे में शांति बनाएं और अंधेरा कर दें

भविष्य में हो सकती है परेशानी 

डॉक्टर मेघना का कहना है कि छात्र जीवन में नींद को नजरअंदाज करना भविष्य में स्वास्थ्य समस्याओं को न्योता देने जैसा है. इसलिए पढ़ाई जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी पर्याप्त नींद भी है. अगर छात्र अपनी उम्र के अनुसार सही नींद लें, तो उनकी पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक विकास तीनों बेहतर हो सकते हैं. 

 

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