"हमारे पास चंद्रमा या ग्रहों की खोज या मानवयुक्त अंतरिक्ष-उड़ान के रूप में आर्थिक रूप से उन्नत देशों के साथ मुकाबला करने की कल्पना नहीं है. लेकिन हम आश्वस्त हैं कि अगर हमें राष्ट्रीय स्तर पर और राष्ट्रों के समुदाय में एक सार्थक भूमिका निभानी है, हमें मनुष्य और समाज की वास्तविक समस्याओं के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के अनुप्रयोग में किसी से पीछे नहीं रहना चाहिए, हम देश के आर्थिक विकास के लिए काम करेंगे न कि दिखावे के लिए." इसरो के बनने के समय महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई का यह विचार ही था, जिसने आज भारत को स्पेस की दुनिया में कई विकसित देशों की बीच खड़ा कर दिया.
कैसे हुई इसरो की स्थापना?
रूसी सैटेलाइट स्पुतनिक लॉन्च होने के बाद, विक्रम साराभाई ने भारतीय स्पेस रिसर्च सेंटर बनाने की बात रखी थी. आज से करीब 61 साल पहले यानी 1962 में देश के महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के कहने पर सरकार ने इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च (INCOSPAR) बना था. इसे भारतीय स्पेस सेंटर की नींव कहा जाए तो गलत नहीं होगा.
15 अगस्त 1969 को इन्कोस्पार का नाम बदलकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो रखा गया. विक्रम साराभाई ने इसरो की स्थापना की थी. अंतरिक्ष विभाग की स्थापना के बाद 1972 में इसरो को इस विभाग के तहत लाया गया.
इसरो का उद्देश्य
इसरो का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का विकास और उनका इस्तेमाल करना है. इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, इसरो ने संचार, दूरदर्शन प्रसारण और मौसम संबंधी सेवाओं, संसाधन मॉनीटरन और प्रबंधन; अंतरिक्ष आधारित नौसंचालन सेवाओं के लिए प्रमुख अंतरिक्ष प्रणालियों की स्थापना की है. इसरो ने उपग्रहों को अपेक्षित कक्षाओं में स्थापित करने के लिए उपग्रह प्रक्षेपण यान, पी.एस.एल.वी. और जी.एस.एल.वी. विकसित किए हैं. इसको सीधे देश के प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है.
इन वैज्ञानिकों ने रखी थी इसरो की नींव
विक्रम साराभाई के अलावा एसके मित्रा, सीवी रमन, मेघनाद साहा, सतीश धवन, होमी जहांगीर भाभा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, एचजीएस मूर्ति, वामन दत्तात्रेय पटवर्धन जैसे महान वैज्ञानिकों ने इसरो के अलग-अलग सेंटर्स, तकनीक, रॉकेट्स, इंजन आदि को विकसित करने में मदद की.
इसरो का पहला सैटेलाइट
इसरो दुनिया की छह बड़ी स्पेस एजेंसियों में शामिल है, जिसके पास खुद के रॉकेट्स हैं. क्रायोजेनिक इंजन है. जो दूसरे ग्रहों पर मिशन लॉन्च कर सकता है. जिसके पास भारी मात्रा में आर्टिफिशियल सैटेलाइट्स हैं. इसरो का पहला सैटेलाइट आर्यभट्ट (Aryabhata) था. जिसे सोवियत स्पेस एजेंसी इंटरकॉसमॉस ने 1975 में लॉन्च किया था लेकिन 5 साल बाद ही इसरो ने अपना पहला सैटेलाइट RS-1 अपने घर से लॉन्च किया. इसके बाद इसरो रुका नहीं. इसरो के पास आधा दर्जन प्रकार के रॉकेट हैं. इसके बाद 1980 में पहला सैटेलाइट रोहिणी सीरीज-1 (RS-1) लॉन्च करके भारत दुनिया के उन सात देशों की सूची में शामिल हो गया जिनके पास रॉकेट लॉन्च की सुविधा थी. सैटेलाइट बनाने की ताकत थी. ये देश थे- सोवियत संघ, अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, चीन और जापान.