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जिस शख्स की आवाज आज भी सरहदों की मोहताज नहीं...

एक ऐसी आवाज जो आज भी हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच पुल का काम करती है. कव्वाली के शहंशाह कहे जाने वाले नुसरत फतेह अली खान साहब साल 1948 में आज ही के दिन पैदा हुए थे.

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Nusrat Fateh Ali Khan
Nusrat Fateh Ali Khan

नुसरत फतह अली खान को जिस तरह पाकिस्तान में पसंद किया जाता है ठीक उसी तरह हिन्दुस्तान में भी उनके दीवाने हैं. सूफी संगीत और कव्वालियों के क्षेत्र के तो वे बेताज बादशाह माने जाते हैं. उन्हें दुनिया शहंशाह-ए-कव्वाली कहती है. वे साल 1948 में 13 अक्टूबर के रोज ही पैदा हुए थे.

1. वे जालंधर में पैदा हुए थे लेकिन बंटवारे के वक्त उनका पूरा परिवार पाकिस्तान जा बसा.

2. ऐसा माना जाता है कि सूफी संगीत और कव्वाली की दुनिया में वे 25 सालों तक राज करत रहे.

3. उन्होंने मात्र 16 बरस की उम्र में अब्बू के चेलम पर कव्वाली गाई और उसके बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.

4. वे रेडियो पाकिस्तान के लिए भी गाते रहे थे. धीरे-धीरे उनकी गायकी को ही स्टाइल मान लिया गया.

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