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फुल-टाइम से मल्टी-रोल तक: भारत में पोर्टफोलियो करियर की बढ़ती मांग, युवाओं को कर रही आकर्षित

इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं. माना जा रहा है कि इस दशक के अंत तक गिग वर्क करने वाले की संख्या करोड़ों से ज्यादा हो सकती है. 

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इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं. (Photo : Pexels)
इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं. (Photo : Pexels)

भारत में लगातार बदलते काम के तरीके कई नए बदलाव को जन्म दे रहे हैं. इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, इस दशक के आखिर तक भारत में गिग वर्क करने वालों की संख्या 2.3 करोड़ से ज्यादा हो सकती है. वहीं, प्रोजेक्ट के आधार पर नौकरी देने का चलन भी तेजी से बढ़ा है और इसमें करीब 40% की बढ़ोतरी हो चुकी है. 

इसके साथ ही अब 10 में से 9 लोग अपने काम में एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं यानी काम करने का तरीका बदल रहा है. अब नौकरियां पहले से ज्यादा फ्लेक्सिबल और टेक्नोलॉजी पर आधारित हो रही हैं. 

इसके पहले ऐसी मिलती थी नौकरी 

पहल के समय में नौकरी मिलना बेहद आसान होता था. डिग्री मिलने पर एक ही नौकरी मिलती थी और लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करना होता था. लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है. भारत में काम करने वाले लोग नए मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं. वे अब एक ही नौकरी तक सीमित नहीं हैं. वे 'पोर्टफोलियो करियर' का एक नया रूप बना रहे हैं, जिसमें वे एक ही समय में कई चीजों का मैनेजमेंट कर रहे हैं. यह कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं है बल्कि लगातार हो रहे टेक्नोलॉजी में बदलाव, कंपनियों के हायरिंग करने के तरीके और लोगों के काम करने के ढंग में आए बदलाव का नतीजा है. 

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क्या कहती है रिपोर्ट?

इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, एक ऐसा ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है जिसमें देखा जा रहा है जिसमें लोगों को प्रोजेक्ट के बेसिस पर काम पर रखा जा रहा है. कंपनियां लंबे समय के बजाय थोड़े समय के लिए लोगों को हायर कर रही हैं और जरूरत के हिसाब से एक्सपर्ट्स को भी जोड़ रही हैं. साथ ही, टेक्नोलॉजी की वजह से लोगों को फ्रीलांस काम ढूंढना भी आसान हो गया है. इसलिए अब भारतीय वर्कफोर्स सिर्फ एक ही नौकरी तक सीमित नहीं रह रही है. उदाहरण से समझते हैं कि कोई युवा सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल दिन में पुणे की किसी कंपनी में नौकरी कर रहा है और शाम को विदेशी क्लाइंट्स के लिए फ्रीलांस प्रोजेक्ट पर काम करता हो. वहीं, वीकेंड पर ऑनलाइन कोडिंग भी सिखा सकता है. अब ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. 

अलग-अलग नौकरियों का बढ़ रहा है ट्रेंड

अब काम करने का तरीका बदल रहा है, खासकर युवाओं के लिए. आज कई लोग एक ही नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग काम करके कमाई के कई रास्ते बना रहे हैं. इससे उन्हें ज्यादा सुरक्षा मिलती है और वे अपने काम के घंटे और फील्ड खुद चुन सकते हैं. कंपनियां भी अब बदल रही हैं. पहले जहां डिग्री और स्किल पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था, अब वे काम के नतीजे पर फोकस कर रही हैं.  इससे फ्रीलांसर को बहुत फायदा मिल रहा है, क्योंकि वे आसानी से एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं. इतना ही नहीं  टेक्नोलॉजी ने भी काम को आसान बना दिया है. अब कोई भी कहीं से भी काम कर सकता है. मान लेते हैं कि जयपुर का कोई डिजाइनर विदेश की कंपनी के लिए काम कर सकता है या दिल्ली में बैठा कोई लेखक घर पर रहकर ही काम कर सकता है. यानी अब नौकरी की जगह “काम का पोर्टफोलियो” ज्यादा महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

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बदल गया है करियर का मतलब 

आज के समय में करियर का मतलब भी बदल गया है. करियर का मतलब अब केवल नौकरी करना ही नहीं है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अब फोकस लंबे समय तक एक नौकरी से हटकर आपकी स्किल और काम की वैल्यू पर आ गया है.  यानी आपने कहां और कितने समय काम किया है वह जरूरी नहीं है, आप क्या काम करते हैं और उसका रिजल्ट क्या है, वह मायने रखता है. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है.  इसमें नौकरी की स्थिरता कम होती है, यानी जॉब सिक्योरिटी की गारंटी नहीं होती. कई बार लोगों को बीमा जैसी सुविधाएं भी नहीं मिलती. साथ ही, कई काम एक साथ करने की वजह से काम के घंटे बढ़ जाते हैं और वर्क-लाइफ बैलेंस भी बिगड़ सकता है.

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