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जितनी सैलरी उतना काम! कर्मचारी के इन टिप्स ने हर किसी को कर दिया हैरान

जब आप नौकरी पहली बार करने जाते हैं तो आप में बहुत उत्साह रहता है लेकिन समय के साथ यह उत्साह खत्म हो जाता है. धीरे-धीरे आपको समझ आ जाता है कि कंपनी आपसे जितना काम करवा रही है उतना पैसा नहीं दे रही. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक यूजर ने बताया कि लगातार दो साल मेहनत और अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी न तो उनकी सैलरी बढ़ी और न ही पोस्ट.

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कम पैसा और काम ज्यादा में काम कर रहे हैं कर्मचारी. (Photo : Pexels)
कम पैसा और काम ज्यादा में काम कर रहे हैं कर्मचारी. (Photo : Pexels)

हर मेहनत का इनाम तुरंत नहीं मिलता. कुछ ऐसा ही हुआ एक कर्मचारी के साथ. रेडिट के एक यूजर ने बताया कि लगातार दो साल तक उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद उसकी न तो सैलरी बढ़ी और न ही प्रमोशन हुआ. यह पोस्ट बताती है कि क्यों कुछ कर्मचारी समय और एनर्जी बचाने के लिए चुपचाप नौकरी छोड़ने और काम में ढिलाई बरतने का सहारा ले रहे हैं. तीन साल एक ही पोस्ट पर रहने के बाद उन्होंने एक्ट्रा काम पर ध्यान देने बंद कर दिया और केवल जरूरी कामों पर ध्यान देने का फैसला किया.

पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैं लगातार दो साल से बेहतर प्रदर्शन कर रहा हूं लेकिन चाहे मैं कितना भी अच्छा प्रदर्शन करूं, वे मुझे न ही प्रमोशन देंगे और न ही मेरी सैलरी में बढ़त करेंगे. 

सफल नहीं हुए प्रयास 

पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि पहले वो अपने काम को लेकर काफी एक्टिव था. नए आइडिया देता था, खुद से पहल करता था और जितना काम मिलता था उससे भी ज्यादा करने की कोशिश करता था. लेकिन जब इतनी मेहनत के बाद भी उसे कोई खास पहचान या इनाम नहीं मिला जिससे धीरे-धीरे उसका मन टूटने लगा और उसकी मोटिवेशन कम हो गई. अब उसने अपना तरीका बदल लिया है. काम तो करता हूं लेकिन पहले जैसा जोश नहीं रहा. अगर कोई काम उसी दिन देना होता है, तो वो जानबूझकर उसे आखिरी समय में ही जमा करता है. 

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नए आइडिया देने से भी बचता हूं 

वो अब नए आइडिया देने से भी बचता है, चाहे उसे साफ दिखे कि कहां सुधार हो सकता है. उनका कहना है कि अगर मुझे कोई अच्छा मौका भी दिखे, तो मैं अब कुछ नहीं कहूंगा. पहले जो बातें उसे परेशान करती थीं, अब वो उन पर ध्यान ही नहीं देता जैसे उसने खुद को थोड़ा अलग कर लिया हो. 

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क्या होता है चुपचाप नौकरी छोड़ने का मतलब 

इसका मतलब होता है कि केवल वही काम करना जो जरूरी है. उससे ज्यादा कोशिश या ज्यादा मेहनत न करना. कर्मचारी के लिए इसका मतलब है स्पष्ट सीमाएं तय करना. वे सुबह 8 बजे से पहले होने वाली बैठकों से बचते हैं और कहते हैं कि मेरी नींद ज्यादा जरूरी है.

खींची सीमाएं

कर्मचारी ने कहा कि उनका लक्ष्य सरल है. अपने मूल काम को इतनी अच्छी तरह से करना कि वे सुरक्षित रहें लेकिन खुद को अनावश्यक रूप से तनाव में न डालें. उन्होंने आगे लिखा कि मेरा सिद्धांत यही है कि मैं अपना मुख्य काम अच्छे से करूं ताकि मुझे नौकरी से न निकाला जाए और साथ ही उन्होंने कहा कि वे अब चुपचाप नई नौकरी की तलाश करते हुए अपनी एनर्जी बचाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. 

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