देश में नया लेबर कोड लागू हो चुका है. इस बीच एक खास बदलाव हुआ है, जो हर कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है. भारत सरकार ने कर्मचारियों और कंपनियों के बीच संतुलन बनाने के लिए नए लेबर कोड्स लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. इनमें खासतौर पर वेज कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड शामिल हैं. इनका मकसद कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षा देना और नौकरी जाने की स्थिति में सहारा प्रदान करना है. मान लीजिए अगर आपकी नौकरी चली जाती है या आप छोड़ देते हैं, तो कंपनी आपको 2 दिनों के अंदर पूरा सेटलमेंट कर देगी.
अभी तक ज्यादातर नौकरी छोड़ने या निकाले जाने पर कर्मचारी को अपना बकाया पैसा 45 दिन के बाद मिलता था, जिससे उन्हें कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता था. इसी तरह हर नियम के अपने फायदे और नुकसान है लेकिन पहले समझते हैं कि ये नियम क्या है?
क्या है वेज कोड?
1 अप्रैल, 2026 से नए नियम के तहत कंपनियों को कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल केवल 2 दिनों के अंदर करना होगा. यह नियम Code On Wages, 2019 के तहत लागू किया गया है.
मिलेगा ये फायदा
हो सकता है ये नुकसान
क्या है सोशल सिक्योरिटी कोड?
सोशल सिक्योरिटी कोड भी लेबर लॉ का एक प्रमुख कानून है, जो असंगठित, संगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित सभी कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ जैसी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है. इसका उद्देश्य है सभी श्रमिकों को भविष्य की सुरक्षा देना.
मिलेगा ये फायदा
हो सकता है ये नुकसान
क्या है ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड?
इसका उद्देश्य है सभी कर्मचारियों के कामकाजी स्थानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना, कार्यस्थल में सुविधाएं और सुरक्षित परिस्थितियां बनाए रखना और साथ ही पुराने कानूनों को समेकित करना जैसे: Factories Act, Mines Act, Plantations Labour Act. कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वच्छता, पानी, टॉयलेट, रेस्ट रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं देना, खतरनाक काम और औद्योगिक दुर्घटनाओं से बचाव करना इसका मुख्य काम है.
ये है फायदा
हो सकते हैं ये नुकसान
ग्रेच्युटी के लिए 5 साल का इंतजार खत्म
अब तक के नियमों के अनुसार कर्मचारी को कंपनी की तरफ से मिलने वाली ग्रेच्युटी पांच साल काम करने के बाद दी जाती थी लेकिन नए लेबर कोड नियमों के अनुसार इसमें भी अब बड़ा बदलाव किया गया है. अब, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को 1 साल के अंदर दी जाएगी. अगर आप किसी भी कंपनी में एक साल भी काम करते हैं तो कंपनी को आपको ग्रेच्युटी देनी होगी. ग्रेच्युटी का सारा पैसा कंपनी को नौकरी छोड़ने के एक महीने के भीतर ही देना होगा.