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डिग्री धारी उठा रहे कचरा, डॉक्टर दे रहे खाने की ड‍िलीवरी... चीन की 'डू-एनीथ‍िंग' इकोनॉमी से डरी दुनिया? 

वॉल स्ट्रीट जर्नल की चेतावनी अब चीन की हकीकत बनती नजर आ रही है. यहां 20 करोड़ लोग 'गिग वर्कर' बनने को मजबूर हैं. चीन सरकार ने नई लेबर गाइडलाइंस जारी की हैं. अब सवाल यह है कि क्या दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी डूब रही है?

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Growing gig Economy in China (Rep Photo by AI)
Growing gig Economy in China (Rep Photo by AI)

चीन का आर्थिक सपना अब एक बुरे सपने में ढलता नजर आ रहा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने पहले ही 'व्हाइट कॉलर' नौकरियों के खतरे की चेतावनी दी थी, उसकी पुष्टि अब खुद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक बड़े फैसले ने कर दी है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार चीन सरकार ने हाल ही में 20 करोड़ 'गिग वर्कर्स' के लिए नए लेबर नियम जारी किए हैं, जिससे साफ है कि वहां पारंपरिक नौकरियां अब इतिहास बन रही हैं.

'डू-एनीथ‍िंग' इकोनॉमी: पढ़ाई डिग्री की, काम कचरा उठाने का!

चीन के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म 'Xianyu' पर एक हैरान करने वाला ट्रेंड दिख रहा है. इसे 'डू-एनीथिंग' (कुछ भी करो) इकोनॉमी कहा जा रहा है. यहां युवा अपनी डिग्रियों को किनारे रखकर ऐसे काम कर रहे हैं जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. 

मसलन देर रात तक लोगों से बातें करना ताकि उनके 'धोखेबाज' पार्टनर को पकड़ा जा सके. इसके अलावा दूसरों के कुत्ते टहलाना और घर का कचरा बाहर फेंकना. बच्चों को स्कूल से लाना और लोगों की 'स्टडी हैबिट्स' पर निगरानी रखना.

जब डॉक्टर बने डिलीवरी बॉय... 
यह संकट अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) और सोशल मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सम्मानित डॉक्टर और प्रोफेशनल्स की आय में 30 से 40 प्रतिशत की भारी कटौती हुई है.

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होम लोन (Mortgage) की किस्त चुकाने और परिवार पालने के लिए अब डॉक्टर्स अपनी शिफ्ट के बाद खाना डिलीवरी करने को मजबूर हैं. जो 'व्हाइट कॉलर' नौकरियां कभी चीन की आर्थिक ताकत थीं, अब वहां बोनस में देरी और सैलरी कट एक सामान्य बात हो गई है.

क्यों मजबूर हुई चीन सरकार?
चीन की शहरी वर्कफोर्स का करीब 40 प्रतिशत (20 करोड़ से ज्यादा लोग) अब फूड डिलीवरी और राइड-हेलिंग जैसे अस्थायी कामों में लगा है. चीन की टॉप लीडरशिप को डर है कि अगर इन लोगों को सुरक्षा नहीं दी गई, तो देश में बड़ा सामाजिक विद्रोह हो सकता है.

क्या भारत के लिए है चेतावनी?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चीन का यह हाल वैश्विक 'व्हाइट कॉलर' नौकरियों के अंत की शुरुआत हो सकता है. भारत जैसे देशों के लिए यह सबक है कि स्किल्स को समय रहते न बदला गया, तो डिग्री सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएगी.

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