आज के समय में ऑफिस की डेस्क पर बैठे एक कर्मचारी के लिए अप्रेजल किसी कड़े परीक्षा से कम नहीं होता. टार्गेट्स का बोझ, डेडलाइन्स का प्रेशर और बॉस के सामने अपनी बात रखने की झिझक अक्सर एक काबिल प्रोफेशनल भी अपनी मेहनत का हक मांगने में हिचकिचा जाता है. लेकिन सोचिए, जहां बड़े-बड़े दिग्गज खामोश हो जाएं, वहां एक 9 साल की बच्ची की मासूमियत गूंज उठे तो क्या होगा? हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी घटना वायरल हुई जिसने न केवल इंटरनेट का दिल पिघला दिया, बल्कि यह भी याद दिला दिया कि वर्क-लाइफ बैलेंस के पीछे एक परिवार होता है जो आपकी मेहनत को करीब से देख रहा होता है. एक छोटी सी बच्ची ने खेल-खेल में अपने पिता के बॉस को फोन लगा दिया और हक के साथ कह दिया कि अंकल मेरे पापा की सैलरी बढ़ा दो! ताकि वह अपने वादे पूरे कर सकें. इस बातचीत ने बॉस को चुप कर दिया.
कैसे शुरू हुआ?
एक बच्ची ने गलती से अपने पिता के बॉस को कॉल कर दिया. हालांकि, 9 साल की उस बच्ची को अंदाजा नहीं था कि वह किससे बात कर रही है. फोन उठा और बेटी ने हैलो कहा. सामने से रिप्लाई आया जी हां, कौन बोल रहा है? बेटी ने जवाब दिया कि ये मेरे पापा का फोन है. तब बॉस ने एक बार फिर पूछा सब ठीक है न? फोन कट करने के बजाय बॉस ने फोन पर रहने का फैसला लिया.
फिर जो हुआ वह सुनकर बॉस हैरान हो गया
एक छोटी-सी बेटी ने अपने पिता के बॉस से बहुत ही मासूमियत और विनम्रता से बात की. उसने कहा कि अगर उनके पापा की सैलरी बढ़ा दें. ताकि वह उसे दिया हुआ वादा पूरा कर पाएं. उसकी इस सच्ची और दिल से निकली बात ने बॉस को चौंका भी दिया. कुछ टाइम तक सन्नाटा छाया रहा, कोई बात नहीं हुई और फिर चुपचाप कॉल कट हो गई, जिससे बॉस पूरी तरह से हैरान रह गया.
पिता ने सुन ली सारी बात
मैनेजर को भले ही यह बात सुनकर हैरानी हुई हो, लेकिन इसका असली असर घर पर भी देखने को मिला. बेटी की सारी बात उसके पिता ने सुन ली थी. लेकिन वह इस बात पर शर्मिंदा नहीं हुआ न ही परेशान हुआ. बस थोड़ी देर चुप रहा और सोचने लगा. उस पल उसने खुद को अपनी बेटी की नजरों से देखा एक ऐसा इंसान, जिस पर उसकी बेटी पूरा भरोसा करती है. उसके लिए वह सिर्फ एक आम आदमी नहीं था बल्कि अपना वादा निभाने वाला, भरोसेमंद और एक सच्चा हीरो था. यही एहसास उसके दिल को सबसे ज्यादा छू गया.
सोशल मीडिया पर वायरल
सोशल मीडिया पर साइमन की ओर से शेयर की गई पोस्ट लोगों का दिल छू रही है. बच्चे निभाए गए वादों के माध्यम से प्यार को मापते हैं वहीं, माता-पिता ऐसे मौन दबावों को झेलते हैं जिन्हें कोई नहीं देखता और मासूमियत अक्सर उन सच्चाइयों को उजागर करती है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है.