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जर्मनी के साथ भारत की ज्यादा मिलिट्री ड्रिल होगी... सबमरीन और काउंटर-ड्रोन भी आएंगे

भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों में नई मजबूती आई. चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की 12-13 जनवरी 2026 की भारत यात्रा के दौरान संयुक्त सैन्य अभ्यास, MILAN और TARANG SHAKTI में भागीदारी, IFC-IOR में लायजन ऑफिसर, पनडुब्बी, C-UAS और यूरोड्रोन सहयोग पर सहमति बनी. डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ेगा.

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चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Photo: PTI)
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Photo: PTI)

भारत और जर्मनी के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग में बड़ा उछाल आया है. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 12-13 जनवरी 2026 को भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा की. यह यात्रा एशिया में उनकी पहली यात्रा भी है, जिसमें उन्होंने 23 बड़े जर्मन CEOs और इंडस्ट्री लीडर्स का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल साथ लिया.

इस दौरान दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सहयोग और रक्षा उद्योग में बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं- खासकर पनडुब्बी निर्माण और काउंटर-ड्रोन (C-UAS) सिस्टम.

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यह यात्रा इसलिए खास है क्योंकि 2025 में भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे हुए थे. 2026 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल मनाए जा रहे हैं. दोनों नेताओं ने सरकारी, व्यापारिक, नागरिक समाज और शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की सराहना की.

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रक्षा और सुरक्षा सहयोग के मुख्य बिंदु

दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई. नवंबर 2025 में नई दिल्ली में हुई हाई डिफेंस कमिटी मीटिंग के नतीजों का स्वागत किया गया. मुख्य बातें...

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  • संयुक्त सैन्य अभ्यास और ट्रेनिंग: दोनों देशों के बीच नियमित संयुक्त अभ्यास, ट्रेनिंग और सीनियर अधिकारियों का आदान-प्रदान बढ़ेगा. नौसेना के जहाजों के पारस्परिक पोर्ट कॉल्स भी जारी रहेंगे.
  • नई डायलॉग: एक नया ट्रैक 1.5 विदेश नीति और सुरक्षा डायलॉग शुरू होगा.
  • जर्मनी की भागीदारी: जर्मनी ने फरवरी 2026 में नौसेना अभ्यास MILAN और 9वें इंडियन ओशन नौसेना सिम्पोजियम (IONS) में हिस्सा लेने की इच्छा जताई. सितंबर 2026 में एयर कॉम्बेट एक्सरसाइज TARANG SHAKTI में भी शामिल होगा.
  • IFC-IOR में लायजन ऑफिसर: जर्मनी इंडियन ओशन रीजन के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) में अपना लियाजन ऑफिसर तैनात करेगा.
  • DRDO-OCCAR सहयोग: यूरोड्रोन MALE UAV प्रोग्राम में DRDO और OCCAR (यूरोपीय जॉइंट आर्मामेंट कोऑपरेशन) के बीच चल रहा सहयोग जारी रहेगा, जिससे भारत को एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी मिलेगी.
  • डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप: एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए, जिससे रक्षा उद्योग में लंबे समय तक सहयोग बढ़ेगा. इसमें टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन शामिल है.
  • जर्मनी की मदद: जर्मनी ने रक्षा उपकरणों के एक्सपोर्ट क्लियरेंस को तेज करने का वादा किया.
  • विशेष क्षेत्रों में सहयोग: पनडुब्बी, हेलीकॉप्टर के लिए ऑब्स्टकल अवॉइडेंस सिस्टम और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) में सहयोग बढ़ेगा. भारत की कुशल वर्कफोर्स और कम लागत + जर्मनी की हाई टेक्नोलॉजी और निवेश से मजबूत साझेदारी बनेगी.
  • ट्रेनिंग और MoU: पीसकीपिंग ट्रेनिंग पर MoU, रेसिप्रोकल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट और DRDO-BAAINBw के बीच नई डिफेंस टेक्नोलॉजी में नॉलेज एक्सचेंज पर प्रगति हुई.

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आतंकवाद पर साझा रुख

दोनों नेताओं ने सभी रूपों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़ी निंदा की, खासकर क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद की. उन्होंने पहलगाम (22 अप्रैल 2025) और दिल्ली (10 नवंबर 2025) हमलों की निंदा की. दोनों देश UN 1267 सैंक्शंस कमिटी में लिस्टेड आतंकियों और संगठनों के खिलाफ सहयोग बढ़ाएंगे. म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी की रैटिफिकेशन का स्वागत किया गया. काउंटर-टेररिज्म जॉइंट वर्किंग ग्रुप की प्रगति पर संतोष जताया.

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अन्य महत्वपूर्ण बातें

दोनों नेताओं ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सम्मान पर जोर दिया. व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्किलिंग, ग्रीन एनर्जी और पीपल-टू-पीपल टाइज में सहयोग बढ़ेगा. यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में श्रद्धांजलि दी. इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में भाग लिया, जो सांस्कृतिक संबंधों को दिखाता है.

यह यात्रा भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले गई है. रक्षा क्षेत्र में को-प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से भारत आत्मनिर्भर बनेगा. इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा मजबूत होगी. जर्मनी भारत को रूस पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा. दोनों देशों के बीच यह लिमिटलेस पार्टनरशिप का नया दौर है.

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