ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) दुनिया की सबसे चर्चित और विवादास्पद सैन्य ताकतों में से एक है. यह ईरान की सामान्य सेना (आरतेश) से अलग है. सीधे सुप्रीम लीडर के आदेश पर काम करती है. IRGC को स्पाह या पासदारान भी कहा जाता है.
यह न सिर्फ ईरान की सुरक्षा करती है, बल्कि विदेशों में ईरान के हितों को बढ़ावा देने और दुश्मनों से लड़ने में भी मुख्य भूमिका निभाती है. लेकिन सवाल यह है कि यह कितनी ताकतवर है? इसके पास कौन-कौन से हथियार और मिसाइलें हैं? क्या यह अमेरिकी सेना के हमले को झेल सकती है?
रॉयटर्स, ISW (इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर) और क्रिटिकल थ्रेट्स के अनुसार जून 2025 में इजराइल और अमेरिका के साथ हुई 12 दिनों की जंग के बाद IRGC ने अपनी ताकत को फिर से मजबूत किया है, लेकिन इसमें कई कमजोरियां भी हैं.
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IRGC की ताकत क्या है?
IRGC ईरान की सबसे बड़ी और प्रभावशाली सैन्य शक्ति है. इसमें करीब 2 लाख सैनिक हैं, जिसमें ग्राउंड फोर्स, नेवी, एयरोस्पेस फोर्स (मिसाइल और ड्रोन), कुद्स फोर्स (विदेशी ऑपरेशन) और बसीज मिलिशिया (लोकल लड़ाके) शामिल हैं. यह ईरान की क्रांति की रक्षा करती है. क्षेत्रीय गुटों जैसे हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराकी मिलिशिया को समर्थन देती है.
2025 की जंग में IRGC को बड़ा नुकसान हुआ. कई बड़े कमांडर मारे गए. मिसाइल फैक्टरी और न्यूक्लियर साइट्स पर हमले हुए. जनवरी 2026 तक IRGC ने दावा किया है कि वह पीक रेडीनेस पर है. मिसाइल स्टॉक फिर से बढ़ाया गया है.
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ईरान के पास मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल स्टॉक है - करीब 2000 से 3000 मिसाइलें. लेकिन पारंपरिक जंग में यह अमेरिका से कमजोर है. इसकी ताकत एसिमेट्रिक वॉरफेयर में है यानी छिपकर हमला करना, जैसे ड्रोन या प्रॉक्सी गुटों से.
अभी ईरान में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. IRGC इनको दबाने में लगी है. रूस से हेलिकॉप्टर और वाहन लेकर मदद ली जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों की मदद की बात की है, जिससे तनाव बढ़ा है.

IRGC के पास कौन-कौन से हथियार और मिसाइलें हैं?
IRGC की एयरोस्पेस फोर्स मिसाइलों का मुख्य संचालन करती है. 2025 की जंग के बाद उत्पादन बढ़ाया गया. मुख्य हथियार इस प्रकार हैं...
कुल मिलाकर, IRGC के पास हजारों मिसाइलें हैं. 2025 की जंग में 300 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं, लेकिन कई रोकी गईं. अब स्टॉक फिर से बनाया जा रहा है.

क्या IRGC अमेरिकी सेना का हमला झेल सकती है?
पूरी तरह से नहीं. अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर है. उसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर, स्टील्थ बॉम्बर (B-2, B-21), F-35 फाइटर जेट, टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हैं. 2025 की जंग में इजरायल (अमेरिकी मदद से) ने IRGC के कमांड स्ट्रक्चर, मिसाइल लॉन्चर और न्यूक्लियर साइट्स को नुकसान पहुंचाया. अमेरिका अगर हमला करे, तो IRGC के बड़े हिस्से को जल्दी नष्ट कर सकता है - बिना जमीन पर उतरे.
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IRGC की ताकत ...
लेकिन पूर्ण युद्ध में IRGC लंबे समय तक नहीं टिक सकती. अमेरिका टारगेटेड हमलों से IRGC को कमजोर कर सकता है, लेकिन ईरान जवाबी हमलों से क्षेत्र में अशांति फैला सकता है. ईरान की रणनीति जीतने की नहीं, बल्कि बचने और दुश्मन को नुकसान पहुंचाने की है. अभी प्रदर्शनों से IRGC की ताकत कम हो रही है.

अमेरिकी मिसाइलों को रोकने के लिए डिफेंस सिस्टम?
IRGC के पास कुछ एयर डिफेंस हैं, लेकिन अमेरिकी एडवांस्ड मिसाइलों (टोमाहॉक, स्टील्थ क्रूज) के सामने ये कमजोर हैं. मुख्य सिस्टम...
ये सिस्टम कुछ मिसाइलें रोक सकते हैं, लेकिन अमेरिकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी, बहुत सारी मिसाइलों के एकसाथ हमले (सैचुरेशन अटैक) और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से हार जाते हैं. 2025 की जंग में ईरान का डिफेंस फेल हो गया था. अमेरिका अगर हमला करे, तो ईरान की डिफेंस बहुत सीमित साबित होगी. ईरान अब चीन से HQ-9B और रूस से S-400 ले रहा है, लेकिन ये भी पूरी सुरक्षा नहीं दे सकते.

क्या होगा आगे?
IRGC क्षेत्रीय डराने-धमकाने और छिपे हमलों में ताकतवर है, लेकिन सीधे अमेरिकी हमले में कमजोर पड़ जाएगा. 2025 की जंग से सबक लेकर ईरान मिसाइल उत्पादन बढ़ा रहा है, लेकिन आर्थिक संकट और प्रदर्शनों से दबाव है. ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले की सोच रहा है, लेकिन ईरान जवाब देने की धमकी दे रहा है.
अगर युद्ध हुआ, तो मिडिल ईस्ट में बड़ा संकट आ सकता है - तेल की कीमतें बढ़ेंगी और लाखों लोग प्रभावित होंगे. ईरान कहता है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर हमला हुआ तो जवाब देगा. दुनिया की नजरें अब ट्रंप के फैसले पर हैं. क्या शांति बनेगी या नया युद्ध छिड़ेगा?