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अमेरिका से जल्द भारत लाया जाएगा मुंबई हमले में शामिल आतंकी तहव्वुर राणा

लश्कर आतंकी तहव्वुर राणा को इस मामले में 14 साल की सजा सुनाई गई थी. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक उसे दिसंबर, 2021 में रिहा किया जाएगा.

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मुंबई का ताज होटल (फोटो- PTI)
मुंबई का ताज होटल (फोटो- PTI)

मुंबई हमले की साजिश रचने के मामले में अमेरिका की जेल में 14 साल की सजा काट रहे आतंकी तहव्वुर राणा को जल्द ही भारत लाया जा सकता है. भारत सरकार ने आतंकी राणा के प्रत्यर्पण के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई को पूरा कर लिया है और अब ट्रंप प्रशासन के सहयोग से पाकिस्तानी कनाडाई नागरिक को भारत लाया जा सकता है. इस आतंकी की सजा दिसंबर, 2021 में पूरी हो रही है.

साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले की साजिश के मामले में राणा को 2009 में गिरफ्तार किया गया था. पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के 10 आतंकियों की तरफ से किए इस हमले में अमेरिकी नागरिकों सहित करीब 166 लोगों की जान गई थी. सुरक्षाबलों ने 9 आतंकियों को मौके पर मार गिराया था और जिंदा गिरफ्तार किए गए आतंकी अजमल कसाब को बाद में फांसी दी गई थी.

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लश्कर आतंकी तहव्वुर राणा को इस मामले में 14 साल की सजा सुनाई गई थी. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक उसे दिसंबर, 2021 में रिहा किया जाएगा. मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने एजेंसी भाषा से कहा, ‘यहां सजा पूरी होने पर राणा को भारत भेजे जाने की प्रबल संभावना है.’ सूत्र ने कहा कि इस दौरान जरूरी कागजी कार्रवाई और जटिल प्रक्रिया को पूरा करना एक चुनौती है.

भारत के विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और अमेरिकी विदेश मंत्रालय, न्याय मंत्रालय सभी की अपनी-अपनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया है. उसने कहा कि जब प्रत्यर्पण की बात आती है तो वे अपनी प्रक्रिया को न धीमा करना चाहते हैं और न ही तेज करना चाहते हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) प्रक्रिया की समय-सीमा और नौकरशाही संबंधी औपचारिकताओं को कम करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों से सीधे संपर्क कर सकती है.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत करेगा, आतंकवाद विरोधी सहयोग को बढ़ावा देगा और भारतीयों के बीच अमेरिका की छवि को बेहतर बनाने का भी काम करेगी. ट्रंप प्रशासन ने नवंबर 2018 को 26/11 की 10वीं बरसी पर हमले में शामिल लोगों को न्याय के दायरे में लाने का अपना संकल्प दोहराया था. अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के दौरान भी इस मामले को उठाया था.

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अमेरिका में आंशिक रूप से ठप पड़े सरकारी कामकाज का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय ने राणा के प्रत्यर्पण के सवाल पर प्रतिक्रिया देने में अपनी असमर्थता जाहिर की है. भारतीय दूतावास और तहव्वुर राणा के वकील ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

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