महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) यूनिट में कथित धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले में नई कानूनी हलचल सामने आई है. मामले की आरोपी महिला कर्मचारी निदा खान ने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है. इस अर्जी पर नासिक की सत्र अदालत सोमवार को सुनवाई करेगी.
दूसरी ओर मामले में गिरफ्तार दो मुख्य आरोपियों रजा मेमन (35) और शफी शेख (36) को अदालत ने 20 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि मामले में कई अहम गवाहों की पहचान, पूछताछ और साक्ष्य जुटाने का काम अभी बाकी है.
वकील ने आरोपों से किया इनकार
निदा खान के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल पर लगी धाराएं सात साल से कम सजा वाली हैं और उन पर अन्य महिलाओं की अस्मिता भंग करने का आरोप भी लागू नहीं होता. वहीं, नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, खान के खिलाफ केवल धार्मिक उत्पीड़न का एक मामला दर्ज है.
पुलिस जांच में नए खुलासे, आरोपी फरार
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक महिला HR मैनेजर भी शामिल है. हालांकि, निदा खान अभी फरार बताई जा रही है. उनकी तलाश में क्राइम ब्रांच की टीम ठाणे के मुंब्रा इलाके में डेरा डाले हुए है. पुलिस ने उनके पति से भी पूछताछ की है, लेकिन अब तक उनका ठिकाना स्पष्ट नहीं हो सका है.
जबरन नजदीकी बढ़ाई, अश्लील हरकतें की
रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने महिला कर्मचारी से बार-बार निजी जीवन पर बातचीत कर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया. शफी शेख ने कथित तौर पर पीड़िता को लव प्रपोजल दिया, जबकि रजा मेमन ने उसके शरीर को लेकर अश्लील टिप्पणियां कीं और उसके साथ छेड़छाड़ की. इन हरकतों से पीड़िता की अस्मिता को ठेस पहुंची और वह मानसिक रूप से प्रताड़ित हुई.
मोबाइल फोन की जांच से मिलेगा डिजिटल साक्ष्य
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनकी तकनीकी जांच बेहद जरूरी है. इसी आधार पर पुलिस ने अदालत से हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, ताकि डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा सकें और पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके.
कई मामलों की जांच कर रही एसआईटी
इस पूरे प्रकरण में कुल नौ मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें जबरन धर्मांतरण की कोशिश, धार्मिक भावनाएं आहत करने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है, जो सभी पहलुओं की गहन जांच कर रहा है.
TCS ने दिया बयान, 'शून्य सहनशीलता नीति' लागू
टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि निदा खान HR मैनेजर नहीं, बल्कि एक प्रोसेस एसोसिएट हैं और उन्होंने कभी नेतृत्व की भूमिका नहीं निभाई. कंपनी ने यह भी कहा कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती है.
कंपनी के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन ने इस मामले को गंभीर और पीड़ादायक बताते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए आंतरिक जांच जारी है. हालांकि, कंपनी ने यह भी दावा किया है कि उसे अपने आंतरिक तंत्र या POSH चैनलों के माध्यम से इस तरह की कोई शिकायत पहले नहीं मिली थी. मामले में पुलिस और कंपनी दोनों स्तर पर जांच जारी है, और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है.