बिहार के मोतिहारी शेल्टर होम से लापता हुईं चार लड़कियों में से एक को बरामद कर लिया है. अभी भी तीन लापता हैं. इनकी तलाश की जा रही है. बीते दिनों बिहार के कई शेल्टर होम खासे चर्चा में रहे. कुछ शेल्टर होम्स में लड़कियों के लापता होने और उनके साथ यौन शोषण के मामले सामने आए थे.
शेल्टर होम्स में लड़कियों के लापता और यौन शोषण होने की खबरों पर बिहार सरकार की खूब किरकिरी हुई थी. इन शेल्टर होम्स में सबसे बड़ी धांधली मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में हुई थी. यहां कई लड़कियों का यौन शोषण हुआ था, साथ ही कुछ लड़कियां शेल्टर होम से गायब मिली थीं.
पिछले साल मुजफ्फरपुर शेल्टर होम का मामला उजागर होने पर पूरे देश का ध्यान इस ओर गया था. वह मामला भी टीआईएसएस की रिपोर्ट आने पर उजागर हुआ था, जिसमें एक एनजीओ द्वारा संचालित शेल्टर होम में लड़कियों का यौन-उत्पीड़न किए जाने की बात सामने आई थी.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस के मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर की 12 संपत्तियों को सीज कर लिया था. ईडी ने एक होटल और आरडी पैलेस को भी सीज किया था, जिसका मालिकाना हक ब्रजेश ठाकुर के पास है.Bihar: Four girls went missing from a shelter home in Motihari yesterday; One girl found, search underway for the three missing girls
— ANI (@ANI)
क्या था मामला?
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम का संचालन ब्रजेश ठाकुर द्वारा किया जा रहा था. इस शेल्टर होम में लड़कियों का कथित यौन शोषण किया गया. मामले में ठाकुर समेत 11 लोगों के खिलाफ 31 मई को मामला दर्ज किया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में यौन उत्पीड़न की पीड़ित आठ लड़कियों को वापस उनके परिवार के पास भेजने का आदेश भी दिया था. जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार को प्रक्रिया के अनुसार मुजावजा देने और पीड़ितों की पूरी सहायता-चिकित्सा, शैक्षणिक, वित्तीय और विकास की देखरेख करने का भी आदेश दिया था और इस
पुनर्वास योजना पर सुप्रीम कोर्ट का जोर
कथित यौन और शारीरिक उत्पीड़न के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा आरोपित 21 आरोपियों का ट्रायल दिल्ली की एक अदालत में चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने टाटा इंस्टीट्यूट फॉर सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की फील्ड कार्य परियोजना 'कोशिश' द्वारा लड़कियों को वापस उनके परिवार के पास भेजने के संबंध में सौंपी गई रिपोर्ट के बाद यह फैसला दिया था.
कोशिश ने अपनी रिपोर्ट बंद लिफाफे में सौंपी थी जिसमें इस बात की पुष्टि की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में कोशिश को लड़कियों के पुनर्वासन की योजना तैयार करने की अनुमति दी थी जिसमें उन्हें उनके परिवार से मिलाने की बात भी शामिल थी.