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बिहार: यूनिवर्सिटी की जमीन के मुआवजे में घपला, पैसे ठिकाने लगाते समय हुआ हादसा

बिहार में कार और टैक्टर ट्रॉली के बीच हुई  दुर्घटना ने करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले के मामले की पोल खोल दी है. ममला मोतिहारी के महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के जमीन अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार में एक सड़क दुर्घटना ने एक बड़े घपले को उजागर कर दिया. कार और टैक्टर ट्रॉली के बीच हुई इस दुर्घटना ने करोड़ों रुपये के जमीन के मामले की पोल खोल दी है.

मामला बिहार के मोतिहारी के महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के जमीन अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है. इस पूरे गोरखधंधे में जमीन किसी की थी और मुआवजा कोई और ले उड़ा. मामला जब सामने आया तो घपलेबाज करोड़ों रुपये लेकर उसे ठिकाने लगाने जा रहे थे, लेकिन तभी उनका एक्सीडेंट हो गया.

बिहार के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने पत्र लिखकर इसकी शिकायत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की थी. मंत्री का कहना है कि इस घोटाले में जितने भी अधिकारी है उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.

कार पूर्वी चंपारण जिले के जय किशुन तिवारी की है. इस कार से 1 करोड़ 31 लाख रुपये बरामद हुए हैं. रुपये को गिनने के लिए मशीन का इस्तेमाल किया गया. जांच में मालूम पड़ा कि यह रकम फर्जी तरीके से जमीन अधिग्रहण के एवज में हासिल की गई है.

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इस मामले में बिहार के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर बताया था कि मोतिहारी में बन रहे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए किए जा रहे जमीन अधिग्रहण में भारी पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है. जमीन किसी और की है और पैसे किसी और को मिल रहे हैं.

बता दें कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्विद्यालय के लिए जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है. इसमें सुखदेव भगत की 90 डिसमिल जमीन अधिग्रहित की गई है, लेकिन जमीन का मुआवजा उन्हें नहीं मिला.

फर्जी कागजात बनाकर मुआवजे का सारा पैसा करीब 3 करोड़ रुपये किसी और ने ले लिए. इसकी शिकायत जब मंत्री से की गई तब इसकी जांच शुरू हुई. मामले में भूमि अर्जन अधिकारी ने तीन एफआईआर दर्ज किए थे.

एफआईआर दर्ज होने के बाद घपलेबाजों में हड़कंप मचा और वो रुपये को ठिकाने लगाने के इरादे से उसे कहीं ले जा रहे थे, तभी कार दर्घटनाग्रस्त हो गई. मोतिहारी के डीएम रमन कुमार का कहना है कि इस मामले की जांच के लिए एक टीम बना दी गई है और जो भी दोषी होगा उन पर कार्रवाई होगी.

बताया जा रहा है कि कार जब दुर्घटनाग्रस्त हुई तो उसमें सवार दो अभियुक्त जय किशुन तिवारी और अरविंद सिंह चोट लगने के बावजूद काफी समय तक कार के पास मौजूद थे.

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मंत्री प्रमोद कुमार का कहना है कि उस फाइल पर जिस भी अफसर ने हस्ताक्षर किए हैं उन सबके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि बिना के मिलीभगत के इतने बड़े घपले को अंजाम नहीं दिया जा सकता है.

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