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IPC Section 89: किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से किए गए कार्य से जुड़ी है आईपीसी धारा 89

आईपीसी (IPC) की धारा 89 (Section 89) में किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य परिभाषित किया गया है. आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 89 इस बारे में क्या बताती है?

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किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य इस धारा के अधीन है किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य इस धारा के अधीन है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जानिए आईपीसी की धारा 89 के बारे में सबकुछ
  • अंग्रेजी शासनकाल में लागू हुई थी आईपीसी
  • 1860 में बनी थी आईपीसी

भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धाराएं (Sections) कानूनी प्रक्रिया और उनसे संबंधित पदों को परिभाषित करती हैं. साथ ही उनके बारे में जानकारी देती हैं. ऐसे ही आईपीसी (IPC) की धारा 89 (Section 89) में किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य परिभाषित किया गया है. आइए जानते हैं कि आईपीसी की धारा 89 इस बारे में क्या बताती है?

आईपीसी की धारा 89 (Indian Penal Code Section 89)
भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 89 (Section 89) में बताया गया है कि किसी व्यक्ति के फायदे (Benefits of person) के लिए सम्मति (Consent) से सद्भावपूर्वक (In good faith) किया गया कार्य, जिससे मृत्यु कारित (Cause of death) करने का आशय नहीं है. IPC की धारा 89 के अनुसार, कोई बात, जो मृत्यु कारित करने के आशय से न की गई हो, किसी ऐसी अपहानि (Harm) के कारण अपराध (Offense) नहीं है जो उस बात से किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके फायदे के लिए वह बात सद्भावपूर्वक की जाए और जिसने उस अपहानि को सहने, या उस अपहानि की जोखिम उठाने के लिए (To take risks) चाहे अभिव्यक्त, चाहे विवक्षित (Implied) सम्मति दे दी हो, कारित हो या कारित करने का कर्ता का आशय हो या कारित होने की संभाव्यता (feasibility) कर्ता को ज्ञात है.

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क्या होती है आईपीसी (IPC)
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक (Citizen) द्वारा किये गये कुछ अपराधों (certain offenses) की परिभाषा (Definition) और दंड (Punishment) का प्रावधान (Provision) करती है. आपको बता दें कि यह भारत की सेना (Indian Army) पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी (IPC) जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी.

अंग्रेजों ने लागू की थी IPC
ब्रिटिश कालीन भारत (British India) के पहले कानून आयोग (law commission) की सिफारिश (Recommendation) पर आईपीसी (IPC) 1860 में अस्तित्व में आई. और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के तौर पर 1862 में लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले (Lord Macaulay) ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं.

 

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