पंजाब में संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ मुख्यमंत्री भगवंत मान की 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' का असर दिखने लगा है. अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने वल्टोहा के पूर्व सरपंच झरमल सिंह की हत्या का खुलासा करते हुए प्रभ दासूवाल गैंग के 7 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है. इनमें वे दो शूटर भी शामिल हैं जिन्होंने वारदात को अंजाम दिया था.
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि राज्य में हिंसा फैलाने वाले अपराधी जहन्नुम में भी नहीं छिप पाएंगे. पुलिस की जांच में सामने आया कि हत्या के बाद दोनों शूटर सुखराज सिंह उर्फ गूंगा और करमजीत सिंह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहे थे. वे महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार और छत्तीसगढ़ में पहचान छिपे थे.
आरोपी फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे. हालांकि, पंजाब पुलिस ने सेंट्रल एजेंसियों और छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ तालमेल बिठाकर उन्हें रायपुर से दबोच लिया. इस हत्याकांड का असली सूत्रधार गैंगस्टर प्रभ दासूवाल है. उसकी पूर्व सरपंच झरमल सिंह के साथ पुरानी रंजिश थी और वह पहले भी उन पर हमला कर चुका था.
पुलिस की जांच में पता चला कि यह एक पूरी तरह से 'टारगेटेड किलिंग' थी. पुलिस ने इस मामले में तरनतारन और मोहाली के अलग-अलग इलाकों से 5 अन्य मददगारों को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने शूटरों को लॉजिस्टिक्स, हथियार और मोटरसाइकिल मुहैया कराई थी. इन सभी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है.
आरोपियों की पहचान सुखराज सिंह गूंगा (20), करमजीत सिंह (23), जोबनप्रीत सिंह (19), हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी (27), जोबनप्रीत सिंह (20), कुलविंदर सिंह (20) और अरमानदीप सिंह (18) के रूप में हुई है. सुखराज का पहले से ही आपराधिक रिकॉर्ड है. वह एक अन्य सरपंच मर्डर केस में भी नामजद रहा है. शूटर और सपोर्टर एक-दूसरे को नहीं जानते थे.
सभी आरोपी गैंगस्टर प्रभ दासूवाल के इशारे पर काम कर रहे थे. डीजीपी ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान की सफलता के बाद अब पंजाब सरकार संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक जंग शुरू करने वाली है. पुलिस का अगला फोकस विदेशों में छिपे उन अपराधियों को वापस लाना है जो पंजाब की शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं.