पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित जासूसी साजिश के मामले में एक स्पेशल NIA कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. विशाखापत्तनम स्थित NIA की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी अल्ताफहुसैन घांचीभाई उर्फ शकील को दोषी ठहराते हुए कुल 5.5 साल की जेल की सजा सुनाई है. आरोपी पर भारतीय SIM कार्ड और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के ज़रिए जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप था.
जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने ट्रायल के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया था. प्रॉसिक्यूशन ने अदालत में 37 गवाहों से पूछताछ की थी, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ आरोप साबित हुए. अदालत ने SIM कार्ड, OTP और यूनिक पहचान फीचर्स के दुरुपयोग को देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना. आरोपी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 के तहत दोषी है.
इसके तहत उसे पांच साल और छह महीने की साधारण कैद के साथ 5000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है. वहीं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C के तहत उसे दो साल और छह महीने की साधारण कैद और 5000 रुपए का जुर्माना सुनाया गया है. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, जिससे कुल सजा 5.5 साल की होगी. यह मामला सीमा पार जासूसी साजिश से जुड़ा हुआ था.
NIA के अनुसार, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान पाकिस्तानी नौसेना द्वारा गिरफ्तार किए गए भारतीय मछुआरों के मोबाइल फोन और SIM कार्ड ज़ब्त कर लिए गए थे. इसके बाद में इन SIM कार्ड को आरोपी ने भारत में सक्रिय किया. जांच में सामने आया कि आरोपी ने भारतीय SIM कार्ड अपने मोबाइल फोन में डालकर OTP जेनरेट किए और उन्हें पाकिस्तान के साथ साझा किया.
इसके ज़रिए पाकिस्तान से भारतीय WhatsApp नंबर ऑपरेट किए गए. इन नंबरों का इस्तेमाल नकली पहचान के तहत भारतीय सुरक्षा कर्मियों से संपर्क करने के लिए किया गया. मकसद संवेदनशील और प्रतिबंधित रक्षा संबंधी जानकारी हासिल करना था, जिससे भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को गंभीर खतरा पैदा हुआ. जांच में आरोपी की भूमिका पूरी तरह साबित हो चुकी है.