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सोशल मीडिया ट्रायल: कोझिकोड में वायरल वीडियो के बाद 42 साल के दीपक की संदिग्ध मौत

केरल के कोझिकोड में लोकल यात्री बस का एक वीडियो वायरल होने के बाद 42 साल के दीपक की मौत ने सोशल मीडिया ट्रायल के खतरनाक असर को उजागर किया है, जो सभी के लिए एक सबक है. अब पुलिस इस केस में सभी पहलुओं की जांच कर रही है.

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दीपक की मौत के बाद इस मामले पर बहस छिड़ गई है (फोटो-ITG)
दीपक की मौत के बाद इस मामले पर बहस छिड़ गई है (फोटो-ITG)

केरल के कोझिकोड से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया के असर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहां 42 वर्षीय दीपक ने आत्महत्या कर ली. आरोप है कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में आ गया था. दीपक की लाश उसके घर में फंदे से लटकी मिली. घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और यह मामला चर्चा का विषय बन गया. पुलिस ने इसे अस्वाभाविक मौत मानते हुए जांच शुरू कर दी है.

बस में कथित छेड़छाड़ का वीडियो वायरल
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब एक महिला ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया. महिला का दावा था कि भीड़भाड़ वाली बस में दीपक ने उसके साथ गलत व्यवहार किया. वीडियो में दिखाया गया कि दीपक की कोहनी महिला के शरीर से टकरा रही है, जिसे उसने छेड़छाड़ बताया. यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी. सोशल मीडिया पर दीपक को दोषी ठहराते हुए तीखे कमेंट लिखे गए.

सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं
वायरल वीडियो के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बहस छिड़ गई. कुछ लोगों ने इसे सीधे तौर पर यौन उत्पीड़न करार दिया, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि बस में भारी भीड़ होने के कारण यह अनजाने में हुआ संपर्क भी हो सकता है. बावजूद इसके, सोशल मीडिया पर ट्रायल जैसा माहौल बन गया. बिना किसी जांच या पुलिस कार्रवाई के, दीपक को सार्वजनिक रूप से दोषी ठहराया जाने लगा. यही डिजिटल दबाव धीरे-धीरे उस पर भारी पड़ता चला गया.

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परिवार का दावा, निर्दोष था दीपक
दीपक के परिवार ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है. परिजनों का कहना है कि बस में अत्यधिक भीड़ थी और संपर्क पूरी तरह से अनजाने में हुआ. परिवार के मुताबिक, वायरल वीडियो और आरोपों से दीपक बेहद आहत था. वह लगातार कह रहा था कि उसने कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन लोग उसकी बात सुनने को तैयार नहीं थे. परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया पर हुई बदनामी ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था.

ऐसे उठाया खौफनाक कदम
परिजनों के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद दीपक गहरे अवसाद में चला गया था. वह घर में चुप-चुप रहने लगा और खुद को दोषी साबित किए जाने से टूट गया था. परिवार का कहना है कि उस पर समाज और इंटरनेट दोनों का भारी दबाव था. आखिरकार, इसी मानसिक पीड़ा के चलते उसने कथित तौर पर आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठा लिया. उसकी मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है.

दीपक की मौत के बाद वीडियो डिलीट
दीपक की मौत के बाद महिला ने वह पहला वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया. फिलहाल वह वीडियो ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है. बताया जा रहा है कि वीडियो डिलीट किए जाने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ. दीपक की मौत के बाद सवाल उठने लगे कि क्या सोशल मीडिया पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी नहीं थी. यह पहलू अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है.

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महिला पर साइबर अटैक
दीपक की मौत के बाद सोशल मीडिया का रुख पलट गया. इस बार महिला को निशाना बनाया जाने लगा. महिला के खिलाफ जबरदस्त साइबर बुलिंग और ऑनलाइन हमले शुरू हो गए. उसे ट्रोल किया गया और कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं. यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया कि सोशल मीडिया पर किसी भी पक्ष को बख्शा नहीं जाता और भीड़ का गुस्सा कभी भी दिशा बदल सकता है.

पुलिस ने दर्ज किया मामला
कोझिकोड पुलिस ने दीपक की मौत के मामले में अस्वाभाविक मौत का केस दर्ज किया है. पुलिस का कहना है कि वे हर पहलू से मामले की जांच कर रहे हैं. वायरल वीडियो की सत्यता, बस की स्थिति, भीड़ का स्तर और आत्महत्या के पीछे की मानसिक वजहों की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी देख रही है कि सोशल मीडिया दबाव की इसमें कितनी भूमिका रही.

सोशल मीडिया ट्रायल पर सवाल
यह घटना एक बार फिर सोशल मीडिया ट्रायल के खतरों को उजागर करती है. बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी को दोषी ठहराना उसकी जिंदगी और प्रतिष्ठा दोनों को बर्बाद कर सकता है. इस मामले में सोशल मीडिया जज, जूरी और जल्लाद बनता नजर आया. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी और भावनात्मक प्रतिक्रिया के परिणाम घातक हो सकते हैं.

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समाज के लिए बड़ा सबक
फिलहाल केरल पुलिस की जांच जारी है और सच्चाई सामने आने का इंतजार किया जा रहा है. यह मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं. कानून का रास्ता छोड़कर डिजिटल भीड़ के भरोसे न्याय करना किसी की जान तक ले सकता है. दीपक की मौत ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता कितनी जरूरी है.

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