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CITU प्रेसिडेंट मर्डर केस में मुख्य आरोपी अरेस्ट, 21 साल तक दिल्ली पुलिस को देता रहा चकमा

गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी अंजनी कुमार आवासीय पता लगातार बदलता था. वह कभी भी अपनी वास्तविक पहचान का खुलासा नहीं करता था. हालांकि उसकी यह चालबाजी ज्यादा दिन तक नहीं चली.

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दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में अंजनी सिंह
दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में अंजनी सिंह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली पुलिस को CITU प्रेसिडेंट मर्डर केस में बड़ी कामयाबी
  • 21 साल से फरार आरोपी को पुलिस ने जाल बिछाकर दबोचा

दिल्ली पुलिस ने सीटू अध्यक्ष राजेंद्र सिंह मर्डर केस में पिछले 21 साल से कत्ल करके फरार आरोपी अंजनी कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. 12 मार्च, 2001 को 48 वर्षीय अंजनी सिंह का समूह 4 के सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) संघ के सदस्यों के साथ झगड़ा हो गया था. इसके बाद अंजनी और उसके साथियों ने संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह और गार्ड अनिल पर हमला कर दिया. आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों को बेरहमी से पीटा. मारपीट में राजेंद्र सिंह की मौत हो गई. घटना के बाद अंजनी कुमार मौके से फरार हो गया था.

दिल्ली पुलिस तभी से आरोपी को खोज रही थी. कई वर्षों की मशक्कत के बाद दिल्ली पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए खबर मिली कि 21 साल से फरार अंजनी सिंह जैतपुर इलाके में छिपकर रह रहा है. इस दौरान आरोपी एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था. सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस की टीम जैतपुर, बदरपुर रवाना कर दी गई. जहां पता चला कि अंजनी कुमार प्लॉट नंबर 15, ओखला इंडस्ट्रीज एरिया में मौजूद है. पुलिस ने वहां जाल बिछाया और बुधवार (19 जुलाई) शाम उसे गिरफ्तार कर लिया.

इस मामले में शिवाजी पांडे, मधुरेंद्र सिंह, सुनील कुमार, राजकुमार और जय प्रकाश यादव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. अंजनी सहित इस अपराध में शामिल सात आरोपियों को कोर्ट ने उद्घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित किया था. 

साल 2001 में यूनियन गार्डों के वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर अधिकारियों के साथ दोनों यूनियन की एक बैठक बुलाई गई थी. मीटिंग के दौरान अंजनी सिंह की अपने यूनियन अध्यक्ष एम के सिंह और सीटू यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह के साथ बहस हो गई. बाद में अंजनी सिंह ने राजेंद्र सिंह और गार्ड अनिल पर साथियों के साथ मिलकर अटैक कर दिया. इस मारपीट में राजेंद्र सिंह की जान चली गई.

गिरफ्तारी से बचने के लिए अंजनी कुमार मौके से फरार हो गया. वह समस्तीपुर (बिहार) गया और सुरक्षा गार्ड के रूप में अपना आवासीय पता लगातार बदलता रहा. वह कभी भी वास्तविक पहचान का खुलासा नहीं करता था. इसके बाद, वह सौरभ विहार, जैतपुर (बदरपुर) आ गया और सुरक्षा गार्ड के रूप में नौकरी करने लगा. अब दिल्ली पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया है.

 

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