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बॉयज लॉकर रूम केसः आईटी एक्ट की इन धाराओं के तहत हो रही है कार्रवाई

जुर्म की दुनिया में अपराधी हमेशा कानून को गुमराह करने के लिए नए-नए तरीके ईजाद करते हैं. आए दिन उनके कारनामे खबरों की सुर्खियां बनते हैं. ऐसे कुछ अपराध आईटी एक्ट के तहत दर्ज होते हैं.

इस मामले में पुलिस ने ग्रुप एडमिन समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है (सांकेतिक चित्र) इस मामले में पुलिस ने ग्रुप एडमिन समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है (सांकेतिक चित्र)

  • इंस्टाग्राम पर ग्रुप बनाकर रच रहे थे खौफनाक साजिश
  • ग्रुप से जुड़े थे अलग-अलग स्कूलों के छात्र-छात्राएं
  • पुलिस ने आईटी एक्ट के तहत शुरू की जांच

इंस्टाग्राम पर चैट ग्रुप बनाकर अश्लील बातें करने वाले बॉयज लॉकर रूम के एडमिन और एक नाबालिग आरोपी को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार किए गए एडमिन से लगातार पूछताछ की जा रही है. इस दौरान उसने ग्रुप के अन्य सदस्यों के नाम का भी खुलासा भी किया है. इस ग्रुप के सदस्य नाबालिग लड़कियों की अश्लील तस्वीरें साझा करने के साथ-साथ और गैंगरेप करने की बातें किया करते थे. अब पुलिस इस ग्रुप के लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है.

बॉयज लॉकर रूम का एडमिन 12वीं कक्षा का एक छात्र है. वह बालिग है. आरोपी एनसीआर के ही एक स्कूल का छात्र है. बॉयज लॉकर रूम के 27 सदस्यों की पहचान कर ली गई. अभी सदस्यों से एक-एक कर पूछताछ की जा रही है. सभी के फोन भी सीज किए जा चुके हैं. इस मामले की जांच करने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है. बता दें कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 4 मई को आईटी एक्ट और आईपीसी की धाराओं के तहत एक एफआईआर दर्ज की थी.

क्या होता है आईटी एक्ट

जुर्म की दुनिया में अपराधी हमेशा कानून को गुमराह करने के लिए नए-नए तरीके ईजाद करते हैं. आए दिन उनके कारनामे खबरों की सुर्खियां बनते हैं. ऐसे कुछ अपराध आईटी एक्ट के तहत दर्ज होते हैं. इस तरह के अपराधों को अलग अलग महफूज जगहों पर बैठकर आसानी से अंजाम दिया जाता है. पुलिस अपराध की गंभीरता को देखते हुए आईटी एक्ट के साथ-साथ आईपीसी की धाराएं भी लगाती है. ऐसे में दोषी पाए जाने पर आरोपी को मामूली जुर्माने से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. बॉयज लॉकर रूम मामले में पुलिस मे आईटी एक्ट के साथ आईपीसी की धाराएं भी लगाई हैं.

IT एक्ट की इन धाराओं के तहत हो सकती है कार्रवाई

धारा 66 (इ) - इस धारा के तहत किसी की निजता भंग करने के लिए सजा का प्रावधान है.

धारा 67 - आपत्तिजनक सूचनाओं के प्रकाशन से जुड़े प्रावधान इस धारा में समाहित हैं.

धारा 67 (ए) - यह धारा उपरोक्त मामले में अहम है. क्योंकि इसी के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से सेक्स या अश्लील सूचनाओं को प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए सजा का प्रावधान है.

धारा 67 (बी) - यह धारा भी इस मामले से संबंधित है. क्योंकि इसी धारा के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से आपत्तिजनक सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण करना और उनमें बच्चों को अश्लील अवस्था में दिखाए जाना दंडनीय अपराध है.

धारा 72 (ए) - यह धारा आपसी विश्वास और निजता को भंग करने से संबंधित है इसके तहत सजा और जुर्माने का प्रावधान है.

क्या है साइबर अपराध

आज का युग कम्प्यूटर और इंटरनेट का युग है. कम्पयूटर की मदद के बिना किसी बड़े काम की कल्पना करना भी मुश्किल है. ऐसे में अपराधी भी तकनीक के सहारे हाईटेक हो रहे हैं. वे जुर्म करने के लिए कम्प्यूटर, इंटरनेट, डिजिटल डिवाइसेज और वर्ल्ड वाइड वेब आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऑनलाइन ठगी या चोरी भी इसी श्रेणी का अहम गुनाह होता है. किसी की वेबसाइट को हैक करना या सिस्टम डेटा को चुराना ये सभी तरीके साइबर क्राइम की श्रेणी में आते हैं. साइबर क्राइम दुनिया भर में सुरक्षा और जांच एजेंसियां के लिए परेशानी का सबब बन गया है.

साइबर क्राइम को लेकर सख्त कानून

भारत में भी साइबर क्राइम मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है. सरकार ऐसे मामलों को लेकर बहुत गंभीर है. भारत में साइबर क्राइम के मामलों में सूचना तकनीक कानून 2000 और सूचना तकनीक (संशोधन) कानून 2008 लागू होते हैं. मगर इसी श्रेणी के कई मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), कॉपीराइट कानून 1957, कंपनी कानून, सरकारी गोपनीयता कानून और यहां तक कि आतंकवाद निरोधक कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है.

कई मामलों में लागू होता है आईटी कानून

साइबर क्राइम के कुछ मामलों में आईटी डिपार्टमेंट की तरफ से जारी किए गए आईटी नियम 2011 के तहत भी कार्रवाई की जाती है. इस कानून में निर्दोष लोगों को साजिशों से बचाने के इतंजाम भी हैं. लेकिन कंप्यूटर, इंटरनेट और दूरसंचार इस्तेमाल करने वालों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए कि उनसे जाने-अनजाने में कोई साइबर क्राइम तो नहीं हो रहा है.

पोर्नोग्राफी के मामलों में भी आईटी एक्ट

इंटरनेट के माध्यम से अश्लीलता का व्यापार भी खूब फलफूल रहा है. ऐसे में पोर्नोग्राफी एक बड़ा कारोबार बन गई है. जिसके दायरे में ऐसे फोटो, विडियो, टेक्स्ट, ऑडियो और सामग्री आती है, जो यौन, यौन कृत्यों और नग्नता पर आधारित हो. ऐसी सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से प्रकाशित करने, किसी को भेजने या किसी और के जरिए प्रकाशित करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून लागू होता है. दूसरों के नग्न या अश्लील वीडियो तैयार करने वाले या ऐसा एमएमएस बनाने वाले या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से इन्हे दूसरों तक पहुंचाने वाले और किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ अश्लील संदेश भेजने वाले लोग इसी कानून के दायरे में आते हैं. पोर्नोग्राफी प्रकाशित करना और इलेक्ट्रॉनिक जरियों से दूसरों तक पहुंचाना अवैध है, लेकिन उसे देखना, पढ़ना या सुनना अवैध नहीं माना जाता. जबकि चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना भी अवैध माना जाता है. इसके तहत आने वाले मामलों में आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 67 (ए), आईपीसी की धारा 292, 293, 294, 500, 506 और 509 के तहत सजा का प्रावधान है. जुर्म की गंभीरता के लिहाज से पहली गलती पर पांच साल तक की जेल या दस लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है लेकिन दूसरी बार गलती करने पर जेल की सजा सात साल तक बढ़ सकती है.

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों पर भी आईटी एक्ट

बच्चों के साथ पेश आने वाले मामलों पर कानून और भी ज्यादा सख्त है. बच्चों को सेक्सुअल एक्ट में शामिल करना या नग्न दिखाना या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में कोई सामग्री प्रकाशित करना या दूसरों को भेजना भी इसी कानून के तहत आता है. बल्कि भारतीय कानून के मुताबिक जो लोग बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री तैयार करते हैं, इकट्ठी करते हैं, ढूंढते हैं, देखते हैं, डाउनलोड करते हैं, विज्ञापन देते हैं, प्रमोट करते हैं, दूसरों के साथ लेनदेन करते हैं या बांटते हैं तो वह भी गैरकानूनी माना जाता है. बच्चों को बहला-फुसलाकर ऑनलाइन संबंधों के लिए तैयार करना, फिर उनके साथ यौन संबंध बनाना या बच्चों से जुड़ी यौन गतिविधियों को रेकॉर्ड करना, एमएमएस बनाना, दूसरों को भेजना आदि भी इसी के तहत आते हैं. इस कानून में 18 साल से कम उम्र के लोगों को बच्चों की श्रेणी में माना जाता है. ऐसे मामलों में आईटी (संशोधन) कानून 2009 की धारा 67 (बी), आईपीसी की धाराएं 292, 293, 294, 500, 506 और 509 के तहत सजा का प्रावधान है. पहले अपराध पर पांच साल की जेल या दस लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है. लेकिन दूसरे अपराध पर सात साल तक की जेल या दस लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.

बच्चों और महिलाओं को तंग करना

आज के दौर में सोशल नेटवर्किंग साइट्स खूब चलन में हैं. ऐसे में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों, ई-मेल, चैट वगैरह के जरिए बच्चों या महिलाओं को तंग करने के मामले अक्सर सामने आते हैं. इन आधुनिक तरीकों से किसी को अश्लील या धमकाने वाले संदेश भेजना या किसी भी रूप में परेशान करना साइबर अपराध के दायरे में ही आता है. किसी के खिलाफ दुर्भावना से अफवाहें फैलाना, नफरत फैलाना या बदनाम करना भी इसी श्रेणी का अपराध है. इस तरह के केस में आईटी (संशोधन) कानून 2009 की धारा के तहत सजा का प्रावधान है. दोष साबित होने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.

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