दिल्ली का पांच सितारा होटल लीला पैलेस के कमरा नंबर 345 में पिछले दो दिनों से ठहरी हुई थीं केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर थरूर. दिल्ली में अपने पति का सरकारी बंगला छोड़ कर आखिर सुनंदा होटल में क्यों रह रही थीं? कमरा नंबर 345 में 17 जनवरी की दोपहर तीन बजे से लेकर रात साढ़े आठ बजे तक क्या कुछ हुआ? सुनंदा और शशि थरूर की आखिरी मुलाकात कितने बजे हुई? उस मुलाकात में क्या हुआ?
सुनंदा पुष्कर थरूर दोपहर बाद दिल्ली के इस पांच सितारा होटल में अकेले चेक-इन करती हैं. होटल का एक साधाराण कमरा उनके नाम बुक था. सुनंदा के चेक-इन करने के कुछ ही घंटे बाद शशि थरूर भी इसी होटल मे पहुंचते हैं और सुनंदा के कमरे के पास ही एक दूसरा कमरा बुक कराते हैं और वहीं ठहर जाते हैं. दोनों के बीच रिश्ते ठीक नहीं थे ये साफ पता चल रहा था.
मगर एक ही होटल के अलग-अलग कमरे में रुकने के बाद दोनों की मुलाकात हुई और फिर सुनंदा शशि थरूर के साथ एक ही कमरे में ठहरने को राजी हो गईं. इसी के बाद 16 जनवरी दोपहर करीब पौने चार बजे शशि थरूर के कहने पर होटल स्टाफ उनका कमरा बदल देता है. अब साधाराण कमरे की सजगह थर्ड फ्लोर पर दो रूम बुक होते हैं. कमरा नंबर 345 और कमरा नंबर 342. रूम नंबर 345 एग्जीक्यूटिव सुइट है, जिसमें शशि थरुर और सुनंदा रुके हुए थे, जबकि मिलने-जुलने वाले और स्टाफ के लोगों के लिए रुम नंबर 342 बुक था.
शशि थरूर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जाना था. मगर होटल से निकलने से पहले एक बार फिर शशि थरूर और सुनंदा के बीच बहस होती है. झगड़ा काफी बढ़ जाता है, जिसके बाद शशि थरूर ना सिर्फ कमरे से बल्कि होटल से बाहर चले जाते हैं. शशि थरूर के जाने के बाद सुनंदा शराब पीने लगती हैं. शशि थरूर के चले जाने के बाद सुनंदा लगातार अपने कमरे में ही रहती हैं. दोपहर करीब साढ़े तीन बजे होटल स्टाफ ने उन्हें आखिरी बार कमरे में जिंदा देखा था. इसके बाद से कमरा नंबर 345 अंदर से बंद था.
दिल्ली के इस पांच सितारा होटल में तब तक सब कुछ सामान्य सा ही था. केंद्रीय मंत्री शशि थरूर बस अभी-अभी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से लौटे थे. उनके साथ उनके निजी सचिव अभिनव कुमार भी थे. होटल पहुंचते ही उन्हें पता चलता है कि सुनंदा पिछले करीब पांच घंटे से कमरे से बाहर नहीं आई हैं. यहां तक कि होटल स्टाफ के बेल बजाने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. चूंकि शशि थरूर भी उसी कमरे में ठहरे थे लिहाजा दूसरी चाबी से वो कमरा नंबर 345 का दरवाजा खोलते हैं. दरवाजे के साथ ही ड्राइंग रूम था. बेडरूम अंदर की तरफ था.
सुइट में दाखिल होने के बाद शशि थरूर ने वहां मौजूद अटेंडेंट से सुनंदा के बारे मे पूछा तो पता चला कि मैडम सो रही हैं. इसके साथ ही अटेंडेंट ने उन्हें ये भी बताया की वो काफी वक्त से सो रही हैं. इसके बाद शशि थरूर बेड रुम में गए. वहां सुनंदा बेड पर लेटी थीं और उन पर रजाई पड़ी हुई थी. शशि थरूर वापस ड्राइंग रूप में आते हैं और अपने निजी सचिव अभिनव से बात करने लगते हैं. फिर इसी बीच शशि थरूर के मोबाइल पर कोई कॉल आती है. अगले चार मिनट तक वो फोन पर बात करते रहते हैं.
फोन पर बात करने के बाद शशि थरूर सुनंदा को आवाज देते हैं पर सुनंदा की तरफ से उन्हें कोई जवाब नहीं मिलता. इसके बाद वो वापस बेडरूम में जाते हैं और पहली बार सुनंदा को हिलाते हुए जगाने की कोशिश करते हैं, लेकिन सुनंदा के जिस्म में कोई हरकत नहीं होती. शशि थरूर घबरा जाते हैं और फौरन डाक्टर को बुलाने के लिए कहते हैं.
होटल स्टाफ की मदद से फौरन डाक्टर कमरा नंबर 345 में पहुंचता है. सुनंदा को चेक करता है और तब पहली बार पता चलता है कि सुनंदा सो नहीं रही बल्कि उसकी मौत हो चुकी है. ये सुनते ही शशि थरुर के पीए अभिनव ने फौरन सरोजनी नगर थाना के एसएचओ को फोन किया और फिर कुछ ही देर में खबर पूरे देश में फैल चुकी थी. सुनंदा की मौत की खबर जंगल में आग की तरह फैल चुकी थी.
दरअसल, मौत की टाइमिंग ही कुछ ऐसी थी. मौत से दिन दिन पहले सुनंदा और शशि थरूर के रिश्तों में तलखी की बात सामने आती है. सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए पता चलता है कि एक पाकिस्तानी पत्रकार महक तरार के साथ शशि थरूर के रिश्तों को लेकर सुनंदा नाराज थीं.
सुनंदा और शशि थरूर की आखिरी मुलाकात 17 जनवरी की सुबह करीब सवा आठ बजे हुई थी. दोनों में बहस हुई थी और उसके बाद शशि थरूर होटल से निकल गए. उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जाना था. उनके जाने के बाद सुनंदा दोपहर तीन बजे तक सही-सलामत थीं, क्योंकि होटल के स्टाफ ने आखिरी बार उन्हें दोपहर तीन बजे के आसपास ही देखा था. इसके बाद सुनंदा ने खुद को कमरा नंबर 345 में बंद कर लिया था.
होटल स्टाफ के मुताबिक सुनंदा ने दोपहर का खाना भी नहीं खाया था, क्योंकि उन्होंने खाने का कोई आर्डर ही नहीं दिया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक शशि थरूर के जाने के बाद सुनंदा के कमरे में ना तो कोई आया था और ना ही खुद सुनंदा कमरे से बाहर निकलीं थीं. शुरुआती रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए उसके मुताबिक सुनंदा की मौत शुक्रवार शाम 4 से 7 के बीच हुई है. सुनंदा के पेट में कुछ सॉलिड नहीं पाया गया. इसका मतलब ये कि पिछले कई घंटों से खाना नहीं खाया था. सुनंदा का विसरा और दूसरे सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं ताकि ये पता चल सके कि कहीं मौत दवा के ओवरडोज की वजह से तो नहीं हुई. सुनंदा का ह्रदय भी सुरक्षित रखा गया है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि दिल से जुड़ी किसी बीमारी की वजह से तो मौत नहीं हुई.
डॉक्टरों के मुताबिक सारे रिपोर्ट आने में दो-तीन दिन लग जाएंगे. यानी मौत की असली वजह सामने आने में अभी वक्त लगेगा. वैसे सुनंदा पिछले काफी वक्त से बीमार चल रही थीं. तिरुवनंतपुरम में उनका इलाज भी चल रहा था. सुनंदा को लूपस और पेट में टीबी की बीमारी थी. लिहाजा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पहले डॉक्टर हर पहलू पर गौर कर लेना चाहते हैं. वैसे जांच में लगी दिल्ली पुलिस के सूत्र बताते हैं कि डिप्रेशन की दवा का ओवरडोज भी सुनंदा की मौत की वजह हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक सुनंदा ने अलप्रेक्स का ओवरडोज लिया था. अलप्रेक्स डिप्रेशन की दवा है.