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राजा रघुवंशी मर्डर: 790 पन्नों की चार्जशीट में दर्ज सोनम की खूनी साजिश की बातें धरी रह गईं, कहां चूक गई पुलिस?

राजा रघुवंशी मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को 11 महीने बाद जमानत मिल गई. लेकिन अचानक उसे जमानत कैसे मिली? हर कोई यही जानना चाहता है. मेघालय पुलिस की किस बड़ी गलती ने किया केस को कमजोर और कोर्ट ने क्या कहा. पढ़ें पूरी कहानी.

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सोनम के मामले में पुलिस ने बड़ी गलती कर दी (फोटो-ITG)
सोनम के मामले में पुलिस ने बड़ी गलती कर दी (फोटो-ITG)

Raja Raghuvanshi Murder Case: शिलॉन्ग की एक कोर्ट ने 11 महीने बाद राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी और उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी को ज़मानत दे दी. कोर्ट ने उसे ज़मानत देते हुए जहां सबूतों और गवाहों से दूर रहने की हिदायत दी, वहीं शिलॉन्ग ना छोड़ने की ताकीद भी की. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि इतने चर्चित और हाई प्रोफाइल केस में आख़िर सोनम को एकाएक ज़मानत मिली कैसे? तो जवाब है मेघालय पुलिस की उस एक ग़लती की वजह से, जिसने रातों-रात उसकी पूरी तफ्तीश को ही सवालों के घेरे में ला दिया.

जिस राजा रघुवंशी के कत्ल ने सिर्फ इंदौर ही नहीं, पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया. जिस राजा रघुवंशी के कत्ल में खुद उसकी नई नवेली दुल्हन मास्टरमाइंड निकली और जिस राजा रघुवंशी के क़त्ल में संदिग्ध क़ातिलों की तस्वीरें सीसीटीवी कैमरों से लेकर यूट्यूबर के कैमरे तक में कैद हो गई थी, उसी कत्ल के केस की मास्टरमाइंड सोनम रघुवंशी को करीब 11 महीने बाद एकाएक कोर्ट से जमानत मिल गई.

एक ऐसा केस जिससे पूरा देश उबल रहा था, उस केस की प्राइम सस्पेक्ट सोनम रघुवंशी को मिली इस जमानत ने इस केस को एक बार फिर से सुर्खियों में तो जरूर ला दिया, लेकिन अब इस केस की जांच को लेकर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं. सवाल ये है कि आखिर इन11 महीनों में एकाएक ऐसा क्या हुआ कि सोनम को अदालत ने जमानत दे दी? क्या सोनम के खिलाफ सबूत नाकाफी थे या फिर शिलॉन्ग पुलिस की जांच में कोई कमी रह गई? तो इस कहानी में सोनम की जमानत के पीछे छुपी इन्हीं वजहों को टटोलने की कोशिश करेंगे.

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शिलॉन्ग के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट दशलेन आर खारबेंग की अदालत में लीगल एड कमेटी ने सोनम की ओर से जमानत की अर्जी दाखिल की और अपना पक्ष रखा, लेकिन जमानत को लेकर हुई चौथी सुनवाई में एकाएक पासा पलट गया और कोर्ट ने सोनम के अरेस्ट मेमो में मौजूद खामियों को देखते हुए सोनम रघुवंशी को जमानत पर रिहा करने का हुक्म सुना दिया.

असल में पुलिस ने सोनम की गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेजों में धारा ही गलत लगा दी. लगाना था बीएनएस की धारा 103 (1) और लगा दी बीएनएस की धारा 403(1). यानी इल्जाम कत्ल की जगह संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग करने का बन गया.

अब आप ही बताइए, कत्ल के इतने संगीन मामले में जिसमें पति के कत्ल के इल्जाम में पुलिस आरोपी पत्नी की गिरफ्तारी के लिए मेघालय से लेकर यूपी तक की दूरी छान रही हो, उसकी गिरफ्तारी के वक्त ही जब इतना बड़ा झोल रह जाए, तो उसका फायदा तो मुल्जिम को मिलेगा ही. हुआ ये कि इसे सोनम की गिरफ्तारी के मामले में गिरफ्तारी की वजहों की साफ और सही जानकारी ना देने के तौर पर देखा गया और कोर्ट ने कहा कि ये गिरफ्तार शख्स के मौलिक अधिकारों यानी 22 (1) का सीधा-सीधा उल्लंघन है. और कानून ये कहता है कि अगर किसी की गिरफ्तारी में इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो आरोपी को जमानत दी जा सकती है.

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हालांकि पुलिस ने इसे सिर्फ एक लिपिकीय त्रुटि यानी लिखा पढ़ी में रह गई कमी बताने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने पुलिस की इस दलील को खारिज कर दिया. असल में कमी ये भी रह गई कि मेघायल पुलिस ये नहीं बता सकी कि राजा रघुवंशी के कत्ल के मामले में जब सोनम को 2 जून 2025 को गाजीपुर कोर्ट में पेश किया गया, तब उसकी ओर से वकील कौन था? इससे ये माना गया कि कोर्ट में अपनी बात रखने या अपने अधिकारों के उल्लंघन को लेकर सोनम तब कोई आपत्ति भी दर्ज नहीं करवा सकी, जो कि उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना गया. पुलिस के दस्तावेजों में ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे साबित होता कि उसे गाजीपुर में कोई कानूनी सहायता दी गई थी. ऐसे में कोर्ट ने इसे सोनम को बेल पर रिहा करने का एक आधार मान लिया.

बचाव पक्ष यानी सोनम के वकील ने कोर्ट में अरेस्ट मेमो के अलावा दूसरे दस्तावेजों और यहां तक कि केस डायरी में भी गलत धारा लिखे जाने की बात कही, जिसने सोनम की जमानत की राह आसान कर दी. ऊपर से सोनम के 11 महीने से जेल में बंद होने और सुनवाई की सुस्त रफ्तार का फायदा भी आरोपी को मिला. फिलहाल, हालत ये है कि सोनम को जमानत मिलने का फायदा अब इस केस के दूसरे आरोपियों को मिलने की उम्मीद दिखाई देने लगी है. क्योंकि जब के मुख्य आरोपी को ही अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया है, तो दूसरे आरोपी भी अपने लिए राहत की मांग कर सकते हैं और इस केस अब यही होता दिख रहा है.

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हालांकि सोनम को जमानत देते हुए कोर्ट ने उसके सामने कुछ शर्तें भी रखीं. जिनमें उसे सबूतों या गवाहों से दूरी बना कर रखने और इनसे किसी तरह का छेड़छाड़ ना करने की चेतावनी दी गई. उसे हर पेशी पर कोर्ट में हाजिर होने को कहा गया और कहा कि वो बगैर इजाजत के शिलॉन्ग जिले से बाहर ना जाए. जमानत के लिए 50 हजार रुपये के मुचलके की शर्त भी थी, जिसे इंदौर से शिलॉन्ग पहुंचे सोनम के पिता देवी सिंह ने भरा. हालांकि शिलॉन्ग जेल के बाहर देवी सिंह से मीडिया ने बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन देवी सिंह ने अपना मुंह सी रखा था.

जाहिर है सोनम को जमानत तो मिल गई है, लेकिन फिलहाल वो शिलॉन्ग से बाहर नहीं जा सकती. लेकिन शिलॉन्ग से दूर राजा और सोनम के होम टाउन इंदौर में सोनम को मिली इस जमानत को लेकर हलचल है. राजा के भाई ने जहां इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है, वहीं उसकी मां अब इतनी नाउम्मीद हो चुकी हैं कि अब इतने महीने बाद इस केस की सीबीआई जांच की मांग करने लगी हैं.

राजा रघुवंशी केस का ये हाल तब हुआ, जब मेघालय पुलिस ने इस मामले की जांच कर बेहद पुख्ता चार्जशीट दाखिल करने का दावा किया था. इस चार्जशीट में पुलिस ने सोनम और बाकी आरोपियों पर क्या और कैसे इल्जाम लगाए थे, वो भी आपको बताते हैं.

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मेघालय पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक राजा रघुवंशी के कत्ल की मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी नंबर 1 कोई और नहीं राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी है. सोनम के अलावा को कॉंस्पिरेटर के तौर पर दूसरा नाम सोनम के आशिक राज सिंह कुशवाहा का है. इन दोनों के अलावा इस चार्जशीट में तीन और नाम है. आकाश सिंह राजपूत, विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी. पुलिस के मुताबिक ये वही तीनों कातिल हैं, जिन्हें सोनम और राज कुशवाहा ने राजा के कत्ल के लिए चुना था. यानि चार्जशीट के हिसाब से राजा के कत्ल के कुल पांच किरदार हैं और यही हैं वो पांचों किरदार.

चार्जशीट के मुताबिक, 23 मई को दिन में सोहरा के करीब विशाल सिंह चौहान ने तेजधार हथियार दाव से राजा पर पहला वार किया था. पहला वार ही बेहद घातक था. जिस वक्त विशाल ने राजा पर पहला वार किया तब उसके आसपास बाकी दो हत्यारे यानि आकाश और आनंद भी खड़े हुए थे. साथ ही वहीं बिल्कुल करीब सोनम भी खड़ी थी. दाव के पहले वार से राजा दर्द से तड़प उठा. बेतहाशा खून बहने लगा. शायद वो कातिलों की मंशा समझ चुका था. तड़पते हुए वो अब गिड़गिड़ाने लगा था. दर्द की वजह से वो चीख भी रहा था. 

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अब तक सब कुछ पास खड़ी अपनी आंखों से देख रही सोनम राजा की तड़प और चीख नहीं सुन सकी. वो उसका खून देखकर भी घबरा गई. शायद वो राजा से नजरें भी नहीं मिलाना चाहती थी. इसीलिए तुरंत वो राजा से दूर चली जाती है. इसके बाद विशाल फिर से उसी दाव से कई बार राजा पर हमला करता है. थोड़ी देर बाद जब राजा की चीख खामोश हो जाती है, तब दूर पीठ पीछे किए खड़ी सोनम वापस लौटती है. विशाल से पूछती है कि राजा मर गया या अब भी जिंदा है. इसके बाद जब उसे यकीन हो जाता है कि राजा मर चुका है, तब तीनों कातिलों के साथ सोनम भी लाश उठाने में मदद करती है और फिर उसे खाई में फेंक देती है. इसके बाद सोनम तीनों कातिल के साथ तेज कदमों से कुछ दूरी तक चलती है और फिर तीनों को एक जगह छोड़कर वहां से अकेले निकल जाती है.

चार्जशीट के मुताबिक, 23 मई से पहले सोनम ने अपने पति राजा को मारने की तीन और कोशिश की थी. पहली कोशिश 21 मई को गुवाहाटी में की गई थी. तीनों कातिल सोनम और राजा से पहले ही गुवाहाटी पहुच गये थे, लेकिन गुवाहाटी में ऐसी कोई सुनसान जगह नहीं मिली. ऊपर से तीनों कातिलों और खुद सोनम के लिए गुवाहाटी एक नई और अनजान जगह थी. इसलिए 21 मई की पहली कोशिश नाकाम रही. इस पहली नाकाम कोशिश के बाद ही सोनम ने अपने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर अचानक मेघालय जाने का प्लान बनाया था. 21 मई को सोनम और राजा मेघालय पहुंचे. पीछे पीछे तीनों कातिल भी मेघालय पहुंच चुके थे. क्योंकि सोनम लगातार फोन पर उन्हें अपना प्लान, रूट सब कुछ बता रही थी.

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चार्जशीट के मुताबिक, राजा रघुवंशी हत्याकांड के दिन मौका-ए-वारदात पर कुच चार लोग थे. सभी की अपनी अपनी भूमिका थी. सोनम को सेल्फी लेने के बहाने राजा को सेल्फी प्वॉइंट तक ले जाना था. सेल्फी प्वॉइंट पर पहुंचती ही उसे विशाल को इशारा करना था. इस इशारे के बाद ही विशाल को राजा पर हमला करना था. विशाल तीनों कातिलों में वो कातिल था जिसे राजा पर पहला वार करना था. अगर राजा उसके काबू में नहीं आता तब बाकी दोनों कातिलों को आगे आना था. चार्जशीट के मुताबिक बाकी दो कातिलों को मौका ही नहीं मिला. क्योंकि सोनम के इशारा करते ही विशाल ने दाव जो एक तरह की छोटी कुल्हाड़ी होती है, उससे राजा के सिर पर पीछे की तरफ से एक के बाद एक दो वार किए. इसके बाद राजा की कहानी हमेशा के लिए खत्म हो गई थी.

दूसरा किलर आकाश सेल्फी प्वॉइंट से कुछ दूरी पर ही बैठकर निगरानी कर रहा था. ताकि कोई वहां अचानक आ जाए तो वो आगाह कर सके. जबकि आनंद भी विशाल के करीब ही था. वो आनंद ही था जिसकी आईडी कार्ड पर सिम खरीदे गए थे. जबकि सोनम का प्रेमी राज कुशवाहा शिलॉंग से दूर इंदौर में बैठा लगातार सोनम को गाइड कर रहा था. 

790 पन्नों की चार्जशीट में मेघालय पुलिस ने उन तमाम सबूतों का भी जिक्र किया है, जो आरोपियों के खिलाफ हैं. इनमें कई सीसीटीवी कैमरों की तस्वीरें, मोबाइल की तस्वीरें, स्टे होम, किराए की स्कूटी और मोबाइल के कॉल डिटेल शामिल है. चार्जशीट में राजा के कत्ल की पूरी कहानी, कत्ल की साजिश की कहानी भी कलमबंद है.

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