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करोड़ों की जमीन, रंगदारी और अतीक गैंग से दूसरी बार दुश्मनी... उमेश पाल के कत्ल का मोटिव क्या?

प्रयागराज में बुल्डोजर से कोठी को मिट्टी में मिलाने की ये कार्रवाई घंटों तक चलती रही और करीब 200 वर्ग मीटर में बने इस इमारत को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया. बताया गया कि इस कोठी को बनाने के लिए मकान मालिक ने पीडीए से नक्शा ही पास नहीं करवाया था.

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अब अतीक और उमेश पाल के बीच दुश्मनी की नई कहानी निकलकर सामने आ रही है
अब अतीक और उमेश पाल के बीच दुश्मनी की नई कहानी निकलकर सामने आ रही है

पूरे सूबे को दहला देने वाले उमेश पाल हत्याकांड की वजह आखिर क्या थी? अब तक यूपी पुलिस बता रही है कि उमेश पाल तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल मर्डर केस का गवाह था, इसीलिए उसकी हत्या कर दी गई. लेकिन जब जांच में ये साफ हो गया कि उमेश पाल दिवंगत विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में गवाह था ही नहीं, तो अब कत्ल की वजह को लेकर पुलिस की एक नई कहानी सामने आई है. पुलिस कह रही है कि उमेश पाल का एक जमीन को लेकर अतीक अहमद के साथ विवाद चल रहा था. इसी के चलते उसकी हत्या की गई. इस तरह से ये मामला और उलझता जा रहा है. 

उमेश पाल मर्डर केस का साइड इफेक्ट
प्रयागराज में एक मकान पर बुलडोजर चलने की तस्वीरों को आप उमेश पाल के मर्डर केस का साइड इफेक्ट भी कह सकते हैं और इसी हत्याकांड के इर्द-गिर्द घूमती यूपी की सियासत का साइड इफेक्ट भी. जबसे कातिलों ने प्रयागराज की सड़कों पर खून बहाया है, शासन-प्रशासन से लेकर पूरा तंत्र मानों इसी वारदात में शामिल शूटरों को ढूंढने के काम में जुट गया है. इस मामले से जुड़े शूटर तो फिलहाल फरार हैं, लेकिन शासन का गुस्सा उमेश पाल मर्डर केस के मुख्य आरोपी बाहुबली अतीक अहमद के नजदीकियों पर फूट रहा है. 

अतीक के करीबी की कोठी को गिराया
प्रयागराज के करेली इलाके में मौजूद ये आलीशान कोठी जफर अहमद खान की बताई जाती है और जफर अहमद को अतीक अहमद का नजदीकी. ऐसे में जफर की ये कोठी अब शासन के गुस्से की आंच में झुलस कर भरभरा कर गिर रही है. ज़मीदोज हो रही है. बुधवार की सुबह जब पीडीए यानी प्रयागराज डेवलपमेंट ऑथोरिटी का ये बुल्डोजर इस कोठी को गिराने शहर की इन गलियों में पहुंचा तो कोठी की एक-एक दरो-दीवार को चकनाचूर होते हुए देखने के लिए तमाशबीनों की अच्छी खासी भीड़ लग गई.

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अतीक की वजह से हुआ एक्शन
बुल्डोजर से कोठी को मिट्टी में मिलाने की ये कार्रवाई घंटों तक चलती रही और करीब 200 वर्ग मीटर में बने इस इमारत को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया. बताया गया कि इस कोठी को बनाने के लिए मकान मालिक ने पीडीए से नक्शा ही पास नहीं करवाया था. लेकिन जानकारों की मानें तो असल में ये उमेश पाल हत्याकांड में अतीक अहमद का नाम आने के बाद उसके करीबियों पर हो रही कार्रवाई की वो पहली किश्त है, जिसका ऐलान खुद सीएम योगी ने कुछ रोज पहले विधान सभा में कर दिया था.

जफर के घर आए थे उमेश के शूटर!
बताया गया कि उमेश पाल की हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर इस कोठी में पहुंचे थे और यहीं उनकी अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन से मुलाकात हुई थी. ऐसे में किसी ना किसी रूप में उमेश पाल हत्याकांड की साज़िश को अंजाम तक पहुंचाने में इस कोठी का रोल भी आ गया और यही इस कोठी के जमींदोज होने की एक वजह भी बन गई. पुलिस ने इस कोठी के मालिक जफर अहमद की जो जन्म कुंडली बताई है, उसके मुताबिक वो ना सिर्फ़ अतीक का खासमखास है, बल्कि अतीक के गुंडाराज का एक अहम किरदार भी है. कोठी को गिराने के दौरान पुलिस ने उसके इसी मकान से दो विदेशी राइफल और तलवार मिलने की भी बात कही. 

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किराए पर रहती थी अतीक की पत्नी
हालांकि अतीक और उसकी बीवी शाइस्ता परवीन के वकील खान सौलत हनीफ की मानें तो ये कोठी कोई बेनामी संपत्ति नहीं बल्कि बांदा के रहनेवाले पत्रकार जफर अहमद खान की अपनी कमाई से खड़ी की गई थी और इसे बगैर किसी नोटिस के पीडीए के अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया. हां ये जरूर है कि चकिया में अतीक अहमद का मकान तोड़ दिए जाने के बाद से उसकी बीवी शाइस्ता समेत उसके घर के लोग इसी कोठी में साल 2021 से किराये पर रह रहे थे.
 

लखनऊ में अतीक के फ्लैट पर दबिश
शासन के गुस्से की दूसरी तस्वीर लखनऊ से सामने आई है. ये तस्वीरें लखनऊ के महानगर इलाके में मौजूद यूनिवर्सल अपार्टमेंट की हैं, जहां बाहुबली अतीक अहमद के फ्लैट पर पुलिस ने छापेमारी की. वैसे तो जब पुलिस ने अतीक के इस फ्लैट पर दबिश दी, तो फ्लैट में ताला लगा था, लेकिन पुलिस ने दावा किया कि प्रयागराज में उमेश पाल पर गोलियां बरसाने के बाद शूटरों ने भागने के सिलसिले में कुछ देर के लिए यहां शरण ली थी. पुलिस ने इस फ्लैट की पार्किंग में मौजूद अतीक की लैंड क्रूजर और मर्सिडीज गाड़ियों को जब्त कर लिया है और साथ ही फ्लैट को सील कर दिया है. 

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24 फरवरी से गायब है असद
पुलिस को उमेश पाल के कत्ल के सिलसिले में अतीक के बेटे असद की तलाश है और पुलिस का दावा है कि असद ही इस फ्लैट में रहा करता था. पुलिस को पता चला है कि असद करीब हफ्ते भर पहले तक यहीं था लेकिन 24 फरवरी की शाम से वो गायब है. 24 फरवरी ही वो तारीख है, जब उमेश पाल की हत्या हुई थी.

क्रेटा कार के मालिक पर सस्पेंस
अब शासन के गुस्से की तीसरी तस्वीर में वो क्रेटा कार है, जिसमें सवार होकर शूटर उमेश पाल की जान लेने पहुंचे थे. पुलिस ने जब शूटआउट की वारदात अपनी तफ्तीश शुरू की, तो पता चला कि जिस कार का वारदात में इस्तेमाल किया गया, वो प्रयागराज के ईट-ऑन बिरयानी नाम के फूड आउटलेट के मालिक नफीस अहमद की है. ऐसे में पुलिस ने नफीस को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. हालांकि नफीस ने अपनी कार को लेकर अलग ही स्टोरी सुनाई है. उसने बताया है कि उसने अपनी ये क्रेटा रुखसार नाम की एक महिला को कई महीने पहले बेच दी थी. ऐसे में उसका ना तो उस गाड़ी से कोई वास्ता है और ना ही शूट आउट से. लेकिन पुलिस ये खंगाल रही है कि कहीं ये भी अतीक की साजिश का कोई हिस्सा तो नहीं.

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उमेश पाल के कत्ल का मोटिव
अब बात उमेश पाल के कत्ल के मोटिव की. पुलिस की तफ्तीश में उमेश पाल के कत्ल की वजह को लेकर जो नई कहानी सामने आई है, उसके मुताबिक इस कत्ल के पीछे अतीक के साथ उमेश पाल के एक जमीन के झगड़े की कहानी है. पुलिस सूत्रों की मानें तो कत्ल से ठीक एक साल पहले यानी 24 फरवरी 2022 को उमेश और अतीक की दुश्मनी के एक नए एपिसोड की शुरुआत हुई थी. 

दरअसल, पीपलगांव में उमेश पाल की एक पुश्तैनी जमीन थी. 22 फरवरी 2022 को किसी ने फोन पर उमेश को बताया कि कुछ लोग उसकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. उमेश मौके पर पहुंचा तो देखा कि खालिद जफर, मोहम्मद मुस्लिम, अबूसाद, दिलीप कुशवाहा समेत छह-सात लोग मजदूरों के साथ जमीन की घेरेबंदी की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस की मानें तो तब खालिद जफर ने उमेश की कनपटी पर हथियार सटाकर उससे जमीन छोड़ने के बदले में अतीक की तरफ से एक करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की. 

लेकिन आखिरकार कई महीने तक चक्कर काटने के बाद उमेश पाल 24 अगस्त, 2022 को अतीक अहमद और उसके गुर्गों के खिलाफ इस सिलसिले में रिपोर्ट दर्ज करवाने में कामयाब रहा. पुलिस की मानें तो अतीक ने इसके बाद उमेश से नए सिरे से दुश्मनी मान ली और उससे बदला लेने की साजिश रचने लगा. विधायक राजू पाल के कत्ल और खुद उमेश के अपहरण के के मामले में उनकी दुश्मनी तो खैर पहले से चली आ रही थी. ऐसे में अब इस कत्ल को इसी एक करोड़ की रंगदारी को लेकर छिडी जंग के नतीजे के तौर पर भी देखा जा रहा है.

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